कर्नाटक में हो चुकी है बीजेपी-जेडीएस की ‘सेटिंग’!

  • 26 अप्रैल 2018
कुमारास्वामी और येदियुरप्पा इमेज कॉपीरइट Getty Images

कर्नाटक विधानसभा के चुनावों के लिए नामांकन ख़त्म होने के बाद अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या कांग्रेस को हराने के लिए बीजेपी और जेडीएस के बीच गुपचुप सहमति बन चुकी है?

इन ख़बरों को हवा इसलिए भी मिल रही हैं क्योंकि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के ज़िले चामुंडेश्वरी में बीजेपी अपना उम्मीदवार बदल चुकी है.

सिद्धारमैया चामुंडेश्वरी से कांग्रेस के उम्मीदवार हैं. बीजेपी ने वहां अपने वोकालिगा जैसी उच्च जाति से संबंध रखने वाले उम्मीदवार को बदल दिया है.

पार्टी कार्यकर्ता और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आधी से अधिक विधानसभा सीटों के उम्मीदवार जिस तरीक़े से बदले गए हैं वो जेडीएस की मदद करेगा.

हालांकि जेडीएस और बीजेपी ने ऐसी किसी सहमति से इनकार किया है.

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'गोपनीय सहमति' जैसे सवाल

सिद्धारमैया को चुनौती दे रहे जेडीएस के उम्मीदवार जी.टी. देवेगौड़ा भी वोकालिगा समुदाय से आते हैं.

बीजेपी ने अपने उम्मीदवार गोपाल राव को 'एक साधारण कार्यकर्ता बताया है और कहा है कि वह 'मुख्यमंत्री को हराएंगे.'

हालांकि निजी तौर पर उम्मीदवारों को बदलने के बारे में बताते हुए बीजेपी नेता हंसते हैं.

इसी तरह के बदलाव के.आर. नगर, पेरियापटना, हुंसूर, एचडी कोटे और चामराजा जैसी विधानसभा सीटों पर किए गए हैं जिससे एक 'गोपनीय सहमति' जैसे सवाल उठते हैं.

कथित समझौते की कहानी को तब और बल मिला जब बीजेपी ने बी.वाई. विजेंद्र जैसे मज़बूत कार्यकर्ता को वरुणा विधानसभा सीट से उम्मीदवार नहीं बनाया.

उनको उम्मीदवार न बनाए जाने की घोषणा उनके पिता और पार्टी के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार बी.एस. येदियुरप्पा ने की थी.

येदियुरप्पा पार्टी हाई कमान से निर्देश ले रहे थे लेकिन पार्टी कार्यकर्ताओं ने इस पर हिंसा की. लिंगायत समुदाय से आने वाले विजेंद्र मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के पुत्र डॉक्टर यतींद्र के ख़िलाफ़ वरुणा सीट से चुनाव लड़ना चाह रहे थे.

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Image caption येदियुरप्पा ने अपने बेटे के उम्मीदवार न बनाए जाने की घोषणा की थी

पुराने मैसूर में बीजेपी नहीं है मज़बूत

जेडीएस ऐसी किसी 'गोपनीय सहमति' को नकारती है.

राज्य में जेडीएस के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री एच.डी. कुमारास्वामी बीबीसी हिंदी से कहते हैं, "अगर हमारी बीजेपी के साथ कोई सहमति है तो हम सीटों के उस लक्ष्य तक कैसे पहुंचेंगे जो हमने जीत के लिए तय किया है? जेडीएस और बीजेपी दोनों ने सरकार बनाने के लिए 113 का लक्ष्य तय किया है. अगर हम दोनों में कोई समझौता हुआ है तो हम उस लक्ष्य तक नहीं पहुंच सकते हैं."

बीजेपी के प्रवक्ता डॉक्टर वमन आचार्य कहते हैं, "मैसूर और हासन में बीजेपी और जेडीएस की अपनी मज़बूती है. हमने जीतने के लिए उम्मीदवार उतारे हैं. हमारे उम्मीदवार आज सामान्य ज़रूर दिखते हों लेकिन वे जीतेंगे और जब परिणाम आएंगे तो आप जानेंगे."

कुमारास्वामी कहते हैं कि बीजेपी ने आधा दर्जन सीटों पर जो उम्मीदवार उतारे हैं, उससे उनको कोई मदद नहीं मिलेगी और उन सभी सीटों पर जेडीएस बेहद मज़बूत है.

राजनीतिक विश्लेषक और मैसूर विश्वविद्यालय में राजनीति शास्त्र के प्रोफ़ेसर मुज़फ़्फ़र असादी कुमारास्वामी के तर्क पर सहमति जताते हैं और कहते हैं कि बीजेपी पुराने मैसूर क्षेत्र में मज़बूत नहीं है.

यह वह जगह है जहां प्रमुख समुदाय वोकालिगा की ऊपरी जाति का प्रभुत्व है. इसी जाति से कुमारास्वामी और उनके पिता एवं पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौड़ा संबंध रखते हैं.

लिंगायत समुदाय जहां पूरे राज्य में फैला हुआ है, उसके मुक़ाबले वोकालिगा दक्षिणी कर्नाटक और मध्य कर्नाटक के ज़िलों में फैले हुए हैं.

प्रोफ़ेसर असादी कहते हैं, "पुराने मैसूर के मैसूर, मंड्या, हासन, रामानगरम और ग्रामीण बेंगलुरु क्षेत्र में बीजेपी का मज़बूत सामाजिक आधार नहीं है."

लेकिन वह आगे कहते हैं, "पुराने इतिहास को देखते हुए जेडीएस को ग़ैर-भरोसेमंद सहयोगी माना जाता है. लेकिन यह काफ़ी स्पष्ट है कि कांग्रेस जैसे एक सामान्य दुश्मन को हराने के लिए बीजेपी और जेडीएस में एक गुप्त समझौता हुआ है."

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Image caption कुमारास्वामी को जेडीएस के जीतने का भरोसा

'किंग होंगे, न कि किंग मेकर'

लेकिन यह भी एक तथ्य है कि चिकमंगलूर और शिवमोगा जैसे ज़िलों में बीजेपी से कांग्रेस के मुक़ाबले जेडीएस अधिक मज़बूती से लड़ रही है.

कुमारास्वामी कहते हैं, "इस तरह की कोई चीज़ नही है कि कुछ जगहों पर दोस्ताना लड़ाई हो और कुछ जगहों पर सामान्य लड़ाई. हम बीजेपी के साथ गंभीरता से चुनाव लड़ रहे हैं. शिकारीपुरा विधानसभा क्षेत्र में भी हम येदियुरप्पा को हराने के लिए लड़ रहे हैं."

हालांकि कुमारास्वामी इस बात को लेकर आश्वस्त हैं कि वह इस चुनाव में 'किंग होंगे न कि किंग मेकर.'

वह कहते हैं, "अगर हम सिर्फ़ 113 पर पहुंचते हैं तो गवर्नर मेरे लिए राज भवन के दरवाज़े खोलेंगे और मैं वहां जाऊंगा."

2006 से 2008 के बीच जेडीएस की पहुंच मुस्लिमों, पिछड़ों, वोकालिगा और दलितों के बीच ख़ासी कम हुई है.

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी इस विवाद को तब हवा दी थी जब उन्होंने जेडीएस पर आरोप लगाया कि वह बीजेपी की 'बी' टीम है.

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