सीरिया हमला: ऐसे बढ़ेंगी मोदी सरकार की मुश्किलें

  • 14 अप्रैल 2018
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  • सीरिया पर अमरीका के हमले से भारत को दोहरी मार झेलनी पड़ सकती है क्योंकि भारत में पहले से ही तेल के दाम लगातार बढ़ रहे हैं.
  • देश में कई राज्यों में चुनाव होने जा रहे हैं. साथ ही अगले साल आम चुनावों की तैयारी में लगी सरकार को इसका ख़ामियाजा भुगतना पड़ सकता है.
  • भारत में पिछले एक महीने से पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों में उछाल देखने को मिल रहा था.
  • इंटरनेशनल ऑइल एजेंसी (आईईए) ने भी एक बयान में कहा है कि तेल की सप्लाई में कमी आने से बाज़ार में इसकी कीमत बढ़ेंगी.

तेल जगत में पिछले दस दिनों से आशंका बनी हुई थी कि अमरीका कभी भी सीरिया पर कार्रवाई कर सकता है. इस कारण कच्चे तेल की कीमतों में उछाल देखने को मिल रहा था.

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इस संबंध में अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के ट्वीट्स आते ही उनका सीधा असर तेल की कीमतों पर पड़ रहा था. अब सीरिया पर सैन्य कार्रवाई हो चुकी है तो बाज़ार में तेल का दाम भी ऊपर चला गया है. इसमें प्रति बैरल पांच डॉलर की बढ़ोतरी हुई है.

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भारत की नरेंद्र मोदी सरकार इस संबंध में भाग्यशाली रही कि उसके सत्ता संभालने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की क़ीमतें बहुत कम थीं और 2015 में एक समय तो वह 40 डॉलर प्रति बैरल से भी नीचे चली गईं.

इसके बाद लंबे समय तक कच्चे तेल के दाम स्थिर रहे और इससे केंद्र सरकार को अपना राजकोषीय घाटा पाटने और महंगाई पर क़ाबू करने में ख़ासी मदद मिली.

अब मध्य पूर्व में नई राजनीतिक स्थितियों से तेल के दाम बढ़ेंगे तो कई मोर्चों पर पहले ही चुनौतियों का सामना कर रही भारत सरकार के लिए यह सुखद स्थिति नहीं होगी. ख़ास तौर पर इस साल होने वाले विधानसभा और अगले साल होने वाले लोकसभा चुनावों के मद्देनज़र.

सीरिया पर अमरीका और पश्चिमी देशों के ये हमले भारत में तेल की क़ीमतों को किस तरह प्रभावित कर सकते हैं, इस पर और ज़्यादा जानकारी के लिए बीबीसी संवाददाता विभुराज ने बात की एनर्जी एक्सपर्ट और भारतीय जनता पार्टी से जुड़े नरेंद्र तनेजा से.

सीरिया पर निर्भर करेंगी क़ीमतें

सऊदी अरब, इराक, ईरान, ओमान और यूएई में जो होता है, उसका भूराजनीतिक असर होता है. मध्यपूर्व के घटनाक्रम का तेल की कीमतों पर भी प्रभाव पड़ता है.

इराक़ और क़तर में अमरीका की तेल से जुड़ी परिसंपत्तियां हैं. देखना होगा कि सीरिया वहां हमला करता है या नहीं.

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सीरिया की जवाबी कार्रवाई पर और रूस के अगले क़दम पर निर्भर करेगा कि तेल की क़ीमतें आगे कहां जाएंगी.

कितना तेल निर्यात करता है सीरिया?

मध्य पूर्व में सीरिया की एक तेल निर्यातक के रूप में ज़्यादा अहमियत नहीं है. सीरिया को तेल उत्पादन के लिए नहीं जाना जाता.

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ऐसे में भारत में भी सीरिया में निकाले जाने वाले तेल की कोई अहमियत नहीं है. मगर सीरिया की मध्य पूर्व में जो भौगोलिक स्थिति है, वह ज़रूर भारत के उपभोक्ता के लिए महत्व रखती है.

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सीरिया संकट के कारण आज तेल की कीमतें साढ़े 72 डॉलर प्रति बैरल पहुंच चुकी है.

चूंकि भारत अपनी ज़रूरत का 83 प्रतिशत तेल आयात करता है और उसमें भी दो-तिहाई मध्य पूर्व से आता है. यानी उस इलाक़े से, जहां सीरिया है. ऐसे में वहां होने वाली घटनाओं का असर तेल की कीमतों पर पड़ता है और उन तेल की कीमतों से भारत भी प्रभावित होता है.

सऊदी अरब को लाभ

'सऊदी अरामको' अरब की सबसे बड़ी तेल निर्यातक कंपनी है और यह शेयर बाज़ार में सूचीबद्ध होने का इरादा रखती है. जल्द ही इसका आईपीओ (इनीशियल पब्लिक ऑफर) आने वाला है. ऐसे में तेल की कीमत बढ़ने से इस कंपनी की भी वैल्यू बढ़ेगी और सऊदी अरब को लाभ होगा. इसलिए तेल की कीमतें बढ़ने का सऊदी अरब को लाभ होगा.

सीरिया में चल रहे युद्ध का जिन देशों को फ़ायदा हो रहा है, उनमें सऊदी अरब, रूस और अमरीका भी हैं. नाइजीरिया, वेनेज़ुएला, यूएई, ईरान, ओमान, इराक़ और अंगोला जैसे देशों को भी इससे फ़ायदा हो रहा है.

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भले ही सीरिया के लोगों को इस युद्ध का नुक़सान उठाना पड़ रहा है, मगर रूस को भी इससे लाभ हो रहा है.

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रूस तेल के सबसे बड़े उत्पादकों में से एक है. वहां लगभग 10 बिलियन डॉलर तेल का उत्पादन होता है. लगभग इतना ही तेल उत्पादन सऊदी अरब में होता है.

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अब चूंकि तेल की कीमतें ऊपर गई हैं, ऐसे में इन दोनों देशों को कुछ ही घंटों में फ़ायदा मिलने लगा है.

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