प्रेस रिव्यूः सिविल इंजीनियर को ही देनी चाहिए सिविल सेवा की परीक्षा

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Image caption त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लब देब

त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लब देब के विवादित बयानों का सिलसिला खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है.

हिंदुस्तान टाइम्स में प्रकाशित ख़बर के मुताबिक बिप्लब देब ने कहा है कि सिविल सेवा की परीक्षा देने के लिए मैकेनिकल इंजीनियरों के मुकाबले सिविल इंजीनियर बेहतर होते हैं और उन्हें ही यह परीक्षा देनी चाहिए.

अखबार अपनी खबर में लिखता है कि त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लब देब सिविल सेवा दिवस पर आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे. उन्होंने कहा, ''पहले के वक्त में मानविकी विषय के छात्र ही अधिकतर सिविल सेवा की परीक्षा देते थे, लेकिन अब यह ट्रेंड बदल गया है. अब डॉक्टर, इंजीनियर यह परीक्षा देने लगे हैं.''

''मेरे विचार से जो लोग मैकेनिकल इंजीनियरिंग से आते हैं उन्हें यह परीक्षा नहीं देनी चाहिए, सिविल इंजीनियरों को प्रशासन और समाज की बेहतर समझ होती है.''

सोशल मीडिया पर बिप्लब देव के बयान पर खूब प्रतिक्रियाएं आ रही हैं. मलयालम लेखक एनएस माधवन ने लिखा है, "जब मोदी ने त्रिपुरा के लोगों से कहा था कि वे उन्हें हीरा देने वाले हैं, तो उन्होंने कल्पना नहीं की होगी कि यह इतना अद्भुत होगा."

बिप्लब देब ने कुछ दिन पहले डायना हेडन पर भी विवादित बयान दिया था. उन्होंने कहा था कि भारतीय महिलाओं की ख़ूबसूरती की नुमाइंदगी ऐश्वर्या राय करती हैं ना कि डायना हेडन. हालांकि अब उन्होंने अपने इस बयान पर खेद जताया है और कहा है कि वे सभी महिलाओं का सम्मान करते हैं.

इससे पहले, बिप्लब देब इंटरनेट पर दिए गए बयान को लेकर सुर्खियों में थे. उन्होंने कहा था कि भारत की संस्कृति बहुत महान है और 99 फ़ीसदी भारतीय इस बात पर भरोसा करते हैं कि भारत और इसकी संस्कृति बहुत महान है.

एक कार्यक्रम में बिप्लब ने कहा था कि महाभारत काल में भी इंटरनेट और सैटेलाइट की सुविधा उपलब्ध थी. अन्यथा कैसे संजय, धृतराष्ट्र को महाभारत का आंखों देखा हाल सुना सकते थे. इससे साबित होता है कि उस वक्त भी इंटरनेट और सैटेलाइट की सुविधा थी.

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Image caption बिप्लब कुमार देब अपनी पत्नी नीति देब के साथ

जिनपिंग ने मोदी को सुनाया, 'ये वादा रहा'

चीन के दौरे पर गए भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ शनिवार को हुई मुलाक़ात सुर्खियों में बनी हुई है.

जनसत्ता में प्रकाशित खबर के अनुसार चीन का दिल कहे जाने वाले शहर वुहान में पीएम मोदी के स्वागत में चीन ने अपने पारंपरिक वाद्य यंत्रों पर अनूठे अंदाज में बॉलीवुड का मशहूर गीत 'तू है वही, दिल ने जिसे अपना कहा...ये वादा रहा.'

अखबार लिखता है कि फिल्म 'ये वादा रहा' के गीत का इंस्ट्रूमेंटल वर्जन मोदी और जिनपिंग मंत्रमुग्ध होकर सुनते रहे. इस मौके पर चीनी राष्ट्रपति ने कहा कि यह वसंत का मौका है और इस मौसम में जो भी रिश्ते बनते हैं वे पवित्र माने जाते हैं.

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किरण बेदी के आदेश पर मुख्यमंत्री का पलटवार

पुडुचेरी की लेफ्टिनेंट गवर्नर किरण बेदी के शनिवार को जारी एक आदेश के बाद विवाद पैदा हो गया. कई अखबारों ने इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया है.

इंडियन में प्रकाशित खबर में लिखा है कि किरण बेदी ने घोषणा की कि जिन गांवों में लोग खुले में शौच करते हैं या खुले में कूड़ा-करकट फेंकते हैं उन्हें मुफ्त चावल देना बंद कर दिया जाएगा.

अखबार आगे लिखता है कि इस आदेश पर विवाद होने के बाद किरण बेदी ने अपने एक स्पष्टीकरण में बताया कि उनके आदेश को गलत तरीके से प्रसारित किया गया है, वे सिर्फ ग्रामीण इलाकों में बेहतर जीवन स्तर लाने की कोशिश कर रही हैं, उनका इरादा किसी भी गरीब व्यक्ति को राशन से दूर करने का नहीं है. किरण बेदी ने अपने आदेश को वापिस ले लिया है.

वहीं पुडुचेरी के मुख्यमंत्री वी नारायणसामी ने भी किरण बेदी के इस आदेश की आलोचना की है और कहा है कि उनका यह आदेश राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 का विपरीत था. मुख्यमंत्री ने साथ ही कहा कि किरण बेदी को अंदाजा भी नहीं है कि उनके इस आदेश के कैसे दुष्परिणाम देखने को मिलते.

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क्या राजनीति में भी होता है कास्टिंग काउच?

कांग्रेस की नेता रेणुका चौधरी ने हाल ही में कहा था कि कास्टिंग काउच से संसद भी अछूती नहीं है, इस बयान के बाद खूब हंगामा मचा.

दैनिक भास्कर में प्रकाशित खबर के मुताबिक दैनिक भास्कर ने लोकसभा और राज्यसभा की कुल 81 महिला सांसदों में से 70 सदस्यों से संपर्क किया गया, और उनसे इस संबंध में सवाल पूछा.

अखबार लिखता है कि 57 महिला सांसदों ने रेणुका की बात का समर्थन नहीं किया यानी कि 80 फीसदी से अधिक महिला सांसदों ने राजनीति में कास्टिंग काउच होने से इंकार किया है. इन महिला सांसदों का कहना था कि संसद में कास्टिंग काउच की बात सच्चाई से कोसों दूर है.

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Image caption रेणुका चौधरी

हालांकि आंध्र प्रदेश में टीडीपी सांसद रामालक्ष्मी और वाईएसआर कांग्रेस की गीथा कोतुपल्ली ने ये जरूर माना कि राजनीति में महिलाओं के साथ यौन शोषण होता है. हालांकि इसमें सोनिया गांधी व मोदी सरकार में शामिल आठ महिला मंत्रियों को शामिल नहीं किया गया.

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