ग्राउंड रिपोर्ट: दिल्ली में इतनी भयंकर आग लगी कैसे?

  • 30 मई 2018
मालवीय नगर घटनास्थल
Image caption ख़बर लिखे जाने तक किसी के हताहत होने की ख़बर नहीं थी

नई दिल्ली के मालवीय नगर में मंगलवार की शाम एक केमिकल फैक्ट्री पूरी रात धधकती रही.

आग पहले केमिकल फैक्ट्री में आए ट्रक में लगी, फिर धीरे-धीरे इसकी चपेट में फ़ैक्ट्री आ गई, जहां रबर, ज्वलनशील केमिकल और कार्टन थे.

तापमान अधिक होने से आग तेज़ी से फैलती गई और कुछ घंटों बाद इसने बाउंड्री से सटे संत निरंकारी स्कूल को भी अपनी चपेट में ले लिया.

चश्मदीदों का कहना है कि आग दोपहर 3.45 बजे ट्रक में लगी और इसे बुझाने में प्रशासन ने ढील बरती. वहीं, सरकार का कहना है कि घटना शाम पांच बजे घटी.

इसी इलाक़े की अंजुलिका इधर-उधर भाग रही हैं. जैसे-जैसे आग की लपटें आसमान छू रही थीं, अंजुलिका की धड़कनें तेज़ हो रही थीं.

सिर्फ़ अंजुलिका ही नहीं, दक्षिणी दिल्ली के मालवीय नगर में बीती रात उन सभी पड़ोसियों का यही हाल था, जिनका घर केमिकल फैक्ट्री के आसपास था.

Image caption अंजुलिका जैसे मालवीय नगर के कई निवासी रातभर परेशान रहे

अंजुलिका ने बीबीसी से कहा, "क़रीब चार बजे फायरब्रिगेड को कॉल किया था कि दो गाड़ी भेज दी जाए. एक से डेढ़ घंटे बाद गाड़ी आई. अगर समय पर गाड़ी आती तो आग इतनी नहीं फैलती."

इससे पहले अंजुलिका अपनी बात पूरी करतीं, उनके पास खड़ी एक महिला ने मेरा माइक ख़ुद की तरफ खींचा और कहने लगीं, "फ़ैक्ट्री में पेट्रोल है, केमिकल है और रबर है. वहां सिर्फ़ पानी से आग नहीं बुझाया जा सकता है. इसे बुझाने के लिए रेत की ज़रूरत है और सरकार को हेलिकॉप्टर का इंतज़ाम करना चाहिए."

अंजुलिका फिर से मेरा माइक खींचती हैं भर्राती आवाज़ में कहती हैं, "कितने लोग मर जाएंगे, हमारे घर टूट जाएंगे... हम कहां जाएंगे. कोई तो बता दे कि हम सुरक्षित हैं या नहीं. हमें घर छोड़कर जाना चाहिए या नहीं."

लाचार प्रशासन

घटनास्थल का मुआयना करने पहुंचे इलाक़े के विधायक सोमनाथ भारती ने कहा कि प्रशासन आग पर काबू पाने की पूरी कोशिश कर रहा है वायुसेना की मदद के लिए अनुरोध भी किया गया है.

उन्होंने बीबीसी से कहा, "आग ज्वलनशील पदार्थ में लगी है, इसलिए उस पर काबू पाने में परेशानी हो रही है. हमने वायुसेना से मदद मांगी है पर उन्होंने इसे सुबह चार बजे भेजने की बात कही है."

सोमनाथ भारती ने आगे कहा कि आग शाम क़रीब पांच बजे लगी और तब से प्रशासन उस पर काबू पाने की कोशिश कर रहा है.

स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह फ़ैक्ट्री अवैध रूप से चल रही थी. हालांकि इस सवाल पर सोमनाथ भारती ने कहा, "इसकी भी जांच कराई जाएगी कि यह फ़ैक्ट्री अवैध थी या नहीं और किसके आदेश पर चल रही थी."

मंगलवार को ही घटनास्थल से थोड़ी दूरी पर एक ऐसी ही फ़ैक्ट्री में आग लग गई थी, जिस पर समय रहते काबू पा लिया गया.

अंजुलिका कहती हैं, ''यहां सीलिंग चल रही है. कई दुकानें सील की जा चुकी हैं पर ये फैक्ट्रियां क्यों नहीं सील की गईं. क्या प्रशासन को यह अवैध फैक्ट्रियां नहीं दिखीं? अगर इसे सील कर दिया गया होता तो आज ये नौबत नहीं आती."

प्रदूषण का स्तर बढ़ा

जिस समय आग लगी थी, उस समय हवा की गति सामान्य थी. शाम को तेज़ हवा ने आग को फैलने में मदद की.

आग फैलते हुए संत निरंकारी स्कूल जा पहुंची, जिसकी बिल्डिंग को काफ़ी नुक़सान हुआ है. रात एक बजे आग की लपटें बढ़ती ही जा रही थीं.

आग की लपटें कई किलोमीटर दूर तक देखी जा रही थीं. आठ से नौ घंटे बाद भी आग पर काबू नहीं पाने की वजह से इलाक़े में प्रदूषण का स्तर काफी बढ़ गया था.

लोगों को सांस लेने में परेशानी हो रही थी और उनके शरीर और कपड़े काले हो रहे थे.

परेशानी ज़्यादा बढ़ने के बाद पुलिस की गाड़ियों से लोगों को घर की खिड़की और दरवाज़े को बंद रखने का ऐलान किया गया.

Image caption फ़ैक्ट्री की आग के कारण स्कूल की इमारत को नुकसान पहुंचा है

हताहत होने की ख़बर नहीं

ख़बर लिखे जाने तक आग से किसी के हताहत होने की सूचना नहीं थी. विधायक सोमनाथ भारती ने बताया कि करीब 60 दमकल की गाड़ियां मौक़े पर रात 11 बजे तक पहुंची थीं. बाद में सेना के बड़े टैंकर भी मंगवाए गए थे.

आग बुझाने के क्रम में दो कर्मी घायल हो गए थे, जिन्हें अस्पताल भेज दिया गया था.

प्रशासन आग पर समय रहते काबू पाने में असफल रहा. अव्यवस्था का आलम ये था कि केमिकल फैक्ट्री से रसायनों के बड़े-बड़े डब्बे क्रेन से निकालकर लोगों की भीड़ के बीच से ले जाए जा रहे थे.

लोगों का आरोप ये भी था कि गर्मी की वजह से उनके घर के सिलेंडर गर्म हो चुके थे और कभी भी फट सकते थे पर किसी ने भी उसे बाहर निकालने में मदद नहीं की.

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