ग्राउंड रिपोर्ट: उलझा है नाबालिग बच्ची के 'बलात्कार' का मामला

मदरसा
Image caption वह मदरसा जहां से बलात्कार पीड़िता को छुड़ाया गया

मौजूदा राजनीतिक माहौल में कई लोगों के लिए बलात्कार पीड़िता और अभियुक्त का धर्म शायद ज़्यादा महत्वपूर्ण हो गए हैं.

दिल्ली में 10 साल की बच्ची के कथित बलात्कार का मामला इसी का उदाहरण है.

बच्ची हिंदू है. अभियुक्त मुसलमान है और पुलिस दावा कर रही है कि उन्होंने बच्ची को एक मदरसे से बचाया.

ये सारी जानकारी पार्टियों के लिए राजनीति चमकाने के बढ़िया मौक़े की तरह है.

भाजपा नेता मनोज तिवारी ने इस घटना के विरोध में एक कैंडल मार्च निकाला. जिसमें शामिल लोगों ने नाबालिग बताए जा रहे अभियुक्त को फांसी पर चढ़ाने की मांग की.

गुस्साई भीड़ ने विरोध में पूर्वी दिल्ली के गाज़ीपुर थाने का घेराव भी किया.

पुलिस ने बलात्कार की पुष्टि की है

पुलिस ने मदरसे के मौलवी को हिरासत में ले लिया है.

अपने पति को बेक़सूर बताने वाली मौलवी की पत्नी ने बताया कि रविवार शाम को पुलिस उनके पति के अलावा तीन और लोगों को ले गई .

इनमें से एक लड़के का दावा है कि वो नाबालिग है. मामले की जांच दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच कर रही है.

क्राइम ब्रांच के जॉइंट कमिश्नर आलोक कुमार ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि "लड़के का कहना है कि वो 17 साल का है लेकिन वो इसे साबित करने के लिए कोई दस्तावेज़ पेश नहीं कर सका. हो सकता है कि हम उस लड़के की उम्र पता लगाने के लिए उसकी हड्डियों की जांच कराए."

पुलिस ने बलात्कार की पुष्टि की है. साथ ही बच्ची ने मजिस्ट्रेट के सामने बयान दे दिया है.

Image caption मदरसे की पहली मंज़िल

कुरकुरे खरीदने गई थी बच्ची

पूर्वी दिल्ली की तंग गलियों से होते हुए हम बच्ची के घर पहुंचे. चौथे माले पर बने घर में पहुंचने के लिए एकदम खड़ी सीढ़ियां लेनी होती हैं.

बंद दरवाज़ा खटखटाया तो जाली के दूसरी ओर एक पुरुष रिश्तेदार दिखाई दिए. हमें इंतज़ार करने के लिए कहा गया.

थोड़ी देर में अंदर से बच्ची के पिता की तेज़ आवाज़ आने लगी. उनकी आवाज़ में नाराज़गी थी - मीडिया से, समाज से, सभी से.

'तक़लीफ़ हमारी है, किसी और की नहीं,' वे किसी से कह रहे थे. हमने महसूस किया कि बच्ची के मां-बाप किसी से बात करने की स्थिति में नहीं थे तो हमने उन्हें और परेशान करना सही नहीं समझा.

बच्ची के मामा दावा करते हैं कि 21 अप्रैल की दोपहर ये बच्ची पनीर, दूध और कुरकुरे खरीदने घर से नीचे गई थी.

जब एक घंटे तक वो वापस नहीं लौटी तो उसके छोटे भाई ने इसकी जानकारी परिवार को दी और उसके बाद बच्ची की खोजबीन शुरू हुई.

Image caption मदरसे की पहली मंज़िल

परिवार के मुताबिक़ बच्ची के पास मोबाइल फ़ोन था

मोबाइल ट्रैकिंग की मदद से उसे अगले दिन यानी 22 तारीख़ की शाम को गाज़ियाबाद के एक मदरसे से खोज निकाला गया.

ये वही इलाक़ा था जहां बच्ची का परिवार पहले किराए पर रहता था और पिछले हफ़्ते ही मकान छोड़कर पूर्वी दिल्ली शिफ़्ट हुआ था.

ये मदरसा एक अधूरी सी नई इमारत है जिसकी दीवारें देखकर लगता है जैसे कुछ हिस्सों पर जल्दबाज़ी में प्लास्टर कर दिया गया हो.

Image caption मदरसे के आस-पास जमा तमाशबीन

हमने उस मदरसे में क्या देखा?

मदरसे के बाहर मीडिया के अलावा पड़ोसी और तमाशबीन जमा थे. ज़मीनी मंज़िल पर वुज़ू करने के पानी की व्यवस्था के अलावा नमाज़ पढ़ने के लिए जगह थी.

सीढ़ी से ऊपर जाकर पहली मंज़िल पर एक बड़ा हॉल था जहां कुछ चटाइयां ज़मीन पर बिखरी पड़ी थीं जबकि कुछ सलीके से किनारे रखी हुई थीं.

35 साल के मौलवी की पत्नी के मुताबिक़ चंदे से पांच साल पहले बने मदरसे में करीब 50 बच्चों के रहने की व्यवस्था थी.

वे अपने पति की गिरफ़्तारी को मुसलमानों को बदनाम करने की साज़िश बताती हैं और बच्ची के चरित्र पर ही सवाल उठाती हैं "उसके हाथ में 24 घंटे फ़ोन रहता था और वो हमेशा फ़ोन पर बात करती रहती थी."

पूरी बातचीत के दौरान मौलवी की पत्नी ने चेहरे से बुरका नहीं हटाया. उनकी नाराज़गी सिर्फ़ उनकी आवाज़ से समझ आ रही थी.

दो बच्चों की मां मौलवी की पत्नी कहती हैं, "मेरे पति दुनिया को बुराई छोड़ने और नमाज़ पढ़ने के लिए कहते थे. क्या वो रेप कर सकते हैं? न उनको जेल होनी चाहिए, न फांसी की सज़ा. क्या उनकी औलाद नहीं है? क्या उनकी बेटी नहीं है?"

Image caption हिरासत में लिए गए मौलवी की पत्नी

परिवार ने कहा बच्ची को अगवा किया गया था

उधर बच्ची के मामा का आरोप है कि मौलाना ने बच्ची को योजना बनाकर अगवा किया.

उन्होंने कहा, "पुलिस ने मौलाना के ऊपर कोई चार्ज नहीं लगाया. (पुलिस) पूरे गैंग को गिरफ़्तार करे और कम से कम फांसी दें. मैं नहीं मानता कि (बलात्कार में) उस नाबालिग बच्चे का हाथ है. वो ऐसी हिमाकत नहीं कर सकता है."

बच्ची की हालत पर वे कहते हैं, "बच्ची की हालत अभी ठीक नहीं है, वो अभी भी लेटी है. खाती पीती नहीं है. खिलाने के लिए बहुत ज़ोर ज़बरदस्ती करनी पड़ती है."

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