वेदांता स्टरलाइट हिंसा: 'पुलिस ने सामने से गोली मारी'

  • 23 मई 2018
जान्सी

तमिलनाडु के तूतीकोरिन ज़िले में थेरसपुरम गांव के प्रवेश द्वार पर एक खोपड़ी मिली थी. ग्रामीणों का कहना है कि ये खोपड़ी जान्सी की थी.

मंगलवार को तूतीकोरिन में वेदांता ग्रुप की कंपनी स्टरलाइट कॉपर के ख़िलाफ़ विरोध-प्रदर्शन में जान्सी शामिल नहीं हुई थीं.

चश्मदीदों कहना है कि 48 साल की जान्सी अपनी बहन के घर से लौट रही थीं तभी गोली लगने से उनकी मौत हो गई. थेरसपुरम मछुआरों का गांव है. तूतीकोरिन से इस गांव की दूरी मुश्किल से दो किलोमीटर है. ग्रामीणों का कहना है कि घटना के बाद गांववाले अब भी सदमे में हैं.

सुधाकर (बदला हुआ नाम) ने कहा, "10 मिनट के भीतर जान्सी ज़मीन पर थीं. पुलिस की एक गाड़ी आई और उसमें चार लोग सवार थे. उन्होंने जान्सी को कुत्ते की तरह गाड़ी में खींच लिया था." सुधाकर इस बात को बताने में डर रहे थे कि कहीं उन्हें इसका खामियाज़ा न भुगतना पड़े.

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विरोध की शुरुआत

स्टरलाइट कॉपर के ख़िलाफ़ विरोध-प्रदर्शन मंगलवार सुबह उग्र हुआ था. ग्रामीणों का कहना है कि प्रदर्शनकारी जब शाम में गांव लौट रहे थे तो पुलिस ने गोली चलाई थी. ग्रामीणों का यह भी कहना है कि जान्सी के साथ एक युवक भी मारा गया है. जान्सी के 50 वर्षीय पति अब भी सदमे में हैं और वो किसी से बात करने की स्थिति में नहीं हैं.

जान्सी के रिश्तेदार जॉनसन ने कहा, "हम सभी गांव लौट रहे थे. उसी दौरान जॉनसन अपनी पत्नी जान्सी को खोजते मिले. जब हमने पड़ोसियों से पूछना शुरू किया तो चश्मदीदों ने उनकी मौत की बात बताई. हमें पता चला कि जान्सी का शव स्थानीय सरकारी अस्पताल में रखा हुआ है. जान्सी के शव के कुछ हिस्से ग़ायब थे."

जॉनसन का कहना है कि जान्सी के शव में ज़ख़्म देखने से साफ़ पता चल रहा था कि उन्हें नज़दीक से गोली मारी गई थी. उन्होंने बताया कि वो ग्रामीणों के साथ शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे थे. जॉनसन का कहना है कि जान्सी तो प्रदर्शन में भी शामिल भी नहीं हुई थीं.

ग्रामीणों का सवाल है कि आख़िर जान्सी को गोली क्यों मारी गई?

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कई लोग गिरफ़्तार, कई ग़ायब

ग्रामीणों का कहना है कि पुलिस वाले गांव से लोगों को ज़बर्दस्ती उठाकर ले गए थे. इसी गांव के राजा (बदला हुआ नाम) ने बताया, "हमारे गांव से कई लोग ग़ायब हैं. हमें सूचना मिली है कि कई लोगों को पुलिस स्टेशन पर रखा गया है. हम लोग डरे हुए हैं कि पुलिस उन्हें मारेगी. हमने शांतिपूर्ण तरीक़े से प्रदर्शन किया था पर पुलिस ने हिंसक तरीक़ों को आज़माया."

तमिलनाडु पुलिस के डीजी टीके राजेंद्रन का कहना है कि थेरसपुरम गांव में रोड रोको और पत्थरबाज़ी रोकने के लिए गोली चलाई गई थी.

उन्होंने कहा, "ग्रामीणों ने सड़क को बंद कर दिया था. इसके बाद पत्थरबाज़ी होने लगी. सार्वजनिक संपत्तियों को भी नुक़सान पहुंचाया जा रहा था. चेतावनी के बाद भी लोग सुनने को तैयार नहीं थे. पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए गोलीबारी की थी."

लेकिन गांव वालों की दलील है कि अगर पुलिस गोली चलाने से पहले चेतावनी उचित तरीक़े से जारी करती को जान्सी की जान नहीं जाती. ग्रामीणों का कहना है कि जान्सी की मौत केवल एक परिवार का नुक़सान नहीं है बल्कि पूरे गांव का नुक़सान है.

अब तक 11 लोगों की मौत

दूसरे दिन लगातार जारी विरोध प्रदर्शनों के कारण तमिलनाडु के तूतीकोरिन, तिरुनेलवेली और कन्याकुमारी जिले में पांच दिनों के लिए (23 तारीख़ से ले कर 27 तारीख तक) टेलिकॉम सेवाएं बंद कर दी गई हैं.

यहां दूसरे दिन भी पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुईं हैं. पुलिस के प्रदर्शनकरियों पर गोलियां चलाने और लाठीचार्ज करने की ख़बरें मिल रही हैं.

बताया जा रहा है अब तक हिंसा में 11 लोगों की मौत हो गई है और कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं. हालांकि सरकार की तरफ़ से अभी मृतकों की संख्या की पुष्टि नहीं हुई है.

बताया जा रहा है कि मृतकों के परिजनों ने पोस्टमॉर्टम के बाद शवों को लेने से इनकार कर दिया था और पुलिस के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन किया, जिसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज किया था.

इस बीच जिले के कलेक्टर वेंकटेश का स्थानातंरण कर दिया गया है और उनके स्थान पर तिरुनेलवेली में काम कर रहे संदीप नंदुरी को बतौर ज़िला कलेक्टर तूतीकोरिन में नियुक्त किया गया है.

स्टरलाइट क्या है?

'वेदांता' दुनिया की सबसे बड़ी खनन कंपनियों में से एक है. इसके मालिक बिहार के पटना में जन्मे अनिल अग्रवाल हैं.

अनिल अग्रवाल ने मुबंई में 'वेदांता' नाम से एक कंपनी बनाई जिसे उन्होंने लंदन स्टॉक एक्सचेंज में रजिस्टर्ड कराया. स्टरलाइट वेदांता समूह की ही एक कंपनी है.

स्टरलाइट तमिलनाडु के तूतीकोरिन और सिलवासा (केंद्र शासित प्रदेश दादरा नागर हवेली की राजधानी) में ऑपरेट करती है. तूतीकोरिन वाले कारखाने में हर साल चार लाख टन तांबे का उत्पादन होता. साल 2017 में इस कंपनी का टर्नओवर 11.5 अरब डॉलर था.

Image caption हिंसा में कामराज को चोटें आई हैं. वो फिलहाल अस्पताल में हैं.

विरोध प्रदर्शन कब शुरू हुए?

साल 1992 में महाराष्ट्र उद्योग विकास निगम ने रत्नागिरि में स्टरलाइट लिमिटेड को 500 एकड़ ज़मीन का आबंटन किया.

बाद में स्थानीय लोगों ने परियोजना का विरोध किया जिसे देखते हुए राज्य सरकार ने इस मुद्दे पर जांच के लिए एक कमिटी बना दी.

कमिटी ने 1993 में अपनी रिपोर्ट दी और इसके आधार पर ज़िला अधिकारी ने कंपनी को उस इलाके में निर्माण कार्य रोकने का आदेश दिया. बाद में यही फ़ैक्ट्री महाराष्ट्र से तमिलनाडु शिफ़्ट कर गई.

पर्यावरणविद नित्यानंद जयरामण बताते हैं, "साल 1994 में तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इस फ़ैक्ट्री को नो ऑब्जेक्शन सर्टिफ़िकेट जारी किया था."

"बोर्ड ने कंपनी से पर्यावरण पर पड़ने वाले इसके असर के बारे में जांच करने को कहा था. बोर्ड ये चाहता था कि फ़ैक्ट्री मन्नार की खाड़ी से 25 किलोमीटर दूरी पर लगाई जाए."

"लेकिन इसके लिए स्टरलाइट कंपनी को पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव की टेस्टिंग करने की ज़रूरत थी. अभी ये प्लांट मन्नार की खाड़ी से 14 किलोमीटर दूर स्थित है."

कंपनी पर मुक़दमे

नेशनल ट्रस्ट ऑफ़ क्लीन इन्वाइरनमेंट, एमडीएमके नेता वाइको और कम्युनिस्ट पार्टियों ने फ़ैक्ट्री के ख़िलाफ़ मुक़दमे दर्ज करा रखे हैं.

इन लोगों का कहना है कि स्टरलाइट की ये फ़ैक्ट्री उस इलाके को प्रदूषित कर रही है. कंपनी पर ये भी आरोप है कि 1997 से 2012 के बीच फ़ैक्ट्री ने सरकार के साथ अपने समझौते को आगे नहीं बढ़ाया.

साल 2010 में हाई कोर्ट ने इस फ़ैक्ट्री को बंद करने का आदेश दे दिया. कंपनी ने हाई कोर्ट के फ़ैसले के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की.

सुप्रीम कोर्ट ने इस स्टरलाइट फ़ैक्ट्री पर 100 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया और कंपनी को अपना ऑपरेशन जारी रखने की इजाज़त दे दी थी.

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वो रिहाइशी इलाके में स्थित एक कॉपर फ़ैक्ट्री का विरोध कर रहे हैं.

नित्यानंद जयरामण सवाल करते हैं, "इस फ़ैक्ट्री ने पहले ही इस इलाके की हवा और ज़मीन से लेकर पानी तक को गंदा कर रखा है."

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