समुद्री लुटेरों की कैद में बीते वो 71 दिन..

  • 17 अप्रैल 2018
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आशा ही आशा को जन्म देती है...

ये शब्द उस कैप्टन के हैं जो 71 दिन सुमद्री लुटेरों के चुंगल से स्वदेश लौटा है.

ज़िंदगी और मौत के बीच जंग लड़ते हुए कैप्टन सुशील कुमार धीमान ने हिम्मत नहीं छोड़ी. वो अपने सहयोगियों अजय कुमार और पंकज कुमार का साहस बढ़ाते रहे और अपने साथियों को विश्वास दिलाया कि उनकी जीत होगी. और आख़िरकार उनका धैर्य और शौर्य काम आया.

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Image caption कैप्टन सुशील कुमार धीमान

डरावना अनुभव

71 दिन के उस डरावने पलों को याद कर बीबीसी हिंदी से बातचीत करते हुए, कैप्टन सुशील कुमार धीमान ने हसंते हुए कहा कि अगर आप को जीने की चाह हो तो आप हर जंग जीत सकते हैं.

कैप्टन धीमान बताते है कि समुद्री लुटेरों की अनुमति के बिना हम हिल भी नहीं सकते थे. लगातार AK-47 और K-2 की बंदूकों के साये के बीच में हमें सिर्फ दिन में एक बार मैगी की तरह खाना मिलता था. जिसे वो (इंडोमैन) नूडल्स कहते थे. इन इंडोमैन नूडल्स को हम नमक के साथ खाते थे. और हमें वो गड्ढों से निकला पानी देते थे जिसे हमें उबाल कर दिया जाता था.

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Image caption कैप्टन सुशील कुमार धीमान के घर पहुंचने पर उन्हें गले लगाते हुए घरवाले

हर दिन एक चैलंज था आपको उठने और बाशरूम जाने के लिए भी पूछना पड़ता था. क्योंकि वो 24 घंटों नशे में रहते हैं. इसलिए आप उनके खिलाफ कुछ भी करने की नहीं सोच सकते थे.

कैप्टन सुशील इस घटना के बारे में बताते है कि उनका शिप जब बेनियन से मोनावो की सुमद्री रास्ते में था. तब ये घटना घटी.

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अपहरण

दरअसल उनका जहाज नाइजीरिया के समुद्री तट से 130 कि.मी. से दूर था. लेकिन इन सुमद्री लुटेरों ने रात के अंधेरे में अचानक छोटी बोट के जरिए उस पर कब्जा कर लिया.

फिर उन्हें पहले एक जगह ले गए. फिर 4 दिन के बाद लगातार लोकेशन बदल दी जाती थी. ये सब इतना डरावना था कि हमें कुछ भी पता नहीं लग पा रहा था कि हम कहां है और कैसे हैं क्योंकि उन्होंने हमारे मोबाइल, लैपटॉप सब छीन लिए थे.

हर वक़्त मौत का ख़ौफ़ और धमकियों के बीच हमने हिम्मत नहीं हारी.

हर दम बंदूक की नोक के साये में और 24 घंटे में सिर्फ एक वक्त का खाना, लेकिन फिर भी कैप्टन के जीतने की चाह कम नहीं हुई और आखिरकार 71 दिन के बाद नया सवेरा हुआ और कैप्टन सुशील कुमार धीमान अपने साथियों के साथ नाइजीरिया में सुमद्री लुटेरों के चुंगल से सकुशल वतन वापस लौटे.

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परिवार में ख़ुशी

सही सलामत देश वापसी पर कैप्टन सुशील कुमार धीमान और उनके साथियों का परिवार बेहद खुश है.

कैप्टन सुशील कुमार धीमान के पिता रघुवीर धीमान ने कहा कि भगवान ने उनकी फरियाद सुनी है. वो केंद्र और हिमाचल सरकार के शुक्रगुजार हैं. सरकार ने उनकी हर संभव मदद की.

ये घटना 31 जनवरी 2018 की है. मर्चेंट नेवी में कार्यरत इन तीनों युवकों का अपहरण करने के बाद इनकी रिहाई के बदले सुमद्री लुटरों ने करीब 11 मिलियन नायरा यानी नाइजीरियन करंसी की फिरौती की मांग की.

ये पूरा मामला सामने आने के बाद भारत सरकार हरकत में आई और विदेश मंत्रालय ने मामले की गंभीरता को समझते हुए अपनी कूटनीति के तहत तीनों युवकों की सकुशल वतन वापसी सुनिश्चित की.

भले ही इन तीनों युवकों की 71 दिनों के बाद सुरक्षित घर वापसी हुई , लेकिन समुद्री सीमाओं की भारी सुरक्षा के बीच ऐसी घटनाएँ हमेशा एक बड़ा सवाल उठाती रहेंगी.

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