पश्चिम बंगाल: चुनावी हिंसा में सात की मौत, कई घायल

  • 14 मई 2018
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पश्चिम बंगाल में सोमवार को पंचायत चुनावों के लिए होने वाले मतदान के दौरान बड़े पैमाने पर हुई हिंसा के चलते कम से कम सात लोगों की मौत हो गई है.

इस हिंसा में दो दर्जन से ज्यादा लोगों के घायल होने की भी सूचना है.

राज्य के विभिन्न हिस्सों से हिंसक झड़पों, वोटरों को धमकाने और बूथ कैप्चरिंग के आरोप सामने आ रहे हैं.

भाजपा ने सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस पर जगह-जगह आतंक, हिंसा फैलाने और बूथ कैप्चरिंग का आरोप लगाया है.

लेकिन तृणमूल कांग्रेस ने इन आरोपों का खंडन किया है. पुलिस ने राज्य के विभिन्न हिस्सों में होने वाली हिंसा के दौरान पांच लोगों की मौत की पुष्टि की है.

हालांकि पुलिस ने ये नहीं बताया है कि मरने वालों का किस राजनीतिक पार्टी से संबंध था. दोपहर एक बजे तक औसतन 41.51 फीसदी वोट पड़े थे.

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Image caption हिंसा की ये स्थित तब है जब सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस 34 फीसदी सीटें निर्विरोध जीत चुकी है

सबसे हिंसक चुनाव

राजनीतिक पर्यवेक्षकों ने इस बार के पंचायती चुनाव को हाल के सालों का सबसे हिंसक चुनाव करार दिया है.

राज्य सरकार, तृणमूल कांग्रेस, भाजपा, माकपा, कांग्रेस और राज्य चुनाव आयोग के बीच चली लंबी कानूनी लड़ाई के बाद सोमवार को पंचयात चुनावों के लिए मतदान हो रहा है.

इससे पहले नामंकन दाखिल करने की प्रक्रिया के दौरान होने वाली हिंसा में भी विभिन्न राजनीतिक दलों के कम से कम 12 कार्यकर्ता और समर्थक मारे गए थे.

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हिंसा की ये स्थित तब है जब सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस 34 फीसदी सीटें निर्विरोध जीत चुकी हैं.

साल 2013 में पांच चरणों में हुए पिछले पंचायत चुनावों के दौरान 21 लोग मारे गए थे.

दक्षिण चौबीस परगना के कुछ इलाकों में कथित तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने एक स्थानीय टीवी चैनल के पत्रकारों पर हमला कर उनकी कार में तोड़-फोड़ की.

इस हमले में पांच पत्रकार घायल हो गए हैं.

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तृणमूल पर उठते सवाल

राज्य के पुलिस महानिदेशक सुरजीत कर पुरकायस्थ ने बताया, "कुछ इलाकों से हिंसा के दौरान पांच लोगों के मरने की खबरें मिली हैं. उन मामलों की जांच की जा रही है."

मरने वालों में दक्षिण 24-परगना जिले के एक माकपा नेता और उसकी पत्नी भी शामिल हैं. इस मामले में तृणमूल कांग्रेस पर उंगलियां उठ रही हैं.

इस दंपती को रविवार देर रात उनके घर में ही कथित रूप से जला कर मार दिया गया.

उनके परिजनों का आरोप है कि तृणमूल कांग्रेस समर्थकों ने रविवार रात घर में आग लगा दी.

सुंदरबन तटीय पुलिस ज़िले के एसपी तथागत बसु ने इस दंपती के आग से जल कर मरने की पुष्टि की है.

उन्होंने बताया कि इस मामले की जांच की जा रही है. फ़ॉरेंसिक विशेषज्ञ मौके पर पहुंच गए हैं.

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Image caption साल 2013 में पांच चरणों में हुए पिछले पंचायत चुनावों के दौरान 21 लोग मारे गए थे (फ़ाइल फ़ोटो)

मतदान केंद्र के बाहर बम विस्फोट

माकपा के जिला सचिव शमिल लाहिड़ी दावा करते हैं, "तृणमूल कांग्रेस के गुंडों ने देवब्रसाद दास और उ्नकी पत्नी उषा के साथ मारपीट करने के बाद घर में बंद कर आग लगा दी."

लेकिन स्थानीय तृणमूल कांग्रेस विधायक और मंत्री मंटू पाखिरा ने इन आरोपों को निराधार बताया है. वह कहते हैं, "आग शायद सार्ट सर्किट से लगी हो."

दक्षिण दिनाजपुर जिले के तपन इलाके में एक मतदान केंद्र के बाहर बम विस्फोट में घायल चार लोगों में से एक ने बाद में अस्पताल में दम तोड़ दिया.

इसके अलावा मुर्शिदाबाद, नदिया, उत्तर चौबीस परगना, कूचबिहार जिलों से भी हिंसा और बैलट बॉक्सों को लूटने की खबरें आई हैं.

मुर्शिदाबाद में बम फटने से भाजपा के एक कार्यकर्ता की मौत की खबर है. नदिया जिले में गोली लगने से एक तृणमूल कांग्रेस समर्थक की मौत हो गई.

दक्षिण 24-परगना जिले में भी एक तृणमूल समर्थक आरिफ गाजी की गोली लगने से मौत हो गई.

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Image caption ये पुरानी तस्वीर है. पश्चिम बंगाल के विभिन्न हिस्सों से हिंसक झड़पों, वोटरों को धमकाने और बूथ कैप्चरिंग के आरोप सामने आ रहे हैं. (फ़ाइल फ़ोटो)

पुलिस का लाठीचार्ज

कूचबिहार में उत्तर बंगाल विकास मंत्री रबींद्रनाथ घोष ने मतदान केंद्र से बाहर एक व्यक्ति को थप्पड़ मार दिया.

टीवी पर फुटेज के प्रसारण के बावजूद उन्होंने थप्पड़ नहीं मारने का दावा किया है.

दक्षिण 24-परगना के भांगड़ इलाके में दो गुटों के बीच होने वाली झड़प को रोकने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा और आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े.

इसबीच, तृणमूल कांग्रेस महासचिव पार्थ चटर्जी ने कहा है, "हिंसा की छिटपुट घटनाओं के अलावा मतदान शांतिपूर्ण तरीके से हो रहा है."

उन्होंने बताया कि पुलिस प्रशासन हिंसा पर काबू पाने के लिए पूरी तरह मुस्तैद है.

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