राजनयिकों को लेकर भारत-पाकिस्तान फिर भिड़े

  • 15 अप्रैल 2018
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रविवार को भारत ने पाकिस्तान में अपने राजनयिकों को सिख श्रद्धालुओं से मिलने से रोकने पर कड़ी आपत्ति जताई है.

भारतीय राजनयिकों को पाकिस्तान के एक प्रसिद्ध गुरुद्वारे में नहीं जाने देने और वापस लौटने के लिए मजबूर करने पर विरोध जताया है.

हालाँकि पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने भारत के आरोपों को बेबुनियाद बताया है और कहा है कि विस्थापित ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड के अध्यक्ष ने भारतीय उच्चायुक्त को 14 अप्रैल को बैसाखी और गुरुद्धारा पंजा साहिब में खालसा जन्मदिन के कार्यक्रम में शामिल होने के लिए बाकायदा आमंत्रित किया था.

भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा है कि धार्मिक तीर्थस्थलों की यात्रा के लिए द्विपक्षीय समझौते के तहत लगभग 1,800 तीर्थयात्रियों का एक समूह 12 अप्रैल से पाकिस्तान की यात्रा पर गया.

शनिवार को बैसाखी के पर्व पर विस्थापित ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड (ईटीपीबी) के चेयरमैन के आमंत्रण पर भारतीय उच्चायुक्त इस जत्थे को शुभकामनाएं देने के लिए वहां गए थे, लेकिन उन्हें गुरुद्वारा पंजा साहिब नहीं जाने दिया गया और रास्ते से ही वापस लौटा दिया गया.

पाकिस्तान की राजधानी में अभी तक नहीं था कोई एयरपोर्ट!

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बदसलूकी का आरोप

विदेश मंत्रालय ने कहा, "राजनयिकों की टीम सिख यात्रियों से वाघा रेलवे स्टेशन पर 12 अप्रैल को पहुंचने के बाद भी नहीं मिल सकी."

पिछले महीने भारत और पाकिस्तान ने एक दूसरे के उच्चायोगों पर दख़ल देने के आरोप लगाए थे, उसके बाद यह इस तरह का पहला मामला है. दो हफ्ते पहले ही भारत और पाकिस्तान राजनयिकों के साथ व्यवहार से जुड़े मुद्दों का समाधान करने पर राजी हुए थे.

विदेश मंत्रालय ने इसे पाकिस्तान की अतार्किक राजनयिक अभद्रता क़रार देते हुए राजनयिक संबंधों पर वियना संधि का स्पष्ट उल्लंघन बताया है.

मंत्रालय ने जारी अपने प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि भारत ने पाकिस्तान से इस मामले में कड़ी आपत्ति दर्ज की है.

भारत का कहना है कि काउंसलर और प्रोटोकॉल से जुड़े दायित्वों का निर्वाह करने के लिए भारतीय दूतावास के अधिकारियों को यह छूट दी जाती है. इस छूट का उद्देश्य मेडिकल आपातकाल या ऐसी किसी और मुश्किल की स्थिति में एक-दूसरे की मदद करना है.

पाकिस्तान विदेश मंत्रालय ने भी भारत के ऐतराज़ का जवाब दिया है. मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा है कि भारत ने इस बारे में इस्लामाबाद स्थित विदेश मंत्रालय और नई दिल्ली में पाकिस्तान उच्चायुक्त में विरोध दर्ज कराया था और पाकिस्तान ने भारतीय अधिकारियों को दोनों जगह वस्तुस्थिति और तथ्यों की जानकारी दी.

पाकिस्तान ने कहा है कि प्रोटोकॉल से जुड़े मुद्दों को गलत तरीके से पेश किया गया है.

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