UPSC 2017: परचम लहरा रहे हैं पूर्वोत्तर के छात्र

  • 2 मई 2018
पूजा इलांगबम
Image caption पूजा इलांगबम

'मणिपुर में सबसे बड़ी समस्या बेरोजगारी की है. यहां आतंकवाद और विद्रोह की समस्या बेरोजगारी के कारण हैं. युवाओं को जब यह पता नहीं होगा कि कमाई कैसे करें, तब तक वो विचलित होते रहेंगे', यह कहना है पूर्वोत्तर के मणिपुर से यूपीएससी परीक्षा में 81वां रैंक हासिल करने वाली पूजा इलांगबम का.

देहरादून के वेल्हम गर्ल्स बोर्डिंग स्कूल से 12वीं तक पढ़ाई करने के बाद पूजा ने दिल्ली के सेंट स्टीफेंस कॉलेज से इतिहास में डिग्री हासिल की.

अपने पहले ही प्रयास में सिविल सेवा परीक्षा में सफलता हासिल करने वाली पूजा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से इंटरनेशनल रिलेशन में एमए कर चुकी हैं.

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कोई कोचिंग नहीं ली

यूपीएससी की परीक्षा में अपनी सफलता पर बीबीसी से बातचीत में पूजा कहती हैं, "मुझे स्कूल के दिनों से किताबें पढ़ने का शौक रहा है. मैंने स्कूल और कॉलेज की किताबों के अलावा दूसरे विषयों से जुड़ी काफी किताबें पढ़ी हैं."

"लिहाजा मैंने इस परीक्षा की तैयारी के लिए कहीं कोचिंग नहीं ली. घर पर एक साल पढ़ाई की. मेरे पापा ने मेरी बहुत मदद की. वे मणिपुर कैडर के आईपीएस हैं तो उन्होंने क्या पढ़ें, क्या नहीं, ये चुनने में मेरी मदद की. इसके अलावा मेरी मां एक शिक्षिका है, उनसे भी मुझे काफी मदद मिली.''

सिविल सेवा परीक्षा के इंटरव्यू के दौरान मणिपुर में अलगाववादी संगठनों की समस्या से जुड़े सवाल भी पूजा से पूछे गए थे. वो बताती हैं, "दरअसल मैं मणिपुर की परंपरागत हाथ से बनी साड़ी पहनकर इंटरव्यू देने पहुंची थी. जो लोग इंटरव्यू ले रहे थे उन सभी ने मेरे साथ बहुत अच्छी तरह बात की."

"शायद मेरी साड़ी पर उनका ध्यान गया और उन्होंने मुझसे मणिपुर और पूर्वोत्तर राज्यों के बारे में कई सवाल पूछे. मुझसे अरुणाचल प्रदेश की जनजातियों के बारे सवाल किए गए."

पूजा आगे बताती हैं, "इसके अलावा मणिपुर में अलगाववादी संगठनों से जुड़ी समस्याओं के बारे में पूछा और इसके समाधान के लिए मेरी राय मांगी. तब भी मैंने कहा था कि बेरोजगारी के कारण ही मणिपुर में आतंकवाद की समस्या हैं."

वो कहती हैं, "इंटरव्यू के समय भी मैंने कहा था कि मणिपुर में चरमपंथियों की समस्या के समाधान के लिए युवाओं को रोजगार मिलना ज़रूरी हैं. जबकि सरकारी नौकरी तो केवल एक फ़ीसदी लोगों को ही मिलती है. इसलिए उद्यम के साथ युवाओं का कौशल विकास होना चाहिए. मणिपुर में छोटे उद्योगों को बढ़ाने की आवश्कता है."

यूपीएससी में पूर्वोत्तर के छात्र

संघ लोक सेवा आयोग की साल 2017 की सिविल सेवा परीक्षा में असम समेत पूर्वोत्तर राज्यों से कुल 23 उम्मीदवारों ने सफलता हासिल की है. इनमें से 16 कैंडिडेट असम के हैं, तो चार अरुणाचल प्रदेश से और तीन मणिपुर से हैं.

एक समय था जब यूपीएससी की परीक्षा के नतीजों के बाद उत्तर भारत के छात्रों की चर्चा अधिक होती थी लेकिन अब पूर्वोत्तर राज्यों के छात्र भी सफलता के इस दौड़ में शामिल हो रहे हैं.

पूर्वोत्तर राज्यों से सामने आ रहे अच्छे नतीजों पर पूजा कहती हैं, "पहले पूर्वोत्तर के लोग सिविल सेवा परीक्षा को लेकर इतने जागरूक नहीं थे. पहले अधिकतर अभिभावक अपने बच्चों को डॉक्टर-इंजीनियर की पढ़ाई करने के लिए भेजते थे. लेकिन अब समय बदल गया हैं."

चाय बागान से असफ़री महकमे तक

इस साल असम से चयनित कुल 16 छात्रों में बाहनी कुमारी तेलेंगा भी शामिल हैं. उन्होंने सविलि सर्विस की परीक्षा में 661वां स्थान प्राप्त किया है.

वो राज्य के चाय बागान मजदूर समुदाय वाली 'चाय जनजाति' से हैं. चर्चा है कि बाहनी यूपीएससी परीक्षा में सफल होने वाली 'चाय जनजाति' की पहली महिला हैं.

दुर्गापुर में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी से मेटलर्जिकल एंड मैटेरियल्स इंजीनियरिंग में बीटेक कर चुकी बाहनी ने सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी के लिए विशाखापत्तनम में राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड की अपनी अच्छी खासी नौकरी छोड़ दी थी.

अपने इस फ़ैसले के बारे में पत्रकारों से बातचीत में वो कहती हैं, "मुझे अपनी नौकरी छोड़नी पड़ी क्योंकि मैं नौकरी करने के दौरान परीक्षा की तैयारी नहीं कर पा रही थी. मैं अपने पहले के दो प्रयासों में सफल नहीं हो सकी, इसलिए मैंने नौकरी छोड़ने का फ़ैसला किया और घर पर खुद से परीक्षा की तैयारी की."

"मैं अभी किसी भी सिविल सेवा की नौकरी के लिए तैयार हूं, लेकिन मैं आईएएस बनने की कोशिश को नहीं छोड़ूंगी."

बाहनी के पिता बरकी प्रसाद तेलेंगा राज्य में असम गण परिषद की सरकार के कार्यकाल के दौरान श्रम मंत्री रह चुके हैं.

Image caption बाहनी कुमार

मेहनत के साथ स्मार्ट वर्क

असम के ही सुभोजित भुइयां ने 645वां रैंक हासिल किया है. उनका कहना है कि सिविल सेवा परीक्षा जैसी अधिक प्रतिस्पर्धा वाली परीक्षा के लिए कड़ी मेहनत के साथ स्मार्ट वर्क भी जरूरी होता है.

जोरहाट इंजीनियरिंग कॉलेज से ग्रेजुएशन की डिग्री लेने के बाद सुभोजित असम सिविल सेवा की परीक्षा दी और सफल हुए. इस समय वे सिलचर में सहायक कमिश्नर के पद पर काम कर रहे थे.

सुभोजित बताते है, "यूपीएससी में सफल होने के लिए मैंने स्मार्ट वर्क किया था. लेकिन उसका तरीका तलाशने में मुझे तीन बार असफलता का सामना करना पड़ा. स्मार्ट वर्क का मतलब है कि एफ़र्ट में ज़्यादा प्रोडक्टिविटी. दरअसल मैं बहुत चुनिंदा सामग्री पढ़ता था."

Image caption सुभोजित भुइयां

पूर्वोत्तर राज्यों से सिविल सेवा परीक्षा में सामने आ रहे अच्छे नतीजों पर सुभोजित कहते हैं, "यह एक लंबी प्रक्रिया रही है. यह एक दिन में नहीं हुआ है. राज्य सरकार की भी सकारात्मक भूमिका रही है."

"सरकार ने यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा पास करने वाले उम्मीदवारों को एक लाख पच्चीस हजार रुपये प्रोत्साहन राशि के तौर पर दिया है ताकि वे आगे की तैयारी अच्छी तरह कर सकें. इसके अलावा गुवाहाटी विश्वविद्यालय और असम प्रशासनिक स्टाफ कॉलेज में भी कोचिंग की व्यवस्था की जाती है."

हालांकि सुभोजित इस बात को मानते हैं कि दिल्ली के मुकाबले पूर्वोत्तर राज्यों में कॉम्पिटिटिव इको सिस्टम की कमी है. उदाहरण के तौर पर वो कहते है, "पूर्वोत्तर राज्यों में यूपीएससी परीक्षा से जुड़ी अध्ययन सामग्री की उपलब्धता कम है. ऐसे में अगर कोई असमिया भाषा में परीक्षा देना चाहता है तो उसमें पढ़ने के लिए सामग्री ही नहीं है."

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