चीफ़ जस्टिस पर महाभियोग मामले में कांग्रेस ने कदम पीछे खींचे

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चीफ़ जस्टिस दीपक मिश्रा पर महाभियोग प्रस्ताव लाने का अध्याय इसी के साथ ख़त्म हो गया लगता है.

मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में कांग्रेस सांसद प्रताप सिंह बाजवा और अमी हर्षाद्रय ने अपनी याचिका वापस ले ली.

कांग्रेस सांसदों ने मुख्य न्यायाधीश के ख़िलाफ़ लाए गए महाभियोग प्रस्ताव को खारिज करने उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू के फ़ैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी.

जानेमाने वकील प्रशांत भूषण ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के बारे में विस्तार से जानकारी दी.

सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ...

प्रशांत भूषण ने बताया, "इस याचिका को सर्वोच्च न्यायालय के कोर्ट नंबर दो में लाया गया था. क्योंकि ये मामला सीधा चीफ़ जस्टिस से जुड़ा हुआ था, इसलिए इसे उनकी कोर्ट में नहीं रखा जा सकता था. इसलिए इस मामले में चीफ़ जस्टिस अपनी मास्टर ऑफ़ रोस्टर के अधिकार का इस्तेमाल नहीं कर सकते थे."

"सर्वोच्च अदालत के कोर्ट नंबर दो ने कहा कि इस पर हम विचार करेंगे और सुबह साढ़े दस बजे आने के लिए कहा. लेकिन कल रात को अचानक सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री से लिस्ट जारी हुई जिसमें इसी केस को कोर्ट नंबर 6 में पांच जजों की संविधान पीठ को सुपुर्द कर दिया गया."

"मंगलवार सुबह जब इस मामले की सुनवाई शुरू हुई तो याचिकाकर्ताओं के वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि हमें ये बताइए कि किस आदेश से ये मामला संविधान पीठ के सामने लिस्ट किया गया है क्योंकि बिना किसी जुडिशल ऑर्डर के कोई मामला सामान्यतः पांच जजों की खंडपीठ के सुपुर्द नहीं किया जा सकता."

"अगर चीफ़ जस्टिस ने अपने मास्टर ऑफ़ रोस्टर के अधिकार का इस्तेमाल करते हुए ये आदेश जारी किया है तो उसे चुनौती देने का अधिकार हमारे पास है क्योंकि कोई भी प्रशासनिक आदेश किसी भी प्रशासनिक प्राधिकरण ने दिया हो, चाहे वो चीफ़ जस्टिस ही क्यों न हो, उसे चुनौती देने का अधिकार संविधान में न्यायिक समीक्षा के अधिकार के तहत दिया गया है."

"कपिल सिब्बल ने ये कहा कि हमें ये ऑर्डर की कॉपी तो दीजिए जिससे हम ये देख सकें कि किसने और किस आधार पर ये ऑर्डर जारी किया है लेकिन संविधान पीठ का ये कहना था कि हम इस पहलू पर गौर नहीं करना चाहते और आप मामले के मेरिट्स पर विचार कीजिए."

"कपिल सिब्बल ने ये कहा कि अगर आप हमें उस आदेश की कॉपी भी नहीं दे सकते हैं और हमें उसे चुनौती देने की भी इजाजत नहीं दे रहे हैं तो हमें ऐसी स्थिति में इस पर आगे बढ़ना ठीक नहीं लगता. हम को अपनी याचिका वापस लेने की इजाजत दी जाए."

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कांग्रेस का पक्ष

सुप्रीम कोर्ट में पार्टी का पक्ष रख रहे सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने याचिका वापस लेने के बाद मीडिया के सामने अपनी बात रखी.

"चीफ़ जस्टिस पर लाए गए महाभियोग प्रस्ताव को खारिज करने के उपराष्ट्रपति के आदेश के ख़िलाफ़ हमने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की थी. सोमवार शाम को हमें पता चला कि हमारी याचिका 5 जजों के द्वारा सुनी जानी है. किसने आदेश दिया? क्या आदेश दिया?"

"अगर अनुच्छेद 145ए के तहत कोर्ट को लगे तो फिर सुनवाई 5 जजों के पास जाएगी, लेकिन याचिका सुनवाई के लिए आई ही नहीं. हम जानना चाहते थे कि जो भी प्रशासनिक फैसला हुआ है वो किसने किया?"

"हमारी मांग है कि हमें बताया जाए कि किसने ये आदेश पास किया है? हमारा संवैधानिक हक है कि हमें पता चलना चाहिए कि किसने ये आदेश पारित किया है. जब तक वो आदेश नहीं मिलता तो हम बहस कैसे करेंगे."

"ये सारी बातें हमने सुप्रीम कोर्ट के सामने रखी है. हिन्दुस्तान में कौन सा ऐसा ऑर्डर है जो चैलेंज नहीं हो सकता. यदि ऐसा कोई है तो वो हमें बताया जाए."

"हमें किसी न्यायाधीश के खिलाफ निजी शिकायत नहीं है. कांग्रेस पार्टी न्यायपालिका की स्वायत्तता को बचाना चाहती है."

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