ग्राउंड रिपोर्टः 'कहां हैं 'वो', उनको रिहा करवा दीजिए'

  • 9 मई 2018
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Image caption अपने पति की रिहाई का इंतजार कर रही मालिया देवी अपने बेटे के साथ

'संडे की सुबह आठ बजे उनका फ़ोन आया था. बोले कि काम पर जा रहे हैं. इसके बाद हमलोग घर के काम में लग गए. बच्चा सब छोटा-छोटा है तो इनलोगों को जल्दी भूख लग जाती है. इसलिए हम खाना बनाने लगे. सोचे थे कि रात में इत्मिनान से बात करेंगे. तभी शाम 5 बजे अफ़गानिस्तान से फ़ोन आया कि उनका अपहरण हो गया है. तबसे उनका फ़ोन बंद है और हमारी बातचीत नहीं हो सकी है. वे अभी कहां हैं, इसका पता भी नहीं चल रहा है. आपलोग प्रेस वाले हैं. उनको रिहा करवा दीजिए.'

प्रमिला देवी की आंखें यह कहते हुए नम हो जाती हैं.

उन्होंने तबसे अपना मोबाइल फ़ोन हाथ में ही रखा है. क्या पता कब किसका फ़ोन आ जाए और किस फ़ोन में उनकी रिहाई का मैसेज हो. वे बगोदर से क़रीब तीन किलोमीटर दूर महुरी गांव में अपने बच्चों और ससुरालवालों के साथ रहती हैं. यह गांव गिरिडीह जिले की जरमुने पश्चिमी पंचायत का हिस्सा है.

अफ़ग़ानिस्तान में छह मई को अगवा हुए छह भारतीय मजदूरों में से चार झारखंड के हैं.

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Image caption प्रमिला देवी

मासूम बेटियों को क्या जवाब दें

प्रमिला देवी ने बीबीसी से कहा, "मेरे पति अफगानिस्तान के पुल-ए-कुम्हरी शहर में रहकर केइसी इंटरनेशनल कंपनी के लिए काम करते थे. अगस्त में वे घर लौटने वाले थे. दो साल पहले जब वे घर आए तब उन्होंने कहा था कि अफगानिस्तान से लौटने के बाद भारत में ही काम करेंगे ताकि सबलोग साथ रह सकें. अब लोगों के लगातार आने-जाने के कारण मेरी बेटियां भी जान गईं हैं कि उनके पापा का अपहरण हो गया है. इसलिए बार-बार उनके ही बारे में पूछ रही हैं. बताइए, हम क्या जवाब दें."

अफ़ग़ानिस्तान में छह भारतीयों समेत सात का अपहरण

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Image caption अफ़गानिस्तान में बेडम गांव के अपहृत मजदूर के भाई

प्रशासन सक्रिय

जरमुने वेस्ट पंचायत के मुखिया संतोष कुमार रजक ने मुझे बताया कि हमसे बातचीत से पहले डीएसपी दीपक शर्मा भी इनलोगों से मिलकर गए हैं.

उन्होंने बताया है कि सरकार उनके साथ है और सबकी रिहाई के लिए काम कर रही है. गांव के सबलोग इस समय पीड़ित परिवार के साथ खड़े हैं.

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Image caption अफ़गानिस्तान में अगवा सात लोगों में से चार झारखंड के हैं

बगोदर के तीन लोगों का अपहरण

प्रमिला देवी के पति के अलावा बगोदर प्रखंड के दो और टेक्निशियंस का अफगानिस्तान में अपहरण किया गया है.

प्रवासी मज़दूरों के लिए काम कर रहे 'प्रवासी ग्रुप' के सिकंदर अली ने बीबीसी को बताया कि अपह्त लोगों में से दो लोग बगोदर प्रखंड के घाघरा गांव के रहने वाले हैं, जबकि चौथे शख्स हज़ारीबाग ज़िला के टाटी झरिया प्रखंड के बेडम गांव का निवासी हैं.

सिकंदर अली ने बीबीसी से कहा, "यह छह लोगों का ग्रुप था, इनमें से दो लोग अभी काबुल में सुरक्षित हैं. उनलोगों ने ही सबके परिजनों को फ़ोन कर इस घटना की जानकारी दी थी. मैंने जब इनके परिजनों से बातचीत की, तो पता चला कि उन्हें रविवार की शाम ही अपहरण का पता चल गया था."

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बीबीसी को फ़ोन

इनमें से एक किशुन महतो ने कल काबुल से फ़ोन पर बीबीसी से अपहरण की कहानी साझा की थी. उन्होंने मुझे बताया था कि वहां अपह्त छह भारतीय लोगों में से चार झारखंड के हैं जबकि बिहार और केरल के एक-एक.

ये सबलोग बागलान प्रोविंस की राजधानी पुल-ए-कुम्हरी से 20 किलोमीटर दूर एक पावर प्रोजेक्ट में काम कर रहे थे. यह प्रोजेक्ट भारतीय उद्योगपति हर्ष गोयनका के स्वामित्व वाले 'केइसी इंटरनेशनल' को मिला हुआ है.

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विदेश मंत्री से बातचीत

इस बीच कोडरमा के सांसद और भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र राय और बगोदर के विधायक नागेंद्र महतो ने अपहृत लोगों के परिजनों से बातचीत की. सासंद रवींद्र राय ने कहा कि उन्होंने विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से इस मुद्दे पर बातचीत की है.

इसके बावजूद उनलोगों की हालत ख़राब है, जिनके परिजनों का अपहरण कर लिया गया है.

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परिजनों का मन अशांत

इस गांव की मलिया देवी और चमेली देवी ने रविवार की शाम के बाद से ठीक से खाना नहीं खाया है. इन दोनों ने बीबीसी से कहा कि उन्हें अपने पतियों की सकुशल रिहाई का इंतज़ार है.

चमेली देवी के भाई इंद्रदेव महतो अपने बहनोई के अपहरण की सूचना मिलने के बाद घाघरा आ गए हैं ताकि बहन के साथ रहकर उन्हें हिम्मत दिला सके.

लगभग यही हालत बेडम गांव की पेमिया देवी की है. वे अपनी पांच बेटियों के साथ अपने पति की रिहाई का इंतज़ार कर रही हैं.

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प्रवासी निदेशालय की मांग

वहीं, बगोदर के पूर्व विधायक और माले नेता विनोद सिंह ने कल ही सभी अपहृतों के परिजनों से मुलाकात की थी. उन्होंने कहा कि क्योंकि झारखंड के काफी लोग विदेशों में नौकरी करने जाते हैं. इनमें से ज़्यादातर ग़रीब-मजदूर हैं. लिहाजा, झारखंड सरकार को ऐसे मजदूरों की ट्रैकिंग और उनकी सुरक्षा के लिए अलग प्रवासी निदेशालय का गठन करना चाहिए. क्योंकि, अक्सर हमें ऐसी ख़बरें मिलती हैं कि कंपनी मालिकों ने मजदूरों को बंधक बना लिया या उनका पैसा रोक लिया.

यह पहली बार है जब हमारे लोगों का अपहरण हुआ है और इसमें कथित तौर पर तालिबान का हाथ होने की आशंका है.

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मुख्यमंत्री का ट्वीट

मुख्यमंत्री रघुवर दास ने भी इस बावत ट्वीट किया है.

उन्होंने लिखा है, 'अगवा किए गए सभी भाइयों की रिहाई के लिए केंद्र सरकार प्रयासरत है. हमें उम्मीद है कि जल्द ही हमारे सभी भाई सकुशल वापस आएंगे. मुश्किल की इस घड़ी में सिर्फ़ झारखंड ही नहीं पूरे देश की जनता आपके साथ है और अपने बेटों की सकुशल वापसी के लिए प्रार्थना कर रही है.'

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