प्रेस रिव्यू: तंदूर और जेसिका कांड के दोषी हो सकते हैं रिहा!

  • 24 अप्रैल 2018
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हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक़ जेसिका लाल हत्याकांड के दोषी मनु शर्मा और तंदूर कांड में सजा काट रहे सुशील शर्मा को जेल से रिहाई मिल सकती है.

ख़बर के मुताबिक़ सेंटेन्स रिव्यू बोर्ड इन दोनों समेत लगभग 90 क़ैदियों की रिहाई के बारे में फ़ैसला करेगा. बोर्ड की मंगलवार को बैठक हो सकती है. इस बोर्ड में एक जज, एक शीर्ष पुलिस अधिकारी, दिल्ली के गृह मंत्री और चार अन्य सरकारी अधिकारी शामिल होंगे.

1999 में हुए जेसिका लाल हत्याकांड में दोषी करार दिए गए मनु शर्मा हरियाणा के पूर्व मंत्री विनोद शर्मा के बेटे हैं. वो 15 से अधिक जेल में गुज़ार चुके हैं. इसके अलावा यूथ कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष सुशील शर्मा भी 23 साल से जेल में हैं.

बोर्ड की बैठक में ऐसे क़ैदियों की रिहाई के मामले रखे जाते हैं जो 10 साल से अधिक की सज़ा काट रहे होते हैं या जिनकी उम्र अधिक हो जाती है. शर्त ये होती है कि जेल में सज़ा काटते वक्त क़ैदी का व्यवहार बहुत अच्छा होना चाहिए.

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अदालत में हत्या

द हिंदू के मुताबिक ओडिशा के संबलपुर ज़िले में सोमवार को एक फैमिली कोर्ट में एक व्यक्ति ने तलवार से एक महिला की हत्या कर दी. हमलावर का दावा है कि वो मृतक महिला उसकी पत्नी थी.

इस हमले में महिला की मां और उनकी भतीजी भी घायल हो गई. टाउन थाना पुलिस ने इस मामले में अभियुक्त रमेश को गिरफ्तार कर लिया है.

ख़बर के मुताबिक़ रमेश कुमार ऑटो रिक्शा चलाते हैं. वो तलवार लेकर कोर्ट पहुँचे. उनका एक महिला संगीता चौधरी से विवाद चल रहा था जिसकी सुनवाई कोर्ट में हो रही थी.

पुलिस के अनुसार, रमेश कुमार और संगीता चौधरी चार महीने तक साथ-साथ रहे और बाद में कुछ झगड़ा होने पर अपने-अपने घर लौट गए. बाद में संगीता की मां ने अपनी बेटी का विवाह कहीं और कर दिया. इसी बात को लेकर रमेश नाराज़ था.

यह मामला परिवार न्यायलय में पहुंचने पर अदालत ने दोनों पक्षों के बीच समझौता कराने के लिए सोमवार को बुलाया था. इसी दौरान रमेश तलवार लेकर अदालत पहुंचा और कथित पत्नी, उसकी मां और भतीजी पर हमला कर दिया. इससे अदालत परिसर में अफ़रातफ़री मच गई.

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अध्यादेश पर सवाल

हिंदुस्तान के मुताबिक दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा कि 12 साल से कम उम्र की लड़कियों से बलात्कार के जुर्म में दोषी को मौत की सजा का प्रावधान करने वाला अध्यादेश लाने से पहले क्या उसने वैज्ञानिक आकलन किया था?

हाईकोर्ट ने एक पुरानी जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह सवाल किया. जनहित याचिका में 2013 के आपराधिक क़ानून (संशोधन) को चुनौती दी गई है. आपराधिक क़ानून (संशोधन) में बलात्कार के दोषी को न्यूनतम सात साल जेल की सज़ा और इससे कम सज़ा देने के अदालत के विवेकाधिकार के प्रावधान ख़त्म कर दिए गए थे.

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