पीएम नरेंद्र मोदी की सांसदों को नसीहत में क्या चिंता छिपी?

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को नमो एप के ज़रिए बीजेपी के सांसदों और विधायकों के साथ सीधा संवाद किया. लगभग एक घंटे के इस संवाद में प्रधानमंत्री मोदी ने अपने सांसदों और विधायकों को कई नसीहतें दीं.

प्रधानमंत्री ने कहा कि सांसद और विधायक मीडिया के सामने विवादास्पद बयान देने से बचें जिससे पार्टी की छवि ख़राब न हो.

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "मैं मानता हूं कि भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं में बहुत परिपक्वता आई है. लेकिन कभी-कभी हमारे कार्यकर्ता - 'मीडिया ऐसा करती है, वैसा करती' है- इस प्रकार की बातें ज़्यादा करते हैं. लेकिन क्या कभी हमने सोचा है कि हम ही कुछ ग़लतियां करके मीडिया को मसाला दे देते हैं. मीडिया का दोष नहीं है. हमें खुद पर संयम रखना चाहिए. जिसको बोलने की ज़िम्मेवारी है उसी को बोलना चाहिए. हर कोई बयानबाज़ी करता रहेगा तो देश, दल और व्यक्तिगत छवि का नुकसान होता है."

उन्होंने कहा, "आप मीडिया को दोष नहीं दें. हर चीज़ में उलझें नहीं. राष्ट्र का मार्गदर्शन करने के लिए टीवी के सामने खड़े न हो जाएं."

प्रधानमंत्री ने अपने विधायकों से मीडिया को मसाला ना देने की बात कही. दरअसल कुछ दिन पहले ही त्रिपुरा के नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री बिप्लब देब का ऐसा ही एक विवादास्पद बयान मीडिया की सुर्खियां बना था. उन्होंने कहा था कि इंटरनेट का अस्तित्व महाभारत काल से था.

आखिर प्रधानमंत्री के अपने सांसदों और विधायकों से मीडिया के सामने सतर्कता बरतने की बात कितनी महत्वपूर्ण है और उन्हें इसकी ज़रूरत क्यों पड़ी.

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पीएम की सलाह की वजह क्या

इसकी वजह बीजेपी प्रवक्ता गोपाल कृष्ण अग्रवाल कुछ यूं बताते हैं, "वो पहले भी कई बार कह चुके हैं. कई बार लोग आउट ऑफ़ टर्न तुरंत प्रतिक्रिया दे देते हैं. पार्टी ने जो ज़िम्मेदारी दी है, उसमें लगें. हालांकि तकनीक को जनता तक पहुंचने के लिए प्रधानमंत्री सोशल मीडिया के ज़रिए कार्यकर्ताओं के एक्टिव रहने को बढ़ावा देते हैं."

हाल में जम्मू-कश्मीर के कठुआ और उन्नाव में हुए कथित बलात्कार की घटनाओं के सामने आने के बाद प्रधानमंत्री मोदी की चुप्पी पर भी काफी वक्त तक सवाल उठते रहे.

अब उनका अपने विधायकों और सांसदों से यह कहना कि वे संवेदनशील मुद्दों पर संभलकर जबान खोलें.

आखिर इसके पीछे क्या राजनीति है विपक्षी दल कांग्रेस का इस पर क्या विचार है.

कांग्रेस प्रवक्ता संजय झा कहते हैं, "कठुआ और उन्नाव की घटनाओं पर भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के बयान यह बताते हैं कि इनकी विचारधारा क्या है. जो पार्टी नफ़रत और नकारात्मक राजनीति करती है वो कब तक ढोंग रचाएगी. इसीलिए मोदी जी चिंतित हैं क्योंकि भारत के लोगों ने भाजपा के चाल और चरित्र को देखा है. लोगों को लग रहा है कि भाजपा पाखंडी पार्टी है. मोदी जी कहते हैं कि बलात्कार के साथ राजनीति नहीं करें, लेकिन खुद उन्होंने निर्भया पर सियासी बयानबाज़ी की है."

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Image caption नमो एप

वो कहते हैं, "अब वो बोल रहे हैं कि सदस्य ज़्यादा न बोलें क्योंकि नेता बोलेंगे तो लोगों के सामने इनका भंडाफोड़ हो जाएगा, पार्टी का नज़रिया लोगों की समझ में आ जाएगा. उन्होंने यह स्वीकार किया है कि भाजपा की एक महिला विरोधी सोच है. इसके अलावा इस पार्टी में लोकतंत्र नहीं है. यशवंत सिन्हा ने भी कहा है कि लोग बोलने से डरते हैं. मोदी का यह बोलना कि न बोलें, अपने ही सदस्यों को डरा कर बैठाना चाहते हैं ताकि लोग बोलें नहीं. बलात्कार दुर्भाग्यपूर्ण और शर्मनाक सच्चाई है जिसे सभी दलों को मिल कर हटाना है, लेकिन राजनीतिक दल जिस पर आरोप लगे हैं वो उन्हें बचाने में लगी है. इससे ज़्यादा अफसोसजनक क्या हो सकता है."

क्या पीएम के सुझाव से होगा सुधार

सोशल मीडिया पर तमाम राजनीतिक दल अपने-अपने ट्रोल के साथ मौजूद रहते हैं, उनमें सत्ताधारी बीजेपी विपक्षी कांग्रेस और बाकी दूसरे दल भी शामिल हैं.

इन ट्रोल्स का शिकार वे लोग भी होते हैं जो उस राजनीतिक दल की विचारधारा से सहमत नहीं होते.

दलित चिंतक और वरिष्ठ पत्रकार दिलीप मंडल भी अक्सर सोशल मीडिया के ट्रोल्स का शिकार होते रहे हैं. प्रधानमंत्री के अपने सांसदों-विधायकों को दी गई नसीहत पर वे कहते हैं, "मास्टर के डांटने भर से उद्दंड बच्चे सुधर जाएंगे ऐसा मुझे नहीं लगता है. भाजपा, संघ के राजनीतिक प्रशिक्षण में ही दोष है. भाजपा नेताओं के बयान आए हैं उससे पार्टी की छवि को नुकसान हुआ है. ये बयान सांप्रदायिक कटुता को फ़ैलाने वाले हैं, दूसरा अवैज्ञानिक चिंतन को बढ़ावा देने वाले और तीसरा महिला विरोधी बयान भी लगातार भाजपा के खेमे से आ रहा है."

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Image caption संतोष गंगवार

हालांकि एक तरफ़ जहां प्रधानमंत्री मोदी अपने सांसदों-विधायकों से थोड़ा संभलकर बोलने की अपील कर रहे थे, वहीं दूसरी तरफ उनकी कैबिनेट के मंत्री संतोष गंगवार एक और विवादित बयान दे रहे थे. कठुआ गैंगरेप पर बोलते हुए गंगवार ने कहा कि 'हिंदुस्तान जैसे बड़े देश में लोगों को बलात्कार की एक या दो घटनाओं को इतना बड़ा मुद्दा नहीं बनाना चाहिए.'

उम्मीद है प्रधानमंत्री की नसीहत उनके सभी सांसद और विधायकों ने अपना ली होगी. अब यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा कि बीजेपी के नेता संवेदनशील मुद्दों पर किस तरह के बयान देते हैं या फिर पूरी तरह चुप्पी ही साध लेते हैं.

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