आंखों देखी: लेडीज़ पार्लर में क्या-क्या होता है?

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यहां पूरा कमरा औरतों से भरा है. बाल खोले औरतें, आराम कुर्सी पर पैर फैलाए औरतें और फ़ोन पर बात करती औरतें.

किसी के बाल रंगे जा रहे हैं, किसी के नाखून रंगे जा रहे हैं और किसी की उघड़ी पीठ पर ब्लीचिंग क्रीम लगाई जा रही है.

'अरे मैम, आइए, आइए. बड़े टाइम बाद आए आप. आपकी आइब्रोज़ कितनी बढ़ गई हैं! बहुत दर्द होगा, मुझ पर गुस्सा मत होना.'

'दीदी...देखो ना, आपका माथे पर कितने बाल हैं. फ़ोरहेड पर थ्रेडिंग क्यों नहीं कराते?"

'ये पर्ल वाला फ़ेशियल ट्राई करो, टैनिंग एकदम ग़ायब हो जाएगी.'

'अरे, आपको पता है? अंडरवायर ब्रा से ब्रैस्ट कैंसर हो जाता है. मैंने तो पहनना ही छोड़ दिया.'

'मोदी ने तो बहुत बेकार कर दिया नोटबंदी करके. एटीएम में पैसे ही नहीं आते.'

'आपने जो हेयरस्टाइल बनाया था, पार्टी में सबने उसकी तारीफ़ की. थैंक यू दी!'

ये दृश्य और बातचीत किसी भी मोहल्ले के ब्यूटीपार्लर की हो सकती है.

पार्लर से नफ़रत भी, प्यार भी

ब्यूटीपार्लर. यानी वो जगह जिससे औरतें प्यार और नफ़रत दोनों करती हैं. यानी महिलाएं और ब्यूटीपार्लर 'लव-हेट रिलेशनशिप' में होते हैं.

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वैक्सिंग और थ्रेडिंग कराने में जो दर्द होता है वो उस वक़्त छू-मंतर हो जाता है जब वो ख़ुद को आईने में देखती हैं.

लगातार एक ही पार्लर में जाने पर वहां 'पार्लर वाली दीदियों' और लड़कियों में अपनेपन का एक रिश्ता सा बन जाता है.

ब्यूटी पार्लर अपने-आप बड़ी दिलचस्प और विरोधाभासी जगह है.

ये जगह महिलावादी भी लगती है और महिला विरोधी भी.

यहां जाते वक़्त अक्सर लड़कियों के अंदर का फ़ेमिनिज़्म जाग जाता है. मुझे ये सब क्यों करना है? मैं क्यों वैक्सिंग कराऊं? क्यों लोग लड़कियों को बढ़ी भौहों में नहीं देख सकती? वगैरह-वगैरह.

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फिर वो पार्लर में जाती हैं और वहां खनखनाती आवाज़ों में ये सारा गुस्सा जैसे ग़ुम होने लगता है.

आज़ादी और बेपरवाही

यहां का माहौल देखकर लगता है कि क्या औरतें हर जगह इतनी बेफ़िक्र, इतनी आज़ाद नहीं हो सकतीं जितना पार्लर के इस कमरे में?

'बोए जाते हैं बेटे और उग आती हैं बेटियां'

40-50 साल की वो महिला भी यहां नूडल स्ट्रैप वाले गाउन में फ़ेशियल और पेडिक्योर कराती नज़र आती है जो बाहर जाते ही ब्रा का स्ट्रैप दिखते ही उस पर बिजली की रफ़्तार से पल्लू डाल देती है.

यहां लड़कियों को ये चिंता नहीं सताती कि उनकी 'मोटी' बाजुएं उघड़ी हुई हैं या गाउन में उनका पेट नज़र आ रहा है.

ओह माय गॉड! पार्लर वाली दीदी का कॉम्प्लिमेंट!

किसी लड़की से पूछिए, किसका कॉम्प्लिमेंट उसके लिए सबसे ज़्यादा मायने रखता है. पति का? बॉयफ़्रेंड का? दोस्तों का? जी नहीं. पार्लर वाली दीदी का.

वैसे तो पार्लर वाली दीदी आपको अक्सर ये बताएगी कि आपके चेहरा कितना डल है और आपके बाल कितने खराब हैं लेकिन आपका दिन अच्छा है और आप लकी हैं तो वो आपकी तारीफ़ करने से भी नहीं चूकेंगी.

पार्लर वाली दीदी की तारीफ़ पाकर लड़कियां ख़ुशी से खिल उठती हैं. दुल्हन बनने जा रही लड़कियों की तो पक्की दोस्ती हो जाती है पार्लर वाली दीदी से. महीनों पहले से फ़ेशियल, क्लीन अप, ब्लीच जैसी अनगिनत चीजें शुरू हो जाती हैं.

वो अनकही बातें, जो लड़कियां कह नहीं पातीं...

'दीदी, मैं ना बेस्ट दिखना चाहती हूं. अनुष्का शर्मा वाला लंहगा ऑर्डर किया है. आपको डेट याद है ना? पूरे दिन मेरे घर रहना है आपको, धोखा मत देना.'

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ब्यूटी पार्लर में बॉडी शेमिंग खूब होती है. लेकिन बॉडी शेमिंग के साथ ही एक-दूसरे की तारीफ़ें भी होती हैं.

आपकी स्किन ऑइली नहीं है, आपके बाल कितने स्ट्रेट हैं और आपके अंडरआर्म्स में तो बहुत कम बाल हैं, ऐसे कॉम्प्लिमेंट्स एक-दूसरे को बेहिचक होकर दिए जाते हैं.

'मैम, हम कोई हिरोइन थोड़े न हैं जो हमारी फ़्लैट टमी होगी. और वो लोग भी टीवी में जैसे दिखते हैं, असली में वैसे नहीं होते. उनका काम ही है फ़िगर मेन्टेन रखना, हमारे पास तो हज़ारों काम हैं...'

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एक दूसरे के लिए इस तरह के दिलासे, इस तरह का सपोर्ट पार्लरों में हमेशा मौज़ूद रहता है.

प्यार और सेक्स की बातें

इसके अलावा होती हैं, घर-परिवार, कॉलेज और ऑफ़िस की बातें. प्यार और सेक्स की तो बहुत बातें होती हैं. मर्दों की चुगली होती है, और मज़ाक उड़ता है और तारीफ़ भी होती. जैसे:

•चैट करते हुए लंबे-लंबे रिप्लाई मत लिखा कर. इन्हें लगता है कि लड़की सेट हो गई.

•लड़कों को जितना इग्नोर मारो, उतना पीछे आते हैं.

•जो भी हो, लड़के हेल्प तो कर देते हैं. मेरे ऑफ़िस वाला गौरव, कभी किसी काम के लिए ना नहीं कहता.

•यार ये मर्द जात ही ना धोखेबाज है. मजबूरी है, इनके साथ रहना पड़ता है वर्ना तो मैं घास भी न डालूं.

'बहनचारा'

उन लड़कियों को नसीहतें और टिप्स मिलती हैं जो किसी दूसरी जाति या मजहब के लड़के से प्यार करती हैं.

क्या लड़कियां लड़कों को स्टॉक करती हैं?

कॉलेज जाने वाली एक लड़की ने जब बताया कि उसे एक क्रिश्चियन लड़के से प्यार है तो पार्लर में मौज़ूद महिलाएं दो गुटों में बंट गईं.

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एक वो जिनका मानना था कि प्यार करने वाला बड़ी मुश्किल से मिलता है और दूसरी वो जिनकी सलाह थी कि मां-बाप को दुख देकर कोई काम करना अच्छा नहीं होता.

इसी तरह एक महिला ने बड़ी बेबाकी से सबको बताया कि शादी की रात उन्होंने आगे बढ़कर पति को गले लगाया और फिर 'सबकुछ' ठीक से हो गया.

एक लड़की ने फ़ोन पर बात करते हुए कहा किसी से कहा कि वो ठाकुर जी को भोग नहीं लगा पाई है क्योंकि उसके पीरियड्स हो रहे हैं.

दूसरी लड़की ने समझाने की क़ोशिश की कि पीरियड्स में पूजा करने में कुछ भी ग़लत नहीं है. उसकी बात पूरी होती, इससे पहले वो बोल उठी, "अरे, मैं ब्राह्मण हूं ना...इसलिए."

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