जिन्ना विवाद: 'पुलिस ने अचानक लाठियां मारनी शुरू कर दी'

  • 3 मई 2018
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"एएमयू के ग़द्दारों को, जूते मारों **** को, भारत में जिन्ना का ये सम्मान...नहीं चलेगा-नहीं चलेगा, जय श्री राम-जय श्री राम, भारत में यदि रहना होगा, वंदे-मातरम कहना होगा"

ये वो नारे थे जो 2 मई, 2018 अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के मेन गेट के सामने सुनाई देना शुरू हुए.

यूनिवर्सिटी में तमाम छात्र और अध्यापक पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी के बहुलवाद विषय पर लेक्चर का इंतज़ार कर रहे थे.

लेकिन तभी यूनिवर्सिटी गेट के बाहर हो-हल्ले की आवाज़ें आना शुरू हो गईं. यूनिवर्सिटी में हामिद अंसारी मौजूद थे. लेकिन छात्र शोर सुनते ही गेट की ओर दौड़ पड़ते हैं.

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी जिन्ना विवाद एक नज़र में

  • यूनिवर्सिटी के यूनियन हॉल में मोहम्मद अली जिन्ना की तस्वीर लगने पर विवाद पैदा हुआ. ये तस्वीर 1938 से वहां लगी हुई है.
  • बीजेपी सांसद सतीश गौतम और महेश गिरी ने जिन्ना की तस्वीर होने की निंदा की है.
  • बुधवार को कुछ लोगों ने यूनिवर्सिटी परिसर के बाहर अभद्र नारेबाज़ी की.
  • छात्रों ने इन बाहरी तत्वों की गिरफ़्तारी की मांग उठाई थी.
  • इसके बाद पुलिस ने एएमयू छात्रों पर लाठी चार्ज किया जिसमें कई छात्र घायल हुए हैं.
  • एएमयू छात्रों ने इसके विरोध में यूनिवर्सिटी गेट पर विरोध प्रदर्शन किया.

एएमयू में आज क्या हुआ?

एएमयू में दर्शनशास्त्र की पढ़ाई करने वाले मोहम्मद ताबीश इस नारेबाज़ी के चश्मदीद गवाह बने.

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मोहम्मद ताबीश बताते हैं, "आज (बुधवार) दोपहर लगभग 3 बजे मैं हॉस्टल से निकलकर यूनिवर्सिटी के बाहर किसी काम से जा रहा था, तभी मैंने देखा कि विश्वविद्यालय के गेट की तरफ़ कुछ 30 से 35 लड़के जय श्री राम, जय श्री राम के नारे लगाते हुए अंदर आ रहे हैं, उनके हाथों में कट्टा, पिस्टल, लोहे की रॉड और धारदार हथियार थे. हमारे प्रॉक्टर और गार्ड्स ने उन्हें रोकने की कोशिश की. लेकिन इन लोगों ने हमारे यूनिवर्सिटी के प्रॉक्टर के साथ बदसलूकी से बात की और हाथापाई भी की."

"इसके बाद पुलिस ने ये मामला शांत करा दिया लेकिन जब यूनिवर्सिटी के छात्रों ने इन लड़कों की गिरफ़्तारी की मांग की तो पुलिस ने छात्रों पर आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठी चार्ज किया. यूनिवर्सिटी से जब हम एफ़आईआर दर्ज कराने की मांग के साथ थाने जा रहे थे तो पुलिस हमारे साथ थी लेकिन आगे जाकर पता नहीं कहां से आदेश आया कि उन्होंने लाठीचार्ज कर दी जिससे कई छात्र घायल हुए हैं."

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में छात्र इस लाठीचार्ज को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. हालांकि पुलिस इन आरोपों को ख़ारिज करती है.

अलीगढ़ के एसएसपी अजय कुमार साहनी ने बीबीसी के समीरात्मज मिश्र को बताया, "पुलिस ने हल्का बल प्रयोग किया है, लाठीचार्ज भी कोई ऐसा नहीं हुआ है, किसी को ज़्यादा चोट नहीं लगी है."

एसएसपी अजय कुमार साहनी आगे बताते हैं, "कुछ लोगों ने छात्रों को उकसाकर पुलिस पर पथराव करा दिया, जब पथराव हुआ तो पुलिस को लगा कि पब्लिक प्रॉपर्टी को नुक़सान पहुंच जाएगा, वहां पर एडीएम सिटी और एसपी सिटी जैसे ज़िम्मेदार अधिकारी मौजूद थे, उन्होंने नुक़सान बचाने के लिए न्यूनतम बल प्रयोग किया है. पुलिस कर्मियों में कुछ घायल हुए हैं जिनकी मेडिकल जांच कराई गई है. इस मामले में अब तक किसी को गिरफ़्तार नहीं किया गया है. पुलिस फोटो और वीडियो के आधार पर पहचान करके आगे की कार्रवाई की जाएगी"

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Image caption अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष मसकूर अहमदुस्मनी

यूनिवर्सिटी में घुसना चाहती है आरएसएस

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले तमाम छात्र बताते हैं कि यूनिवर्सिटी में हिंदू-मुस्लिम छात्रों के बीच बेहद सौहार्दपूर्ण माहौल है.

यूनिवर्सिटी में राजनीति शास्त्र पढ़ाने वाले प्रोफ़ेसर मोहिबुल हक़ बताते हैं, "इस यूनिवर्सिटी का माहौल हमेशा सोहार्दपूर्ण रहा है. यहां से स्नातक होने वाले पहले ग्रेजुएट भी एक हिंदू थे जिनका नाम ईश्वरी प्रसाद था. मैंने 20 साल यूनिवर्सिटी में पढ़ाते हुए कभी ये नहीं देखा कि यहां पर छात्रों के बीच साम्प्रादायिक माहौल पैदा हो. एक दूसरे के प्रति सम्मान का भाव रहता है. मैंने ये भी देखा है कि गर्मी की छुट्टियों में हिंदू बच्चे अपने मुसलमान दोस्तों के घर और मुसलमान बच्चे अपने हिंदू दोस्तों के घर जाते हैं."

ताबीश बताते हैं, "आरएसएस दरअसल इस यूनिवर्सिटी में घुसना चाहती है. ये इस यूनिवर्सिटी को बदनाम करने की साज़िश है. वो चाहते हैं कि यूनिवर्सिटी में किसी तरह घुस जाएं और इसके बाद हमारी यूनियन को प्रभावित किया जाए."

जिन्ना की तस्वीर परक्या कहती है बीजेपी

बीते दिनों बीजेपी सांसद सतीश गौतम और महेश गिरी ने अलीगढ़ मु्स्लिम यूनिवर्सिटी में मोहम्मद अली जिन्ना की तस्वीर लगाए जाने पर सवाल उठाया था.

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दिल्ली से बीजेपी सांसद महेश गिरी ने बीबीसी को बताया, "मैं एएमयू में जिन्ना का पोर्टेट लगाए जाने की कड़ी भाषा में निंदा करता हूं. अगर आप देखें कि पाकिस्तान में लाला लाजपत राय की मूर्ति को 1947 में तोड़ दिया गया, फ़ादर ऑफ़ लाहौर सर गंगाराम की मूर्ति को लाहौर में तोड़ दिया गया, कराची हाईकोर्ट में महात्मा गांधी की मूर्ति बचाने के लिए उसे इंडियन हाईकमीशन में शिफ़्ट करना पड़ा तो जिन्ना की तस्वीर वहां पर लगाने की क्या ज़रूरत है. विवाद को पैदा करने के लिए ये सब किया जा रहा है."

जिन्ना का वर्तमान राजनीति से कनेक्शन

एएमयू में इतिहास पढ़ाने वाले प्रोफ़ेसर मोहम्मद सज्जाद ने इस मुद्दे पर बीबीसी संवाददाता विकास त्रिवेदी को बताया, "एएमयू में आज यानी 2 मई को हामिद अंसारी को आजीवन मानद सदस्यता दी जानी है. हामिद अंसारी को इन लोगों ने पहले से ही साइड किया हुआ है. सोच ये भी है कि भारत के मुसलमानों को गिल्ट में डालो. गिल्ट कि मुस्लिम बंटवारे के लिए ज़िम्मेदार हैं और देशविरोधी हैं."

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"ताकि इसके नाम पर ध्रुवीकरण किया जा सके. कैराना उपचुनाव और 2019 लोकसभा चुनाव सामने हैं. बेरोजगारी, मंहगाई पर कुछ किया नहीं है. बस ध्रुवीकरण करना ही इनका मक़सद है."

प्रोफ़ेसर मोहिबुल हक़ भी मानते हैं, "वर्तमान सत्तारूढ़ पार्टी की बहुसंख्यक वर्ग में एक अल्पसंख्यक वर्ग आधार है. इस कॉन्सिटीट्यूएंसी को भावनात्मक मुद्दों पर अपने साथ रखना ज़रूरी होता है, ऐसे में कई नॉन-इश्यूज़ जैसे लव-जिहाद, गौ-हत्या, घर-वापसी आदि को विशेष नज़रिये से पेश किया जाना, एक विशेष तरह की पार्टी के लिए मुफ़ीद होता है. और ध्रुवीकरण के इस माहौल को चुनाव के माहौल के लिए जारी रखना है."

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Image caption अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के बाहर विरोध प्रदर्शन करते हुए छात्र

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