लाहौर की बच्ची का पंजाब के नाम ख़त

  • 1 मई 2018
अक़ीदत नवीद इमेज कॉपीरइट Aqeedat Naveed/BBC

बीबीसी पर प्रकाशित पंजाब के एक गांव की कहानी के बाद पाकिस्तान की एक छात्रा ने पत्र लिखा है.

बीबीसी ने दो दिन पहले पंजाब के मूम गांव में हिंदुओं और सिखों के सहयोग से मस्जिद के निर्माण की कहानी प्रकाशित की थी.

मूम गांव के ग़रीब मुसलमानों की मस्जिद के लिए यहां के हिंदुओं ने ज़मीन दी है और सिखों ने आर्थिक सहयोग किया है.

इस गांव में अब गुरुद्वारे और मंदिर के साथ मस्जिद भी होगी.

पंजाब: एक गांव जहां हिंदू और सिख मिलकर बनवा रहे हैं मस्जिद

इमेज कॉपीरइट Aqeedat Naveed/BBC
इमेज कॉपीरइट Aqeedat Naveed

पाकिस्तान के लाहौर से लिखे अपने ख़त में अक़ीदत नवीद ने लिखा है कि इस मस्जिद का नाम अब 'अमन की मस्जिद' होना चाहिए.

अपने ख़त में उन्होंने गांव के शिक्षक भरत राम और मुसलमान मिस्त्री नाज़िम राजा को संबोधित किया है.

उन्होंने लिखा,

"प्यारे उस्ताद भरत राम, मिस्त्री नाज़िम राजा और आदरणीय गांववासियों, अस्सलाम-ओ-अलैकुम, नमस्ते, सतश्रीअकाल.

मैंने बीबीसी पर आपके गांव की कहानी पढ़ी. एक दूसरे के लिए आपके प्यार और भाईचारे ने मुझे प्रेरित किया है. मैं बहुत ख़ुश हूं कि हमारे पड़ोसी देश में आप लोग एक-दूसरे की मदद करने और देखभाल करने का शानदार उदाहरण हो, जबकि आप सब अलग-अलग धर्मों के हैं.

Image caption राजा अपने हिंदू साथी भरत शर्मा के साथ. शर्मा कहते हैं कि भगवान सब जगह है.

आपने साबित कर दिया है कि मुसलमान, सिख और हिंदू भाई-भाई हैं और प्यार से रह सकते हैं. मैं आपको सलाह दूंगी कि आप अपनी मस्जिद का नाम अमन की मस्जिद रखें.

भविष्य में आप सब लोग बच्चियों की पढ़ाई के लिए भी एकजुट रहेंगे. अंत में मैं यही कहूंगी कि आप भारत के असली हीरो हैं.

इमेज कॉपीरइट AQEEDAT NAVEED / BBC

आपसे गुज़ारिश है कि मेरे ख़त को आप लोग अपनी चौपाल पर पढ़ें ताकि आप अपने भाईचारे और एकता के लिए गर्व महसूस कर सकें."

अक़ीदत नवीद पाकिस्तान के लाहौर में रहती हैं और सातवीं क्लास में पढ़ती हैं. उन्हें ख़बरें पढ़ने और ख़त लिखने में दिलचस्पी है. वो इससे पहले भी कई मुद्दों पर दुनियाभर के नेताओं को ख़त लिख चुकी हैं.

प्लेबैक आपके उपकरण पर नहीं हो पा रहा
पंजाब का वो गांव जहां हिंदुओं और सिखों ने बनवाई मस्जिद

पंजाब में लुधियाना के पास एक गांव में मंदिर और गुरुद्वारे तो थे, लेकिन मस्जिद नहीं थी.

ऐसे में गांव के हिंदुओं ने मंदिर के पास की ज़मीन मुसलमानों को दी ताकि वो मस्जिद बना सकें और सिखों ने उनकी आर्थिक मदद की. अब यहां मंदिर, मस्जिद और गुरुद्वारा एक साथ हैं.

मूम में तीन अलग-अलग समुदाय के लोग एक साथ खुशी-खुशी रहते हैं. यहां तनाव का कोई इतिहास नहीं रहा है और सभी समुदाय के लोग किसी भी धर्मस्थल में पूरी आज़ादी से आ जा सकते हैं.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए

मिलते-जुलते मुद्दे