प्रेस रिव्यू: क्या दो हज़ार के नोट की जमाख़ोरी से हुआ है कैश संकट?

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Image caption नवंबर 2016 में पांच सौ और एक हज़ार रुपये के नोट बंद कर दो हज़ार रुपये का नोट शुरू किया गया था.

भारत के कई राज्यों में चल रहे कैश संकट को अंग्रेज़ी अख़बार द टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने अपनी एक रिपोर्ट में दो हज़ार के नोटों की जमाख़ोरी से जोड़ा है.

अख़बार ने कई बैंक अधिकारियों का हवाला देकर कहा है कि दो हज़ार के अधिकतर नोट बैंकों से निकाले जाने के बाद वापस बैंकिंग व्यवस्था में नहीं लौट रहे हैं जिससे इन नोटों के कालेधन में पहुंचने का शक़ ज़ाहिर किया जा रहा है.

अख़बार ने लिखा है कि कयास ये भी लगाया जा रहा है कि राजनीतिक दल और कार्यकर्ता कर्नाटक चुनावों से पहले दो हज़ार के नोट जमा कर रहे हैं.

मोदी की ख़ामोशी पर सवाल

अंग्रेज़ी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस को दिए एक साक्षात्कार में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उस सलाह का स्वयं पालन करना चाहिए जो उन्होंने उन्हें दी थी.

उन्नाव और कठुआ गैंगरेप मामले पर प्रधानमंत्री मोदी की लंबी ख़ामोशी पर निशाना साधते हुए मनमोहन सिंह ने कहा कि मोदी को मुझे दी गई अपनी सलाह का पालन करना चाहिए और मुंह खोलना चाहिए.

मनमोहन सिंह ने कहा कि उन्हें ख़ुशी है कि अंततः शुक्रवार को प्रधानमंत्री ने अपनी ख़ामोशी तोड़ी और कहा कि भारत की बेटियों को न्याय मिलेगा और दोषियों को बख़्शा नहीं जाएगा.

मनमोहन सिंह ने कहा कि इन दोनों मामलों में मोदी के बोलने में हुई देरी से अपराधियों को लगा है कि वो बच जाएंगे और उनके ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई नहीं होगी.

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चुनाव साथ कराने की सिफ़ारिश

लॉ कमीशन (विधि आयोग) ने लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं के लिए चुनाव एक साथ कराए जाने का समर्थन करते हुए इस मुद्दे पर सभी पक्षों की राय मांगी हैं.

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक विधिक आयोग ने ये क़दम राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ-साथ चुनाव कराने के आह्वान के दो महीने बाद उठाया है.

विधि आयोग ने इस आशय से श्वेत पत्र केंद्रीय क़ानून मंत्रालय को भेजा है जिसमें कहा गया है कि संविधान में संशोधन कराकर देश में फिर से एक साथ चुनाव कराए जा सकते हैं.

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कहां है टीपू की तलवार?

मैसूर के शेर कहे जाने वाले टीपू सुल्तान की तलवार ग़ायब हो गई है और विजय माल्या के अलावा किसी को नहीं पता है कि ये तलवार कहां हैं.

द टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि विवादों में फंसे शराब कारोबारी विजय माल्या ने साल 2016 में इस दुर्लभ तलवार से किनारा कर लिया था.

माल्या के परिजनों का कहना था कि ये तलवार माल्या के लिए दुर्भाग्य लेकर आई है.

ये बात लंदन हाई कोर्ट में माल्या को क़र्ज़ देने वाली तेरह बैंकों के समूह के वकील ने कही है.

टीपू सुल्तान की इस तलवार की क़ीमत क़रीब पौने दो करोड़ रुपये है.

वहीं, बेंगलुरु में माल्या के एक पूर्व सहकर्मी ने अख़बार को बताया है कि माल्या ने इस तलवार को एक म्यूज़िम को देने की पेशकश की थी लेकिन इसे म्यूज़ियम ने स्वीकार नहीं किया था. अभी ये स्पष्ट नहीं है कि बाद में माल्या ने इस तलवार का क्या किया.

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