कर्नाटक विधानसभा चुनाव: अब सत्ता की चाबी है जिनके पास

  • 16 मई 2018
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कर्नाटक विधानसभा चुनावों के नतीजों के बाद तस्वीर लगभग साफ़ हो गई है.

चुनाव नतीजों और रुझानों के मुताबिक बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बन कर ज़रुर उभरी है, लेकिन बहुमत के आंकड़े से दूर है. दूसरे नंबर पर कांग्रेस है और तीसरे नंबर पर जेडीएस है.

लेकिन अगर नतीजे फंसते हैं तो कर्नाटक का भविष्य राज्यपाल के हाथों तय होगा.

राज्य में सरकार किसकी बनेगी ये उनके उस फैसले पर निर्भर करेगा, कि किसे वो आमंत्रित करते हैं.

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कर्नाटक के राज्यपाल 80 साल के वजुभाई वाला ही ऐसी स्थिति में कमान संभाल रहे हैं.

कौन हैं वजुभाई वाला?

जिस समय देश के मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गुजरात के मुख्यमंत्री हुआ करते थे वाजुभाई वित्तमंत्री थे. बतौर मुख्यमंत्री मोदी के 13 साल के कार्यकाल में वजुभाई 9 साल तक इस महत्वपूर्ण पद पर रहे. साल 2005-2006 के बीच वजुभाई राज्य में बीजेपी प्रमुख भी रहे.

वजुभाई के नाम एक रिकॉर्ड ये भी है कि वो एक अकेले ऐसे वित्तमंत्री रहे जिन्होंने 18 बार राज्य का बजट पेश किया.

उनकी गिनती उन कुछ नेताओं में भी की जाती है जो गुजरात में सत्ता हस्तांतरण (केशुभाई पटेल से नरेंद्र मोदी) होने के बाद भी वजूद में बने रहे. इसकी एक बड़ी वजह ये भी रही कि वजुभाई उस वक्त वित्तमंत्री थे, जिन्होंने 2001 में मोदी के पहले विधानसभा चुनाव के लिए अपनी राजकोट की सीट छोड़ दी थी.

वजुभाई राजकोट के एक व्यापारी परिवार से ताल्लुक रखते हैं. स्कूल के समय में ही वो आरएसएस से जुड़ गए थे. 26 साल की उम्र में वो जनसंघ से जुड़े और उसके बाद बहुत जल्द ही वे केशुबाई के क़रीबी हो गए. वे राजकोट के मेयर भी रहे.

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1985 में पहली बार उन्होंने विधानसभा चुनावों के लिए नामांकन दाख़िल किया. इस सीट से वो सात बार जीते.

समय-समय पर वजुभाई पर आरोप भी लगते रहे. उन पर आरोप लगे कि राजकोट में बड़े बिल्डरों से संपर्क के चलते उनकी भी रियल-स्टेट संपत्ति बढ़ रही है, लेकिन इन आरोपों का उनके व्यक्तित्व पर कोई असर नहीं पड़ा.

वजुभाई को उनके विधानसभा क्षेत्र में मज़ेदार और जादुई भाषणों केलिए जाना जाता है. उन्हें लोगों की भीड़ जुटाने में माहिर समझा जाता है. उनकी छवि एक बेहद सामाजिक व्यक्ति के तौर पर है जो दोस्तों-रिश्तेदारों और दूसरे सामाजिक समारोहों में शिरकत करना पसंद करते हैं.

इन सबसे इतर वजुभाई अपने कुछ बयानों के चलते विवादों में भी रहे.

मैसूर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने लड़कियों को फ़ैशन से दूर रहने की सलाह दी थी और कहा था कि कॉलेज फैशन करके आने की जगह नहीं है. उनके इस बयान पर काफी हंगामा बरपा था.

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