इंदु मल्होत्रा: सीनियर वकील से जज तक का सफ़र

  • 27 अप्रैल 2018
जस्टिस इंदु मल्होत्रा
Image caption जस्टिस इंदु मल्होत्रा

सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ वकील इंदु मल्होत्रा अब जज बन गई हैं. सुप्रीम कोर्ट के बार काउंसिल से सीधे जज बनने वाली वो पहली महिला हैं.

ये पहला मौका होगा जब सुप्रीम कोर्ट में एक साथ दो-दो महिला जज हैं, जस्टिस आर भानुमति और आज से जस्टिस इंदु मल्होत्रा.

इंदु मल्होत्रा की कामयाबी

सड़क हादसे में कोई आपके सामने दुर्घटनाग्रस्त हो तो अस्पताल ले जाने वाले आदमी को अब पुलिस प्रताड़ना का सामना नहीं करना पड़ता है.

बहुत कम लोग जानते हैं कि 2016 के सुप्रीम कोर्ट के इस निर्देश के पीछे भी इंदु मल्होत्रा ही हैं. इस मुहिम की शुरुआत 'सेव लाइफ एनजीओ' नाम की एक संस्था ने की थी.

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संस्था के सीईओ पीयूष के मुताबिक "गुड सैमरिटन" नाम के इस क़ानून के पीछे की पूरी रिसर्च खुद इंदु मल्होत्रा के नेतृत्व में एक टीम ने की थी.

पीयूष के मुताबिक़ बिना इंदु मल्होत्रा की मदद के देश को ये क़ानून नहीं मिल सकता था. इंदु शुरुआती दिनों से सेव लाइफ फाउंडेशन से जुड़ी हैं और वो फाउंडेशन के बोर्ड ऑफ़ ट्रस्टीज़ में भी शामिल हैं.

इसके आलावा बतौर वकील इंदु मल्होत्रा ने शीतल पेय बनाने वाली कंपनी पेप्सिको इंडिया, इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन, अस्पताल चलाने वाली कंपनी मेदांता, कंसल्टेंसी कंपनी केपीएमजी जैसी कई बड़ी कंपनियों का प्रतिनिधित्व किया है.

सुप्रीम कोर्ट में आने से पहले वो हरियाणा सरकार, सेबी, डीडीए, सीएसआईआर और आईएसआर की तरफ से भी मामलों में वकालत करती रही हैं.

कौन हैं इंदु मल्होत्रा?

वकील के परिवार में जन्मी इंदु मल्होत्रा के पिता ओम प्रकाश मल्होत्रा सुप्रीम कोर्ट के वकील रह चुके हैं.

इंदु मल्होत्रा का जन्म 14 मार्च 1956 में बेंगलुरू में हुआ था.

दिल्ली में पली-बढ़ी, इंदू ने कार्मेल कॉन्वेंट स्कूल, दिल्ली से शुरुआती पढ़ाई की. इसके बाद स्नातकोत्तर की पढ़ाई के लिए डीयू के लेडी श्रीराम कॉलेज में पॉलिटिकल साइंस में दाखिला लिया. वहां से निकलने के बाद, उन्होंने क़ानून की पढ़ाई की.

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क़ानून की पढ़ाई और प्रैक्टिस

वो पिछले 30 सालों से सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस कर रही हैं. उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के फैकल्टी ऑफ़ लॉ से 1983 में एलएलबी की डिग्री हासिल की है.

1988 में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड की परीक्षा पास की. उसमें वो गोल्ड मेडलिस्ट रही. इंदु मल्होत्रा ने आर्बिट्रेशन लॉ पर किताब भी लिखी है.

2007 में उन्हें सुप्रीम कोर्ट का सीनियर एडवोकेट नामित किया गया. सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में 30 साल बाद ऐसा मौका आया था. इनसे पहले लीला सेठ को ये ख्याति हासिल थी.

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साथियों की राय

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन की पूर्व सचिव ऐश्वर्या भाटी के मुताबिक़, "सुप्रीम कोर्ट की सभी महिला वकीलों के लिए ये एक गर्व की घड़ी है. इंदु जी के चुनाव ने न सिर्फ़ हाउस सीमा रेखा को तोड़ा है, बल्कि सुप्रीम कोर्ट के लेडीज़ बार रूम को भी चार चांद लगाया है."

उनके मुताबिक़, "संख्या बल में महिला वकील भले ही अब भी कम हो लेकिन सीधे बार से जज बनना अपने आप में बड़ी बात है. इससे हम जैसे जूनियर सहयोगियों का भी हौसला बुलंद होता है."

महिला जजों का इतिहास

इंदु मल्होत्रा से पहले छह महिलाएं, सुप्रीम कोर्ट में जज रह चुकी हैं. इस कड़ी में जस्टिस फातिमा बीवी पहली थीं.

उनके बाद जस्टिस सुजाता मनोहर, जस्टिस रूमा पाल, जस्टिस ज्ञान सुधा मिश्रा, जस्टिस रंजना देसाई भी सुप्रीम कोर्ट में जज रह चुकी हैं. वर्तमान में जस्टिस आर भानुमति भी सुप्रीम कोर्ट में जज हैं.

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