कठुआ रेप मामले में आगे की सुनवाई जम्मू से बाहर हो : पीड़ित परिवार की वकील

  • 13 अप्रैल 2018
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Image caption वकीलों के समूह ने चार्जशीट दायर करने को लेकर खड़ी की थीं अड़चनें

जम्मू के कठुआ रेप मामले में अब नया मोड़ आ गया है. पीड़ित परिवार पूरे मामले की सुनवाई अब जम्मू-कश्मीर से बाहर कराना चाहता है.

"हम चाहते हैं कि बच्ची को भी इंसाफ़ मिले. सभी पक्षों को इंसाफ़ मिले. लेकिन जम्मू-कश्मीर में पूरे मामले का सही ट्रायल हो पाएगा ऐसा मुझे नहीं लगता. जिस तरह कठुआ में चार्जशीट दायर करने गई क्राइम ब्रांच की टीम को डराया-धमकाया गया और 'भारत माता की जय' के नारे लगाए गए, मुझे नहीं लगता ऐसे हालात में राज्य के अंदर इस मामले की सुनवाई ठीक से हो पाएगी"

पीड़ित परिवार की वकील दीपिका राजावत ने बीबीसी से फ़ोन पर हुई बातचीत में ये बात कही.

जनवरी के महीने में कुठआ ज़िले के रसाना गांव की आठ साल की बकरवाल लड़की, अपने घोड़ों को चराने गई थी और वापस नहीं लौटी. सात दिन बाद उसका शव मिला, जिस पर चोट के गहरे निशान थे.

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Image caption दीपिका राजावत, पीड़ित परिवार की वकील

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से पुष्टि हुई कि हत्या से पहले बच्ची नशीली दवाइयां देकर उसका बलात्कार किया गया था.

रेप केस पर जम्मू-कश्मीर में उबाल

पूरे मामले की जांच जम्मू-कश्मीर पुलिस की क्राइम ब्रांच कर रही है.

क्राइम ब्रांच ने जांच के बाद आठ लोगों को साज़िश, अपहरण, बलात्कार और हत्या के मामले में गिरफ़्तार किया है.

हालात ने नौ अप्रैल 2018 को और बुरा रूप ले लिया जब क्राइम ब्रांच के अधिकारी कठुआ के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में चार्जशीट दायर करने गए.

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इस दौरान वकीलों के एक समूह ने उपद्रव किया और अधिकारियों को चार्जशीट दायर करने से रोका था.

इसी को आधार बनाकर पीड़िता की वकील अब मामले की सुनवाई राज्य से बाहर कराने की अर्जी डालना चाहती है.

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लेकिन क्या केस का ट्रांसफ़र व्यावहारिक और तकनीकी तौर पर संभव है? क्या पीड़िता के परिवार राज्य के बाहर मामले की सुनवाई के लिए तारीख़ों पर बाहर आ-जा सकेगा?

इस पर दीपिका कहती हैं, "इस मामले में अब पूरा देश उनके साथ. इस बात की चिंता परिवार को करने की जरूरत नहीं है."

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दीपिका का आरोप है कि कठुआ रेप केस हाथ में लेने के बाद उन्हें धमकियां मिल रही है. उन्होंने नाम लेकर बार एसोशिएशन के अध्यक्ष पर आरोप लगाया कि कोर्ट की सीढ़ियों पर उन्हें धमकियां दी गई.

इसलिए उन्होंने अपने लिए सुरक्षा की मांग भी की है.

दीपिका जम्मू-कश्मीर बार की निष्कासित सदस्य हैं. 2013 में एक मामले में उनके ख़िलाफ़ ये कार्रवाई की गई थी.

मामले का दूसरा पक्ष

बार एसोशिएशन के अध्यक्ष भूपिंदर सिंह ने दीपिका के आरोपों को निराधार बताया है.

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उन्होंने बीबीसी को बताया कि वो तो ये जानते तक नहीं कि दीपिका कठुआ मामले में पीड़ित पक्ष का केस लड़ रही हैं. लेकिन उन्होंने कहा कि वो चाहते हैं पूरे मामले की सीबीआई जांच हो.

भूपिंदर का दावा है कि क्राइम ब्रांच ने पूरे मामले को हिंदू-मुस्लिम रंग देने की कोशिश की है.

वहीं, दीपिका का दावा है कि कठुआ मामले में क्राइम ब्रांच की जांच से पूरा परिवार संतुष्ट है. वो चाहती हैं कि क्राइम ब्रांच को ही मामले की जांच पूरी करने दी जाए. हालांकि दीपिका के मुताबिक परिवार सीबीआई जांच नहीं चाहता.

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इसके पीछे की वजह बताते हुए दीपिका कहती है, "अब सीबीआई इस मामले में क्या करेंगे? बच्ची के कपड़े तक धुल गए हैं. सभी सबूत मिट चुके हैं."

पूरे मामले में हिन्दू-मुस्लिम किए जाने को लेकर दीपिका आहत हैं. उनका मानना है कि जब कुछ नहीं मिलता तो लोग अपने सपोर्ट में इस तरह की बातें करते हैं.

वो कहती हैं, "मैं ख़ुद कश्मीरी पंडित हूं. मैं पैदा कश्मीर में हुई, लेकिन मेरी कर्मभूमि जम्मू है. मैं भी उसी हिंदू समाज से हूं, इसलिए मुझे कभी-कभी शर्म आती है."

ये मामला दीपिका के पास कैसे पहुंचा?

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दीपिका बताती हैं, "मैं बच्चों के अधिकार को लेकर काफी लंबे समय से काम कर रही हूं. इस केस को मैंने शुरुआत से फ़ॉलो किया. मेरी भी पांच साल की बेटी है. पीड़िता की कहानी इतनी दर्दनाक थी कि मैंने खुद उनसे सम्पर्क साधा."

उन्होंने बताया कि फ़रवरी के महीने में मैं परिवार से मिली और पूरे मामले में कोर्ट की निगरानी में क्राइम ब्रांच की जांच के आदेश कराने में हमें महत्वपूर्ण सफलता मिली.

इस मामले के बाद अब एक बार फिर बहस छिड़ी है कि नाबालिगों के साथ रेप के दोषी को फांसी हो?

केन्द्रीय महिला एंव बाल कल्याण मंत्रालय भी इसके पक्ष में है. दीपिका भी इसकी पक्षधर है. इस मामले में वो चाहती हैं कि दोषियों को फांसी की सजा हो.

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