कर्नाटक का खेल क्या है और खिलाड़ी कौन-कौन हैं?

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राजनीति बड़ी निर्दयी होती है और उसमें भी चुनावी राजनीति सबसे ज़्यादा.

अंकों का खेल इतना मारक है कि आठ सीटों की कमी ने भाजपा को कुर्सी से दूर-सा कर दिया है और कल तक दुश्मन बनकर खेल रहे कांग्रेस और जनता दल-सेक्युलर पलों में दोस्त बन गए.

मंगलवार सवेरे 8 बजे वोटों की गिनती शुरू हुई और कई टीवी चैनलों ने 8.05 बजे होते-होते कांग्रेस की बढ़त दिखाई. 9-9.30 बजे तक असली नतीजे आने शुरू हुए और कांग्रेस-भाजपा के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली.

फिर धीरे-धीरे नतीजे/रुझान भाजपा के पक्ष में जाते दिखे और एक बार उसके खाते की सीटें 222 में से 122 तक पहुंच गईं.

दिल्ली से लेकर बंगलुरु तक भाजपा दफ़्तरों में जश्न शुरू होने लगा. मिठाइयां बांटी जाने लगीं, गुलाल उड़ने लगे.

कैसे बदलता रहा मूड?

लेकिन वक़्त भी क्या-क्या खेल दिखाता है. भाजपा नेताओं के चेहरों पर मुस्कुराहट अभी ठीक से ठहरी भी नहीं थी कि सीटों की संख्या बदलने लगी और वही मुस्कुराहट घर बदलकर कांग्रेस-जनता दल (एस) के पास चली गई.

नतीजे आने से पहले किंगमेकर बनने की उम्मीदें पालने के बाद नेपथ्य में जाने वाले एच डी देवगौड़ा और कुमारस्वामी को अचानक एहसास हुआ कि वो किंग भी बन सकते हैं.

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सीटों की आख़िरी संख्या कुछ इस तरह रही: भाजपा 104, कांग्रेस 78, जनता दल-एस 38 (बसपा की 1 सीट शामिल) और अन्य 2.

जिस वक़्त टीवी स्क्रीन पर सीटों की संख्या बदल रही थी, पार्टी दफ़्तरों और नेताओं के घरों में असली खेल शुरू हो चुका था.

चुनावी प्रचार अभियान में जिस जनता दल-एस को राहुल गांधी भाजपा की बी टीम बता रहे थे, कांग्रेसी नेता न सिर्फ़ इसी पार्टी की तरफ़ दौड़े, बल्कि उसके नेता को तुरंत मुख्यमंत्री बनाने पर भी राज़ी हो गए.

खेल कब शुरू हुआ?

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222 सीटों की विधानसभा में महज़ 38 सीटें हासिल करने वाले कुमारस्वामी अब मुख्यमंत्री पद के दावेदार हैं. लेकिन ये सब हुआ कैसे?

दरअसल ये खेल वोट की गिनती शुरू होने से पहले का है. मंगलवार से दो दिन पहले रविवार को कांग्रेसी नेता सिद्धारमैया ने कहा कि वो दलित मुख्यमंत्री के लिए सीट खाली करने को तैयार हैं.

ये बयान सीधे तौर पर संकेत था कि संख्याबल अगर कांग्रेस के खाते में नहीं आया तो वो भाजपा का रास्ता रोकने के लिए ताज जनता दल-एस के सिर पर भी रख सकती है. और यही हुआ.

कांग्रेस ने कुमारस्वामी को बिना शर्त समर्थन देने का ऐलान किया और दोनों दल मिलकर राज्यपाल के पास पहुंचे. उनसे ठीक पहले भाजपा भी दावा लेकर पहुंच गई.

लेकिन भाजपा की मुश्किल ये है कि उसके पास 8 विधायक कम हैं और ये कमी पूरी करने लायक सीटें इस बार निर्दलीयों के पास भी नहीं हैं. कांग्रेस-जनता दल (एस) ने मौका ताड़ लिया.

कांग्रेस-भाजपा के सिपहसालार कौन?

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नतीजों के बाद चली उठापटक में कुमारस्वामी जब राज्यपाल से मिलने पहुंचे तो उनके साथ कांग्रेस के दिल्ली में दिखने वाले नेता गुलाम नबी आज़ाद, अशोक गहलोत और मल्लिकार्जुन खड़गे थे.

मंगलवार रात कांग्रेसी नेताओं ने बंगलुरु के होटल में देवगौड़ा और कुमारस्वामी से मुलाक़ात की जहां आज़ाद भी ठहरे हुए थे. बताया जाता है कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डी शिवकुमार भी होटल में मौजूद थे.

कांग्रेस की तरफ़ से जहां सोनिया गांधी-राहुल गांधी ने आज़ाद, गहलोत और खड़गे को ज़िम्मा सौंपा है, वहीं दूसरी तरफ़ भाजपा की तरफ़ से मोर्चा संभालने वालों में बी एस येदियुरप्पा के अलावा अनंत कुमार और प्रकाश जावड़ेकर हैं.

इनके अलावा भाजपा ने जे पी नड्डा और धर्मेंद्र प्रधान को भी रवाना किया है.

ये सभी नेता बंगलुरु में हैं और पल-पल पर नज़र रखे हुए हैं और अमित शाह से लगातार बातचीत की जा रही है.

कांग्रेस ने कैसे चौंकाया?

इस पूरे खेल में सबसे अहम बनकर उभरी जनता दल-एस की तरफ़ से कमान कुमारस्वामी ने संभाला है. देवगौड़ा पर्दे के पीछे रहकर संपर्क बनाए हुए हैं.

जब सीटें खाते में दिख रही थीं तो भाजपा नेता खुश थे, लेकिन समीकरण बदलने पर मूड भी बदलता चला गया.

और इसमें शक नहीं है कि अतीत से सबक लेने वाली कांग्रेस ने अपनी तेज़ रफ़्तार और रणनीतिक मोर्चेबंदी से भाजपा को चौंका दिया है. दोपहर बाद जिस तरह से उसने तेज़ी से जनता दल-एस को लपका, भाजपा नेता सकते में आ गए होंगे.

इसकी एक वजह ये भी है कि कांग्रेसी नेता सिद्धारमैया के संबंध कुमारस्वामी से बेहद ख़राब रहे हैं, ऐसे में भाजपा का एक धड़ा ये मानकर बैठा था कि तमाम संभावनाओं के बावजूद इन दोनों का मिलना इतना आसान नहीं है.

नरेंद्र मोदी ने चुनाव अभियान में देवगौड़ा की तारीफ़ की थी और कहा था कि राहुल गांधी उनका सम्मान नहीं करते. अगले ही रोज़ राहुल ने जनता दल-एस को भाजपा की बी टीम बता दिया था.

मुख्यमंत्री कौन बनेगा?

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भाजपा को लग रहा था कि ये दोनों दल साथ नहीं आएंगे, लेकिन नतीजों ने सब कुछ बदल दिया.

कांग्रेस का मानना है कि भाजपा को इस राज्य में सरकार बनाने से रोकना बेहद ज़रूरी है और इसके लिए वो किसी भी हद तक त्याग करने को तैयार है.

बी एस येदियुरप्पा शुरुआत में दिल्ली रवाना होने वाले थे, लेकिन जब अंकों का गणित बिगड़ा तो बंगलुरु में ही रुक गए.

ताज़ा ख़बर है कि बी एस येदियुरप्पा को भाजपा विधायक दल का नेता चुन लिया गया है और कुमारस्वामी को जनता दल-एस का.

लेकिन इनमें से मुख्यमंत्री की कुर्सी तक कौन पहुंचेगा और क्या उस कुर्सी पर चंद दिनों से ज़्यादा बना रहेगा, इसके बारे में पता चलने में कुछ वक़्त लगेगा.

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