जिग्नेश मेवाणी को राजस्थान पुलिस ने क्यों रोका?

  • 15 अप्रैल 2018
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गुजरात के विधायक जिग्नेश मेवाणी रविवार को राजस्थान के नागौर ज़िले के मेड़ता रोड कस्बे में आंबेडकर जयंती के समारोह को संबोधित करने जा रहे थे, लेकिन जयपुर पुलिस ने विमान से उतरते ही उन्हें हवाई अड्डे पर ही रोक लिया.

पुलिस की इस हरकत पर दलित संगठनों ने ऐतराज़ जताया है. दलित संगठनों का आरोप है कि दो अप्रैल के बंद के बाद से ही पुलिस दलित और आदिवासी कार्यकर्ताओं को परेशान कर रही है.

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Image caption जयपुर पुलिस का आदेश

जयपुर के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त हनुमान मीणा ने बीबीसी को बताया कि क़ानून व्यवस्था बिगड़ने के अंदेशे पर धारा 144 की शक्तियों का प्रयोग करते हुए जिग्नेश मेवाणी को किसी भी सार्वजनिक कार्यक्रम, धरना, रैली, प्रदर्शन में भाग लेने और भाषण देने से रोकने के लिए यह आदेश जारी किया गया है.

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Image caption नागौर पुलिस का आदेश

उधर, नागौर के पुलिस अधीक्षक पारिस देशमुख ने बीबीसी से कहा, ''हालात को देखते हुए मेवाणी के नागौर आगमन पर रोक लगाई गई है. उनके यहाँ आने से क़ानून व्यवस्था की समस्या हो सकती थी. क्योंकि पिछले बंद के दौरान कुछ घटनाएं हुई थीं. उनके पहले के रिकॉर्ड को देखते हुए यह कदम उठाया गया है.''.

जिग्नेश मेवाणी ने क्या कहा?

जब बीबीसी ने जिग्नेश मेवाणी से पूरे मामले को जानना चाहा तो उन्होंने बताया, "राजस्थान के नागौर ज़िले में आंबेडकर जयंती समारोह में मुझे बाबा साहेब के जीवन और कार्यों और हमारे संविधान के मूल्यों के ऊपर बात करनी थी. मूल रूप से इस पर बात करनी थी कि उनका दर्शन क्या है, किस प्रकार से उन्होंने संघर्ष किया और हमारा संविधान क्या कहता है. मुझे यह कहते हुए कि वहां धारा 144 लगाई गई है इसलिए पूरे दिन के लिए नागौर ज़िले में आने की अनुमति नहीं है. उनका कहना था कि मेरे भाषण से माहौल बिगड़ सकता है."

जिग्नेश ने सवाल किया, "मेरा ये कहना है कि बाबा साहेब आंबेडकर की जयंती के अवसर पर मैं संविधान के मूल्यों पर बात करूं तो माहौल बिगड़ता है, लेकिन मनु स्मृति को मानने वाले लोग दशकों से खुले आम त्रिशूल और तलवार दिखाते आ रहे हैं, लेकिन उससे माहौल नहीं बिगड़ता. फिर भी मैंने उस आदेश को मान लिया और नागौर नहीं जाने का फ़ैसला किया. आदेश लेकर पहुंची पुलिस ने भी कहा की नागौर छोड़कर आप कहीं भी जा सकते हैं. लेकिन जैसे ही गाड़ी बाहर निकली तो डीसीपी आए और उन्होंने हमारी गाड़ी रोक ली. उनके साथ 15-20 पुलिसकर्मी थे. उन्होंने कहा कि हम आपकी मूवमेंट को रोक रहे हैं. मैंने ऑर्डर मांगा तो उनके पास कोई ऑर्डर नहीं था."

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जिग्नेश ने कहा, "मैंने कहा कि मैं जनता का एक चुना हुआ प्रतिनिधि हूं, पेशे से वकील भी हूं. आप मुझे ऐसे नहीं रोक सकते हैं. तो डिटेंशन किसे हैं और गैरक़ानूनी डिटेंशन किसे कहते हैं मुझे पता है. मैंने ऑर्डर मांगा तो उनके पास कोई जवाब नहीं था. उन्होंने कहा कि ऊपर से ऑर्डर आया है. ढाई बजे तक गैरक़ानूनी तरीके से डिटेन करके रखा गया. फिर मुझे ऑर्डर दिया गया जिसमें लिखा है कि जयपुर में भी 15 से 30 अप्रैल तक किसी भी रैली, धरना, प्रदर्शन में न मैं शामिल हो सकता हूं न ही मैं भाषण दे सकता हूं. ये क्या रवैया है राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का?"

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'अभिव्यक्ति की आज़ादी पर प्रहार'

दलित अधिकार कार्यकर्ता भंवर मेघवंशी ने बीबीसी से कहा, ''ये अभिव्यक्ति के अधिकारों पर प्रहार है. पुलिस का यह बर्ताव मनमाना और संवैधानिक अधिकारों के ख़िलाफ़ है.''

दलित अधिकार कार्यकर्ताओं के मुताबिक मेवाणी को मीडिया से भी बात नहीं करने दी गई. विधायक मेवाणी को मेड़ता में दलित संगठनों ने अपने कार्यक्रम में बुलाया था.

पुलिस ने पहले इस कार्यक्रम के लिए अनुमति दे दी थी, लेकिन मेवाणी का नाम सामने आने के बाद इस कार्यक्रम को लेकर स्थानीय प्रशासन हरकत में आ गया. प्रशासन ने आयोजन समिति से बात की और मेवाणी को लेकर आपत्ति जताई.

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