प्रेस रिव्यू : गूगल का नया फ़ीचर, यूज़र्स ढूंढ सकेंगे नौकरियां

गूगल इमेज कॉपीरइट Reuters

दैनिक भास्कर की ख़बर के मुताबिक अब गूगल पर नौकरियां भी ढूंढी जा सकेंगी.

गूगल ने भारत में 'जॉब नीयर मी' फ़ीचर लांच किया है जिसके तहत यूज़र अपने क्षेत्र, अपने अनुभव और दिलचस्पी के आधार पर नौकरियां ढूंढ सकेंगे.

अलग-अलग फ़िल्टर की मदद से अपनी योग्यता और ज़रूरत के हिसाब से यूज़र नौकरी ढूंढ सकेंगे.

गूगल ने तक़रीबन 90 हज़ार कंपनियों को इसमें लिस्ट किया है.

इसमें जॉब अलर्ट फ़ीचर भी है यानी रजिस्टर करने के बाद आपकी रूचि से मेल खाती जब भी कोई नौकरी उपलब्ध होगी तो गूगल आपको ई-मेल भेजकर सूचना देगा.

इमेज कॉपीरइट Getty Images

तिहाड़ जेल में सुधर रहे हैं हाई-प्रोफ़ाइल कैदी?

हिंदुस्तान टाइम्स अख़बार में ख़बर छपी है कि तिहाड़ जेल से जल्दी छोड़े जाने वालों की लिस्ट में मनु शर्मा और सुशील शर्मा भी शामिल हैं.

अच्छे व्यवहार की वजह से 30 कैदियों समेत इन दोनों को भी जल्दी छोड़े जाने की संभावना वाले कैदियों की फ़ेहरिस्त में रखा गया है.

मनु शर्मा 1999 में हुए जेसिका लाल हत्याकांड के मामले में 15 साल से तिहाड़ जेल में बंद हैं. सुशील शर्मा अपनी पत्नी की हत्या (तंदूर कांड) के जुर्म में 23 साल से सज़ा काट रहे हैं.

जेल अधिकारियों का कहना है कि ये दोनों कैदी आदर्श कैदी हैं और ये जेल में सुधार होने के उदाहरण हैं.

तिहाड़ से 2010 में रिहा हुए दल लामा बताते हैं कि जेल जाने से पहले वो कलाकार नहीं थे, लेकिन अब वो जेलों में जाकर कैदियों को पेंटिंग सिखाते हैं.

इमेज कॉपीरइट AFP/getty images

संसद में भी होता है कास्टिंग काउच

द हिंदू की ख़बर के मुताबिक पूर्व कांग्रेस सांसद रेणुका चौधरी का कहना है कि कास्टिंग काउच एक सच्चाई है और संसद भी इससे अछूती नहीं है.

कोरियोग्राफ़र सरोज ख़ान ने एक बयान दिया था कि मीडिया कास्टिंग काउच को लेकर सिर्फ़ फ़िल्म इंडस्ट्री को ही क्यों निशाना बनाती है. कम से कम इंडस्ट्री ने नौकरियां दी हैं और महिलाओं का बलात्कार कर उन्हें छोड़ नहीं दिया.

इसी बयान को लेकर मीडिया के सवाल पर रेणुका चौधरी ने कहा, "ये सिर्फ़ फ़िल्म इंडस्ट्री में नहीं है. ये हर जगह है और यही कड़वी सच्चाई है. ये मत सोचिए कि संसद या कोई और कार्यक्षेत्र इससे अछूता है."

उन्होंने कहा कि अब भारत में भी 'मी टू' कैंपेन शुरू होना चाहिए.

इमेज कॉपीरइट Getty Images

सुप्रीम कोर्ट के जजों ने लिखी मुख्यन्यायाधीश को चिट्ठी

इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट के दो वरिष्ठ जजों ने मुख्य न्यायाधीश को चिट्ठी लिखी है कि वे फ़ुल कोर्ट बुलाकर कोर्ट के भविष्य पर चर्चा करें.

सीजेआई दीपक मिश्रा के ख़िलाफ़ महाभियोग प्रस्ताव दिए जाने के 2 दिन बाद जस्टिस रंजन गोगोई और मदन लोकुर ने उन्हें चिट्ठी लिखी है कि कोर्ट में जो संस्थानिक मुद्दे हैं उन पर चर्चा करवाई जाए.

दीपक मिश्रा के अक्तूबर में सेवानिवृत्त होने के बाद जस्टिस गोगोई के पद संभालने की संभावना है.

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश समूचे कोर्ट के जजों की मीटिंग तब बुलाते हैं जब न्यायपालिका ये जुड़ा जनहित का कोई मुद्दा उठता है.

इमेज कॉपीरइट Getty Images

प्रदर्शन करना बन चुका है धंधा: केंद्र

दैनिक जागरण के मुताबिक केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में टिप्पणी की है कि आज के वक्त में प्रदर्शन करना एक धंधे की शक्ल ले चुका है.

सरकार का कहना है कि राष्ट्रपति, सुप्रीम कोर्ट, प्रधानमंत्री दफ़्तर और निवास के सामने लोग बेवजह धरना प्रदर्शन करने लगते हैं जिससे क़ानून व्यवस्था बिगड़ती है. इसी वजह से मध्य दिल्ली में धारा 144 लागू की गई है.

सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से एक जनहित याचिका पर जवाब मांगा था. इस याचिका में कहा गया था कि सारी मध्य दिल्ली में धारा 144 लागू करके सरकार ने लोगों के संवैधानिक अधिकारों पर हमला किया है.

अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने दलील देते हुए कहा कि लोग अपनी आवाज़ उठाने के लिए अगर सत्ता प्रतिष्ठान के सामने धरना नहीं देंगे तो क्या नरेला जाकर प्रदर्शन करेंगे जहां उनकी आवाज़ कोई सुनेगा ही नहीं.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)