नशे के कारण लोग करते हैं यौन हिंसा: श्री श्री रविशंकर

  • 28 मई 2018
श्री श्री रवि शंकर

भारत में महिलाओं के ख़िलाफ़ बढ़ती यौन हिंसा की वजह श्री श्री रवि शंकर शराब और ड्रग्स मानते हैं. उनका कहना है कि शराब और ड्रग्स के नशे में लोग ऐसा करते हैं.

रविशंकर का दिल्ली की तिहाड़ जेल में एक शिविर चलता है. उनका कहना है कि उन्होंने महिलाओं के ख़िलाफ़ यौन हिंसा करने वाले क़ैदियों का अध्ययन कराया, जिसमें पता चला कि 95 प्रतिशत क़ैदी अपराध करने के समय नशे में थे."

बेंगलुरु के पास अपने आर्ट ऑफ़ लिविंग आश्रम में उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि महिला-विरोधी अत्याचार और बलात्कार जैसे अपराधों की रोकथाम के लिए नशाबंदी ज़रूरी है. उन्होंने कहा, "हम समझते हैं कि नशेबंदी के बिना महिलाओं के ख़िलाफ़ अत्याचार रोकना असंभव है."

ऐसे मामलों का क्या जो नशे की हालत में नहीं किए गए? वो कहते हैं, "वो बाक़ी पांच प्रतिशत में आते हैं."

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सुरक्षा के लिए क़ानून काफ़ी नहीं

अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला संघ की कविता कृष्णन नशे में हुए अपराध के तर्क को सही नहीं मानतीं. उनके अनुसार ये असल मुद्दे से फ़ोकस हटाने वाला एक तर्क है.

वो कहती हैं, "पहले तो तिहाड़ जेल के अंदर किया गया ये सर्वेक्षण किन सवालों पर आधारित है इसकी जानकारी सार्वजनिक नहीं है. लेकिन नशे की हालत में महिलाओं पर अत्याचार वाला तर्क सही मुद्दे से ध्यान को हटाने की एक कोशिश लगती है."

वो आगे कहती हैं कि इस तर्क से "शायद लोग ये कहना चाहते हैं कि ये क़ैदी महिलाओं के ख़िलाफ़ हिंसा के अपराधी नहीं हैं बल्कि शराब और नशीली दवाइयों के ख़ुद ही पीड़ित हैं."

श्री श्री रवि शंकर समाज में सुधार और मानसिकता में बदलाव पर भी ज़ोर देते हैं. उनके अनुसार देश में महिलाओं की सुरक्षा के लिए क़ानून काफ़ी नहीं है. वो कहती हैं, "शिक्षा और प्रशिक्षण होने चाहिए, जिसके ज़रिये हम इसको दूर कर सकते हैं."

सोशल वर्कर्स कहते हैं कि शराब पर पाबंदी लगाने से बलात्कार और महिलाओं के ख़िलाफ़ अन्य अपराध रोके नहीं जा सकते. उनका तर्क है कि गुजरात में शराब पर प्रतिबंध है, लेकिन वो पूछते हैं कि क्या वहां बलात्कार नहीं होते?

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हर 20 मिनट में एक बलात्कार

भारत में हर 20 मिनट पर एक बलात्कार होता है. राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की सब से ताज़ा रिपोर्ट (2016) के अनुसार 95 प्रतिशत अपराधी पीड़िता के जानने वाले होते हैं. ये बताना मुश्किल है कि इन में से कितने मामलों में अपराधी नशे में थे.

भारत में केवल 10 प्रतिशत रेप के मामले ही दर्ज हो पाते हैं. बदनामी के डर से पीड़ित और उनके परिवार वाले ख़ामोश रहने पर मजबूर होते हैं.

सामाजिक कार्यकर्ता कहते हैं कि कई रेप में नशा भी एक कारण हो सकता है, लेकिन सब से अहम वजह मर्दों की ये सोच है कि उन्हें कुछ नहीं होगा और ये कि महिलाओं पर उनका अधिकार है.

हाल ही में जम्मू के कठुआ ज़िले में 8 साल की बच्ची से बलात्कार और हत्या की बात सामने आई थी. हालांकि इसमें नशे जैसी कोई बात नहीं थी.

पुलिस ने ऐसा कोई बयान नहीं दिया है जिससे ये नतीजा निकाला जा सके कि नशे की हालत में सब कुछ हुआ था.

इस पर रविशंकर कहते हैं कि जो लोग इस बलात्कार और हत्या में शामिल थे या जिन्होंने इसका समर्थन किया वो दिमाग़ी तौर पर पागल हैं, "चाहे वो किसी भी पार्टी से संबंध रखते हों."

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सभी पेशे में ख़राब लोग मौजूद

रविशंकर के आश्रम की शाखाएं 150 से भी अधिक देशों में हैं जहाँ वो योग के ज़रिए शान्ति पहुंचाने का प्रयास करते हैं. उनके लाखों अनुयायी हैं.

हाल में देश के कुछ हाई प्रोफाइल धर्म गुरुओं ख़िलाफ़ बलात्कार के कांड भी सार्वजनिक हुए हैं और उन्हें सज़ा भी सुनाई गई हैं.

आसाराम और डेरा सच्चा सौदा के गुरमीत राम रहीम जैसे प्रभावशाली धर्म गुरुओं को बलात्कार के इलज़ाम में हुई सज़ा से गुरुओं की छवि पर बुरा असर पड़ा है.

इस पर रविशंकर कहते हैं कि ख़राब लोग सभी पेशे में हैं, "सीता का अपहरण रावण ने संन्यासी के वेश में किया ना? ऐसे कुछ डॉक्टर होते हैं जो गुर्दे चोरी करते हैं. ऐसे लोग तो होते ही हैं समाज में जो अपवाद होते हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में भी ऐसे लोग हैं जो झूठ लिखते हैं, पैसा लेते हैं तो इस तरह से आध्यात्मिक क्षेत्र में भी ऐसे लोग होते हैं."

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रविशंकर कई बार विवादों में फँस चुके हैं. उन पर 2016 में एक सांस्कृतिक कार्यक्रम में दिल्ली में यमुना को नुक़सान पहुंचाने का आरोप है.

रविशंकर दावा करते हैं कि उस स्थान पर अब हरियाली है और नुक़सान की बात ग़लत है.

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उनका कहना है कि कार्यक्रम का विरोध उनके ख़िलाफ़ एक साशिज़ थी. वो कहते हैं, "हमारा जब स्टेज लग गया तो किसी को लगा ये तो एक बहुत बड़ा कार्यक्रम है, इसको किसी तरह से रोको."

रविशंकर के मुताबिक़ यमुना के किनारे समारोह कराने के पीछे एक और कारण था और वो यमुना के प्रति ध्यान आकर्षित करने का.

वो कहते हैं, "यमुना इतनी प्रदूषित है कि हमने 2009 में इसकी सफ़ाई का कार्यक्रम शुरू कर इसके अंदर से 500 टन कचड़ा निकाला. हमारे स्वयंसेवकों ने 45 दिनों तक नदी की सफ़ाई की."

उनके अनुसार उनकी संस्था यमुना के साथ 35 अन्य नदियों की सफ़ाई का अभियान चला रही है.

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