BBC SPECIAL: 'हम बहुत डरे सहमे हैं, बच्ची का क्या हुआ होगा'

  • 15 अप्रैल 2018
बकरवाल, कठुआ रेप केस इमेज कॉपीरइट MAJID JAHANGIR/BBC

अब्दुल अज़ीज़ अपने परिवार को लेकर दो दिन पहले रसाना, कठुआ से दो सो किलोमीटर दूर चंदरकोट पहुंचे हैं और चिनाब नदी के किनारे कुछ ही क़दमों की दूरी पर सड़क से सटी एक पहाड़ी पर एक छोटा सा टेंट लगाकर बैठे हैं.

जब इनसे आठ वर्षीय पीड़ित बच्ची का ज़िक्र करते हैं तो सारा परिवार एक दूसरे के चेहरों को हैरानी से देखता है.

किसी भी अजनबी को देखकर परिवार के सभी लोग मुस्तैद हो जाते हैं.

शायद आठ वर्षीय बच्ची की घटना के बाद अब ये किसी पर भरोसा भी नहीं करना चाहते हैं. परिवार के सारे लोग टेंट के अंदर बैठे हुए हैं.

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मैं जब शुक्रवार को 300 किलोमीटर लम्बे श्रीनगर जम्मू राजमार्ग से आ रहा था तो क़ाज़ीगुंड से लेकर उधमपुर तक मुझे रस्ते में कई जगहों पर बकरवालों के काफ़िले अपने माल मवेशियों के साथ कश्मीर जाते हुए दिखे.

कई बकरवाल लोगों से मैंने बातें की और उनसे पीड़िता के पिता के बारे में जानकारी मांगी कि वह आजकल कहां ठहरे हुए हैं.

पिता का नाम पीड़िता के हवाले से लेते ही ये बकरवाल मेरे साथ बात करने में दिलचस्पी नहीं दिखते थे.

वह मुझे शक भरी निगाहों से देखते और नज़रअंदाज़ करते हुए आगे निकल जाते थे.

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क्या है पूरा मामला?

गौरतलब है कि 10 जनवरी 2018 को आठ वर्षीय बकरवाल बच्ची अपने मवेशियों को चराने जंगल की ओर गई थी और फिर वापस नहीं लौटी.

एक हफ़्ते की तलाश के बाद बच्ची की लाश कठुआ के रसाना इलाके में मिली. अभी तक इस मामले में आठ लोगों को गिरफ़्तार किया जा चुका है.

अब्दुल अज़ीज़ उस पूरी घटना को याद करते हुए कहते हैं, "हम सात दिन तक बच्ची को ढूँढ़ते रहे, लेकिन वह कहीं नहीं मिली. पुलिस वाले भी ढूंढ रहे थे, लेकिन वो जंगलों में ढूंढ रहे थे. वो हमें डराते भी थे और कहते थे कि ये बकरवालों का काम है. हमारी तो बेटी गुम हो गई थी, लेकिन वो बोलते थे ये तुम्हारा ही काम है."

"आख़िरकार आठवें दिन के बाद उसकी लाश मिली और एक आदमी वहां मौजूद एक बकरवाल को कह रहा था कि ये लाश उधर छोड़ दे, ये बकरवाल लोग हैं ये जंगली हैं इनको क्या पता. ये क़ानून वगैरह नहीं जानते, और ये मिट्टी में दबा दो तो बस बात खत्म. उस समय हम परेशान नहीं थे, लेकिन फिर उन लोगों ने हमें परेशान कर दिया."

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"हम खौफ़ में हैं"

तब से लेकर आजतक आलम ये है कि हम आज के दिन वही रहते लेकिन खौफ़ की वजह से हम पहले ही चले आए.

उन्होंने कहा, "आज के दिन हम उसी इलाके में रहते थे. इन दिनों हम अपने माल यानी भेड़ बकरियों को तैयार करते, दुआ करते और फिर मश्विरा करते, तब पंद्रह दिन के बाद हम यहां से निकलते थे. वो लोग कहते थे कि ये तुम्हारा काम है, बकरवालों का काम है. हमारे लोगों को फंसा दिया गया और कहते हैं आपको नहीं छोड़ेंगे."

"इसलिए डर लगता था कि जब बच्ची के साथ इतना बुरा हुआ तो हम बड़े हैं कौन हमारा लिहाज़ करेगा. फिर हम खौफ़ से भाग कर आ गए. हमारे पैगम्बरों से लेकर आज तक ऐसा नहीं हुआ. आज तक किसी आठ साल की बच्ची के साथ ऐसा किसी ने नहीं किया... डर तो लगता है."

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अब्दुल अज़ीज़ की 75 वर्ष की पत्नी वेब जान कहती हैं कि बच्ची की घटना के बाद दस दिनों तक हमने खाना भी नहीं खाया.

उन्होंने कहा, "मेरे बेटे और बेटी दोनों बच्ची के घरवालों के साथ ढूंढ़ने निकले. मैं खुद प्रदर्शनों में निकली. हमें बड़ा डराया धमकाया. हमारे ख़िलाफ़ जुलूस निकाले गए. हमें कहा गया की तुम्हारा यहां सब कुछ जलाया जाएगा. दस दिन हमनें रोटी नहीं खाई, पानी नहीं पिया. माल मवेशियों का पानी बंद किया. हमारे खाने का पानी बंद किया. हमें बहुत डराया गया. यहां भी डर लग रहा है."

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"अब हम बच्चों को दूर नहीं जाने देते"

पंद्रह वर्षीय शहनाज़ पीड़िता को अच्छी तरह जानती हैं. शहनाज़ कहती हैं कि वह उनके डेरे के पास ही रहती थीं और अक्सर घोड़ा लेकर उनके पास आती थीं.

लियाकत ख़ान कहते हैं कि जब बच्ची की लाश देखी तो हम रात को डरते थे, उसका बुरा हाल किया गया था.

लियाक़त की बच्ची शहनाज़ जब ऊपर पहाड़ी की तरफ चरवाहों को देखने निकलीं तो पीछे से घरवालों ने उन्हें पुकारा और कहा कि ज्यादा दूर मत जाना.

अब्दुल अज़ीज़ ने मुझसे कहा कि अब तो हम बच्चों को अपने से दूर जाने नहीं देते हैं, क्या भरोसा.

बकरवाल समुदाय हर साल छह महीने जम्मू और छह महीने कश्मीर में अपने माल मवेशियों के साथ रहते हैं. पीड़िता भी बकरवाल समुदाय से थीं.

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पुलिस रिपोर्ट के मुताबिक बच्ची को सात दिन तक इलाके के एक मंदिर में बंधक बनाया गया था और एक हफ़्ते तक बच्ची के साथ सामूहिक बलात्कार होता रहा. इस दौरान, पुलिस चार्जशीट के मुताबिक़, उसे नशीली दवायें दी गयीं.

शुक्रवार को बीजेपी के दो मंत्रियों ने इस मामले में पार्टी को इस्तीफा सौंपा है. दोनों ही मंत्री चौधरी लाल सिंह और चन्दर प्रकाश गुप्ता ने कठुआ रेप मामले में आरोपियों का समर्थन किया था.

इस मामले में हिन्दू एकता मंच और जम्मू बार एसोसिएशन ने और बीजेपी के कुछ लोगों ने सीबीआई जाँच की मांग थी.

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कठुआ गैंगरेप केस: आख़िर क्या कहते हैं गांव के लोग?

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