कश्मीर का वो इलाका, जिसपर भारत-पाकिस्तान फिर आमने-सामने हैं

  • 28 मई 2018
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भारत ने पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर के गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र की स्वायत्ता कम करने के पाकिस्तान सरकार के आदेश पर कड़ा विरोध जताया है.

मोदी सरकार के चार साल पूरे होने पर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने मीडिया से बातचीत में पाकिस्तान पर 'कानून को नजरअंदाज' करने का आरोप लगाया है.

उन्होंने पाकिस्तान पर 'इतिहास से छेड़छाड़' करने का भी आरोप लगाया है.

गिलगित-बाल्टिस्तान पर पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा, "वो (पाकिस्तान) हमें इतिहास और कानून पढ़ाना चाहते हैं."

"मैं कहना चाहूंगी... जो देश खुद इतिहास को तोड़ता-मरोड़ता रहा हो, जो देश कानून-व्यवस्था में विश्वास नहीं रखता है, जो देश आतंकवाद फैलाता है, वो हमें सीख देने का काम न करे."

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भारत का विरोध

इससे पहले भारत ने रविवार को पाकिस्तान के उप-उच्चायुक्त को बुलाकर पाकिस्तान सरकार के 'गिलगित-बाल्टिस्तान ऑर्डर 2018' पर कड़ा विरोध जताया था.

रविवार को विदेश मंत्रालय के जारी किए गए प्रेस रिलीज़ में भारत ने पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर और उसके अंतर्गत आने वाले गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र को देश का अभिन्न अंग बताया है.

भारत ने कहा है कि इलाके की स्थिति में बदलाव करने का पाकिस्तान की किसी कार्रवाई का कानूनी आधार नहीं है और अगर वो ऐसा करता है तो ये पूरी तरह से अस्वीकार्य होगा.

पाकिस्तान ने भारत के इस विरोध को खारिज किया है और जवाब में कहा है कि भारत दुनिया का ध्यान भारत प्रशासित कश्मीर से हटाकर गिलगित-बाल्टिस्तान पर लाना चाहता है.

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क्या है गिलगित-बाल्टिस्तान ऑर्डर

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहिद खाकान अब्बासी ने 21 मई को एक नया आदेश जारी किया था, जिसके बाद पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर के गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र की स्वायत्ता में कटौती की गई है.

नए कानून ने 'गिलगित-बाल्टिस्तान सशक्तिकरण और स्वशासन आदेश 2009' की जगह ली है, जिसके तहत गिलगित-बाल्टिस्तान का स्थानीय परिषद खनिज, हाइड्रोपावर और पर्यटन संबंधित कानून बनाता था और इस पर फैसला लेता था.

अब ये फैसले गिलगित-बाल्टिस्तान की विधानसभा लेंगे. नए क़ानून के तहत अब इलाके के लोगों को पाकिस्तान के अन्य चार प्रांतों की तरह अधिकार हासिल होंगे.

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गिलगित-बाल्टिस्तान कैसे है अलग

पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर और गिलगित-बाल्टिस्तान दो अलग-अलग क्षेत्र हैं और इन दोनों क्षेत्रों की अपनी अलग-अलग विधायिकाएं हैं.

तकनीकी तौर पर ये पाकिस्तान का हिस्सा नहीं है. इसे मूल रूप से संघ शासित उत्तरी क्षेत्र कहा जाता था. इसका शासन सीधे इस्लामाबाद से संचालित होता रहा है.

साल 2009 में गिलगित-बाल्टिस्तान में अपनी विधानसभा बनाई गई थी.

ऐसा पाकिस्तान की एक योजना के तहत किया गया था ताकि इस क्षेत्र को एक संपूर्ण राज्य बनाया जा सके.

पाकिस्तान अपने नियंत्रण वाले इलाक़े को 'आज़ाद कश्मीर' कहता है और भारत पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर को देश का अभिन्न अंग मानता है.

गिलगित-बाल्टिस्तान इसी में है.

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इलाक़े में नए कानून का विरोध

पाकिस्तान सरकार के नए क़ानून का इलाके में विरोध हो रहा है. शनिवार को हुए विरोध प्रदर्शन में दर्जनों लोग घायल हो गए.

गिलगित बाल्टिस्तान विधानसभा और पाकिस्तान के विपक्षी दलों ने विधानसभा के बाहर नए क़ानून के खिलाफ नारे लगाए.

विधानसभा के बाहर विरोध प्रदर्शन उस वक्त शुरू हुआ जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहिद खाकान अब्बासी गिलगित-बाल्टिस्तान विधानसभा को संबोधित करने पहुंचे थे.

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इलाक़े का इतिहास

साल 1846 में जब डोगरा पूरी कश्मीर घाटी पर शासन करते थे तो उन्होंने गिलगित बाल्टिस्तान पर क़ब्ज़ा कर लिया था और इसे अपने साथ मिला लिया था.

साल 1947 में जब भारत-पाकिस्तान का विभाजन हुआ तो गिलगित-बाल्टिस्तान का मामला दोनों देशों के बीच अनिर्णीत रह गया.

कश्मीर पर तो दोनों देश दावा करते थे लेकिन गिलगित बलटिस्तान की व्याख्या नहीं की गई.

भारत कहता रहा है कि कश्मीर के साथ गिलगित और बाल्टिस्तान उसका इलाक़ा है तो इस वजह से पाकिस्तान भी इस मामले को नहीं सुलझा नहीं सका और इस इलाक़े को अपने संविधान के अंदर नहीं ला सका, क्योंकि अगर पाकिस्तान गिलगित बाल्टिस्तान को अपना हिस्सा बनाता है तो उसे इसे पांचवां प्रांत घोषित करना होगा.

क्या है पाकिस्तान का मक़सद

पाकिस्तान में चार प्रांत हैं- बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा, पंजाब और सिंध. सरकार के नए क़ानून को अब गिलगित-बाल्टिस्तान को पांचवां प्रांत बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है.

गिलगित-बाल्टिस्तान की सीमा चीन और अफ़ग़ानिस्तान से लगती है और यह चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे के मुख्य मार्ग पर स्थित है. चीन यहां अरबों डॉलर का निवेश कर रहा है.

आर्थिक गलियारे का मक़सद गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र में काराकोरम राजमार्ग का विस्तार करना है.

साथ ही इसमें औद्योगिक पार्क, विशेष आर्थिक क्षेत्र, पनबिजली परियोजना और रेलमार्ग का विस्तार भी शामिल है.

रिपोर्ट के मुताबिक़ चीन ने खुले शब्दों में चिंता जताई थी कि वह एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विवादित क्षेत्र में ऐसी परियोजनाओं पर अरबों डॉलर का निवेश नहीं कर सकता.

चीन आर्थिक गलियारा परियोजना से पीछे न हट जाए, इसलिए अब पाकिस्तान गिलगित बाल्टिस्तान के संवैधानिक दर्जे को बदलकर उसे एक प्रशासी क्षेत्र से एक पूर्ण प्रांत बनाना चाहता था और अब ये लग रहा है कि वो ऐसा ही करने में जुटा है.

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