कोई बेटा माँ का और भाई बहन का रेप क्यों करता है?

  • 25 अप्रैल 2018
रेप, यौन हिंसा इमेज कॉपीरइट iStock

एक मां ने अपने ही बेटे पर रेप का आरोप लगाया है.

घटना गुजरात के पाटन की है. पाटन के पालनपुर की रहने वाली लीला (बदला हुआ नाम) ने अपने 22 साल के बेटे के खिलाफ थाने में बलात्कार का मामला दर्ज कराया है.

लीला के मुताबिक 19 अप्रैल की रात को वो घर के बाहर सो रही थीं. बीच रात में उठ कर जब वो पानी पीने घर के अंदर गईं तो लड़के ने दरवाजा बंद कर उनके साथ ज़बरदस्ती की.

लीला ने पुलिस को बताया कि उनके बेटे को पॉर्न देखने की लत थी. वो मां और बहन के सामने भी इस तरह की हरकत किया करता था.

सगे रिश्तों में रेप के मामले पहले भी सामने आते रहे हैं. भाई के बहन के साथ और पिता के बेटी के साथ रेप करने के मामले अक्सर ख़बरों में आते हैं.

पहली बार में तो यक़ीन भी करना मुश्किल होता है कि ऐसी भी घटना हो सकती है. इसी मुश्किल से ये सवाल भी उठता है कि आखिर सगे रिश्तों में भी ऐसे जघन्य अपराध क्यों होते हैं?

क्या ये मानसिक रोग है?

मनोवैज्ञानिक डॉ. अरुणा ब्रूटा कहती हैं, ''ऐसे अपराध करने वाला व्यक्ति सामान्य नहीं हो सकता. जरूर वो किसी मनोरोग से ग्रसित होता है, लेकिन घरवाले इसे स्वीकारते नहीं हैं. इसलिए इलाज नहीं होता और ये नौबत आ जाती है. वहीं, ऐसी घटनाएं घरों में पहले भी होती रही हैं, लेकिन ये शर्म के कारण बाहर नहीं आती हैं.''

मनोचिकित्सक डॉ. प्रवीण त्रिपाठी कहते हैं कि 'ऐसा व्यक्ति रिश्तों की मर्यादाओं को समझता ही नहीं है. इनकी मानसिकता स्वस्थ नहीं होती और दिमाग़ में विचार गड़बड़ाए होते हैं.'

कई बार ऐसी ख़बरों को पढ़ने वाले लोग गुस्से में कहते हैं कि बच्चे बिगड़ रहे हैं, लेकिन ऐसा नहीं है. डॉक्टर मानते हैं कि ऐसी घटनाओं में लिप्त लोगों को कोई न कोई दिमाग़ी बीमारी होती है.

डॉ. अरुणा ब्रूटा बताती हैं, ''दो तरह के मनोरोग होते हैं. एक बाइपोलर डिप्रेसिव डिसऑर्डर और दूसरा स्कित्ज़ोफ्रीनिया. बाइपोलर डिसऑर्डर का एक चरण होता है 'मेनिया', जिसमें किसी शख़्स की मानसिक स्थिति पागलपन की हद तक चली जाती है.''

''इन बीमारियों में व्यक्ति को मूड डिसऑर्डर होते हैं. बार-बार उसका स्वभाव बदलता है. उनकी सोच में उलझन रहती है. उन्हें दौरे पड़ते हैं और इस स्थिति में वो ऐसे अपराध तक कर जाते हैं.''

डॉ. ब्रूटा के मुताबिक ऐसे लोग कई बार समाज से भी कट जाते हैं. उन्हें सामान्य व्यवहार कैसा होता है और सामाजिक नियम कैसे काम करते हैं, ये समझ ही नहीं आता.

आखिर ये बीमारी पनपती कैसे है, इस सवाल पर डॉ. प्रवीण त्रिपाठी कहते हैं, ''किसी में ये बीमारी अपने आप भी पनप सकती है. लेकिन, ऐसे परिवारों में भी ये देखने को मिलती है जिनमें सामाजिक मेल मिलाप कम होता है. इससे बच्चे में भी समाज और रिश्तों के नियमों की समझ कम हो सकती है.''

आनुवांशिक (जेनेटिक) कारण

जानकार बताते हैं कि ऐसे मनोरोगों के पीछे आनुवांशिक कारण भी ज़िम्मेदार होते हैं. अरुणा ब्रूटा के मुताबिक अगर परिवार में माता-पिता, दादा-दादी, नाना-नानी या किसी अन्य नजदीकी रिश्ते में ये समस्या है तो आने वाली पीढ़ी में भी हो सकती है.

अपने बेटे की बढ़ती सेक्शुअल ऐक्टिविटी को लेकर इलाज कराने आई एक महिला ने डॉ. ब्रूटा को बताया था कि जब वो शादी होकर आई थीं तो बच्चे के दादा ने उनके साथ छेड़छाड़ करने की कोशिश की थी.

डॉ. ब्रूटा का कहना है कि 'बच्चे के दादा भी किसी न किसी मनोरोग से ग्रसित रहे होंगे. लेकिन, लोग समझ लेते हैं कि इस शख़्स की नज़र बुरी है. इससे बचकर रहना है, लेकिन इसका इलाज कराने की ज़रूरत है ये उनके दिमाग़ में ही नहीं आता. फिर धीरे-धीरे मानसिक स्थिति ख़राब होती जाती है और एक दिन बड़ा अपराध हो जाता है.'

पॉर्न एडिक्शन कितनी ज़िम्मेदार

गुजरात में मां के रेप के मामले में बेटे को पॉर्न देखने की आदत थी. आजकल मोबाइल, टीवी के ज़रिए इन चीज़ों तक पहुंच भी आसान हो गई है.

पॉर्न देखने की आदत की ऐसे अपराधों में क्या भूमिका होती है? क्या ये आदत व्यक्ति को अपराध की तरफ़ ले जाती है?

इस पर सेक्सोलॉजिस्ट डॉ. प्रकाश कोठारी कहते हैं, ''लगातार पॉर्न देखना और सेक्शुअल गेम खेलना व्यक्ति की उत्तेजना बढ़ा देते हैं. उनमें सेक्शुअल फ़्रस्ट्रेशन भर जाती है. ये पूरी तरह तो अपराधों के लिए ज़िम्मेदार नहीं होते, लेकिन आपराधिक भावना को बढ़ावा ज़रूर देते हैं. इनसे गुमराह करने वाली जानकारियां ही मिलती हैं.''

डॉ. ब्रूटा बताती हैं कि उनके पास लड़के और लड़कियों दोनों के ऐसे मामले सामने आते हैं जिन्हें पॉर्न देखने की लत होती है. जब कोई लगातार इन चीज़ों में लिप्त रहता है तो उसकी मानसिक स्थिति और बिगड़ जाती है. आपा खोने पर वह उन चीजों को हक़ीक़त में उतारना चाहता है.

15-16 साल की एक लड़की के बारे में उन्होंने बताया कि उसे पॉर्न देखने की लत थी और उसने एक दिन अपनी सेमी न्यूड फोटो सोशल मीडिया पर डाल दी थी.

डॉ. ब्रूटा के मुताबिक कई चीजों का मिलाजुला असर होता है जो बीमारी को बढ़ावा देता है.

क्या हो समाधान

इस बारे में डॉ. प्रवीण त्रिपाठी कहते हैं कि इन मामलों में व्यक्ति के व्यवहार पर नजर रखने की जरूरत है. अगर कोई एक बार छेड़छाड़ की हरकत करते हुए पकड़ा जाता है तो उस पर गंभीरता से सोचना चाहिए. हो सकता है कि वो डर कर कुछ समय रुक जाये लेकिन उसके दोबारा ऐसा करने की पूरी संभावना होती है.

अरुणा ब्रूटा बताती हैं कि ये समस्या एकदम से नहीं पनपती हैं. ये लक्षण पहले से देखे जा सकते हैं. जैसे उनके पास एक 15 साल के बच्चे का मामला आया था.

उस बच्चे ने अपनी मां से कपड़े उतराने के लिए कहा था क्योंकि वो देखना चाहता था कि औरत का शरीर कैसा लगता है. उसकी मां बच्चे से ये बात सुनकर बहुत हैरत में थी.

डॉ. अरुणा ब्रूटा ने बताया, ''खून के रिश्तों के बीच हो रहे व्यवहार पर भी ध्यान देना चाहिए. जैसे भाई-बहन का लड़ना एक सामान्य बात है लेकिन अगर ये बहुत ज्यादा होता है तो ध्यान देना जरूरी है. छोटी-छोटी बातें जैसे कोई किसी को किस नजर से देख रहा है. उससे कैसी नजदीकी है. क्या बड़ों की बातों में ज्यादा रूची है, ये सब भी मायने रखता है.''

''अगर आपको कुछ भी ऐसा लगता है तो उस शख्स से बात करें और डॉक्टर की सलाह लें. ये एक मनोरोग है जो दवाइयों और काउंसलिंग से ठीक हो सकता है. सगा रिश्ता नहीं भी है तो भी ऐसा व्यवहार होने पर आवाज जरूर उठानी चाहिए. हमारे देश में मानसिक रोगों पर चर्चा होनी बहुत जरूरी है वरना लोग असल कारण समझ ही नहीं पाएंगे.''

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