आला अफ़सरों की नियुक्ति में संघ के दखल की तैयारी?

  • 24 मई 2018
मोदी इमेज कॉपीरइट Getty Images

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने मंगलवार को ट्वीट करके दावा किया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ यानी आरएसएस की पसंद के अधिकारियों को केंद्रीय सेवाओं में तैनात करने की योजना बना रहे हैं.

उन्होंने ये भी कहा है कि प्रधानमंत्री यूपीएससी की परीक्षाओं की रैंकिंग के आधार की जगह, अलग-अलग मानकों के आधार पर मेरिट-लिस्ट में फेरबदल करके ऐसा करना चाह रहे हैं.

UPSC 2017: परचम लहरा रहे हैं पूर्वोत्तर के छात्र

इमेज कॉपीरइट TWITTER/RAHULGANDHI

आख़िर क्या है पूरा मामला?

राहुल गांधी के ट्वीट में संलग्न पत्र के मुताबिक़, प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से सयुंक्त सचिव विजय कुमार सिंह ने भारत सरकार के कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग को एक पत्र लिखा है.

इस पत्र में विजय कुमार सिंह कहते हैं, "प्रधानमंत्री कार्यालय चाहता है कि आगे दिए गए सुझाव पर विचार किया जाए और वर्तमान वर्ष में ही इसके अमल के लिए ज़रूरी कदम उठाए जाएं."

पत्र में हाइलाइट की गई लाइनों में लिखा गया है, "ये देखा जाए कि क्या सिविल सर्विस एग्ज़ाम में पास होने वाले उम्मीदवारों को नौकरियां और काडर का आवंटन फ़ाउंडेशन कोर्स के बाद किया जाए. इस बात की व्यावहारिकता देखी जाए कि क्या सर्विस और काडर के आवंटन में उम्मीदवारों द्वारा सिविल सर्विस एग्ज़ाम में पाए गए अंकों और फ़ाउंडेशन कोर्स में किए गए प्रदर्शन को आधार बनाया जा सकता है या नहीं."

UPSC: इस माँ के लिए कितना मुश्किल था टॉप करना

यूपीएससी के लिए 22 लाख की नौकरी ठुकराई

इमेज कॉपीरइट Twitter/RahulGandhi
Image caption राहुल गांधी द्वारा ट्वीट किया गया पत्र

राहुल गांधी के इस ट्वीट के बाद सोशल मीडिया में सरकार के इस प्रस्ताव के ख़िलाफ़ विरोध देखा जा रहा है.

ट्विटर यूज़र विनय कुमार कहते हैं, "अगर पीएमओ का ये सर्कुलर असलियत बन जाता है तो अगर आपको यूपीएससी की परीक्षा में पहली रैंक मिलती है और आपका चरित्र उदारवादी और धर्मनिरपेक्ष है, इसके बाद भी आपको आईएएस का पद मिलने की बेहद कम संभावना है. और सर्विस तथा काडर आवंटन लाल बहादुर शास्त्री नेशनल एकेडमी ऑफ़ एडमिनिस्ट्रेशन में कार्यरत लोग तय करेंगे."

बदलने जा रही है यूपीएससी की परीक्षा

'हिंदी से यूपीएससी में ख़ास नुकसान नहीं'

इमेज कॉपीरइट Twitter/VinayGB

सोशल मीडिया पर ऐसे ही तमाम दूसरे ट्वीट्स देखने के बाद हमने कोशिश की है कि इस प्रस्ताव के मायने समझे जाएं और इसके दूरगामी परिणामों को समझने की कोशिश की जाए.

प्रस्ताव का मतलब क्या है?

लोकसेवा आयोग के पूर्व सदस्य पुरुषोत्तम अग्रवाल इस प्रस्ताव को समझाते हुए कहते हैं कि पहली बात ये है कि प्रधानमंत्री कार्यालय ने ये प्रस्ताव विभिन्न मंत्रालयों और काडर का नियंत्रण करने वाली संस्थाओं की राय जानने के लिए भेजा है.

प्रोफेसर अग्रवाल बताते हैं, "इसका मतलब ये है कि अभी यूपीएससी की परीक्षाओं के बाद जो काडर आवंटन होता है वो परीक्षा में प्रदर्शन के आधार पर बने मेरिट पर होता है. ये प्रस्ताव कह रहा है कि परीक्षा के बाद होने वाली ट्रेनिंग में जो अंक आते हैं, उन्हें भी काडर आवंटन का आधार बनाना चाहिए."

ऐसे में पहला सवाल ये उठता है कि क्या यूपीएससी के वर्तमान ढांचे में किसी तरह का राजनीतिक हस्तक्षेप किया जा सकता है.

यूपीएससी विवाद पर मोदी की उधेड़बुन

यूपीएससी: 'अंग्रेज़ी के आधार पर मेरिट नहीं'

इमेज कॉपीरइट Getty Images

लोकसेवा आयोग के पूर्व सदस्य प्रोफेसर पुरुषोत्तम अग्रवाल ऐसा नहीं मानते हैं. वो कहते हैं, "यूपीएससी के वर्तमान ढांचे में ये गुंजाइश बहुत कम है कि कोई सरकार उसमें अपने ढंग का राजनीतिक हस्तक्षेप कर सके."

देश भर से अलग-अलग समुदाय और क्षेत्रों से आने वाले लाखों करोड़ों उम्मीदवार यूपीएससी की परीक्षा देते हैं.

प्रस्ताव पारित हुआ को दूरगामी परिणाम क्या होंगे?

जेएनयू में लंबे समय तक पढ़ा चुके प्रोफेसर अग्रवाल इस सवाल पर काफी गंभीरता से कहते हैं, "इसके परिणाम बेहद चिंताजनक होंगे और सरकार को इसे वापस लेना चाहिए क्योंकि यूपीएससी की मेरिट एक बेहद कठिन परीक्षा के आधार पर बनती है. और ये परीक्षा अपनी गोपनीयता, निरपेक्षता और वस्तुनिष्ठता के कारण सम्मान का विषय रही है."

'गोरखपुर, नागपुर और दिल्ली के त्रिकोण में फंसा है 2019'

यूपीएससी: स्टील प्लांट यानी 'स्टील का पौधा'

इमेज कॉपीरइट TWITTER/INCINDIA

यूपीएससी से कैसे जुड़ी आरएसएस?

राहुल गांधी के ट्वीट के बाद कांग्रेस पार्टी के कई नेताओं ने केंद्र सरकार के ऊपर इस मुद्दे को लेकर हमला बोल दिया है.

कांग्रेस नेता शक़ील अहमद इस प्रस्ताव को बेहद ख़तरनाक मानते हैं. वो कहते हैं, "अभी मोदी जी को लग रहा है कि उनकी सरकार है और वो चाहेंगे तो समर्पित लोकसेवकों को अपने साथ कर लेंगे और इससे उनके चुनाव में फायदा होगा. लेकिन हम समझते हैं कि ये सोच गलत है."

"अभी जो पारदर्शी तरीका है उसमें कोई राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं है. इस प्रक्रिया में समाज के ग़रीब तबके से भी कई युवा सिविल सर्विस परीक्षा पास करते हैं जिनके पास राजनीतिक पहुंच होना मुश्किल है. लेकिन मोदी जी इस प्रक्रिया को राजनीतिक पहुंच से ख़राब करने की कोशिश कर रहे हैं."

इस मुद्दे को आरएसएस से जोड़े जाने पर शकील अहमद कहते हैं कि आम तौर पर देखा जाता है कि उम्मीदवार परीक्षा पास करने के बाद अपने गृह प्रदेश का काडर चाहते हैं, आम तौर पर टॉप रैंकिंग वाले अधिकारियों को ये सुविधा मिलती है. लेकिन अगर ऐसा होगा तो जो उनकी विचारधारा के प्रति समर्पित होने का दावा करेंगे, उन्हें ही ऐसी सुविधाएं मिलेंगी.

'मुझे गर्व है कि मैं आरएसएस का स्वयंसेवक हूं'

GROUND REPORT: संघ का 'राष्ट्रोदय', बीजेपी के मिशन 2019 की तैयारी?

इमेज कॉपीरइट TWITTER/INCINDIA

अभी तो सुझाव ही है- बीजेपी

बीजेपी नेता और प्रवक्ता नलिन कोहली ने राहुल गांधी जी के ट्वीट पर टिप्पणी करते हुए कहा कि राहुल गांधी जी काल्पनिक दुनिया में रहते हैं.

वह बताते हैं, "राहुल गांधी शायद विश्व के सबसे भ्रमित व्यक्तियों में से एक हैं. ये अभी एक सुझाव है, कोई निर्णय तो हुआ नहीं है. यूपीएससी इस पर फ़ैसला लेगी कि इस पर अमल करना है या नहीं करना है."

इसे आरएसएस से जोड़े जाने पर कोहली कहते हैं कि ये एक पत्र है जिसमें काडर आवंटन आदि की बात की गई है और इसमें कहीं भी आरएसएस शब्द दिखाई नहीं पड़ता है, इसका आरएसएस से कोई लेना देना नहीं है.

राहुल बोले- भागवत का बयान शर्मनाक, संघ की सफाई

'कश्मीर को पाकिस्तान नहीं आरएसएस से ख़तरा'

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए