नरोदा पाटिया मामला: हाई कोर्ट से बरी हुईं माया कोडनानी

माया कोडनानी, बाबू बजरंगी इमेज कॉपीरइट AFP

गुजरात हाई कोर्ट ने नरोदा पाटिया मामले में राज्य की बीजेपी सरकार में मंत्री रहीं माया कोडनानी को बरी कर दिया है.

अदालत ने कहा कि पुलिस ने कोई ऐसा गवाह पेश नहीं किया जिसने माया कोडनानी को कार से बाहर निकलकर भीड़ को उकसाते देखा हो.

अदालत के मुताबिक़ जिन 11 लोगों ने बयान दिए, उन पर विश्वास नहीं किया जा सकता. माया के पीए किरपाल सिंह छाबड़ा को भी बरी कर दिया गया है.

माया कोडनानी के ख़िलाफ़ देर से कार्रवाई शुरू करना भी उनके बरी होने की एक वजह बताया गया. उनका नाम सिर्फ़ तब सामने आया जब एसआईटी ने मामले की जांच शुरू की.

बजरंग दल के नेता रहे बाबू बजरंगी को अदालत से थोड़ी राहत मिली. उनकी सज़ा उम्रक़ैद से घटाकर 21 साल कर दी गई है.

बाबू बजरंगी को उम्रक़ैद अगस्त 2012 में हुई थी जब एसआईटी मामलों के लिए बनाई गई एक विशेष अदालत ने बाबू और माया समेत 32 लोगों को इस मामले में दोषी ठहाराया.

मामले के कुल 62 अभियुक्तों में से 29 को उस वक़्त अदालत ने सबूतों के अभाव में बरी कर दिया था.

बरी किए जाने के इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ एसआईटी ने हाई कोर्ट में याचिका डाली. वहीं सज़ा पाए लोग राहत पाने के लिए हाई कोर्ट गए थे.

इमेज कॉपीरइट Getty Images

क्या है मामला?

अहमदाबाद के नरोदा पाटिया इलाके में दंगों के दौरान मुस्लिम समुदाय के 97 लोगों की मौत हो गई थी. हिंसा में 33 लोग घायल भी हुए थे.

फ़रवरी 2002 में गुजरात के गोधरा में ट्रेन जलाए जाने के बाद भड़के दंगों में नरोदा पाटिया में हुई हिंसा सबसे जघन्य घटनाक्रमों में से एक है.

सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट के जजों ने नरोदा पाटिया इलाक़े का दौरा भी किया था.

इमेज कॉपीरइट AFP/GETTY IMAGES

कौन हैं माया कोडनानी?

पहले से ज़मानत पर जेल से बाहर रहने वाली माया कोडनानी गुजरात सरकार में मंत्री थी.

जब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे तब माया उनकी क़रीबी मानी जाती थीं.

माया का परिवार देश के बंटवारे से पहले पाकिस्तान के सिंध में रहता था.

विभाजन के बाद उनका परिवार गुजरात आकर बस गया. पेशे से माया कोडनानी डॉक्टर थी. वे आरआरएस से भी जुड़ी हुई थीं.

नरोदा में उनका अपना अस्पताल था. बाद में वो स्थानीय राजनीति में सक्रिय हो गईं.

अपनी वाकपटुता की वजह से वे भारतीय जनता पार्टी में काफ़ी लोकप्रिय हो गईं और साल 1998 में वो नरोदा से विधायक बन गईं.

साल 2002 के बाद वो 2007 में भी विधायक चुनी गईं और मंत्री भी बनीं.

2009 में सुप्रीम कोर्ट की विशेष टीम ने उन्हें पूछताछ के लिए समन किया.

बाद में माया को गिरफ़्तार किया गया और उन्हें अपने पद से इस्तीफ़ा देना पड़ा. लेकिन जल्द ही वे ज़मानत पर रिहा हो गईं. इस दौरान वे विधानसभा जाती रहीं और उन पर मुक़दमा भी चलता रहा.

ये भी पढ़ें:

कौन हैं माया कोडनानी, जिन्हें बचाने अमित शाह कोर्ट पहुंच गए

क्या मोदी ने दी कोडनानी, बजरंगी की कुरबानी?

माया कोडनानी को सशर्त ज़मानत

नरोदा पाटिया: कोडनानी को 28, बाकी को उम्रकैद की सजा

नरोदा पाटिया की शरीफ़ा बीबी को दूसरा ख़त

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)

मिलते-जुलते मुद्दे