शिलौंग में गुरुद्वारों को कोई नुक़सान नहीं: किरण रिजिजू

  • 3 जून 2018
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मेघालय की राजधानी शिलौंग में मामूली से विवाद के बाद भड़की हिंसा के कारण पिछले तीन दिनों से हालात काफी तनावपूर्ण बने हुए हैं.

दरअसल, गुरुवार को सरकारी बस में खलासी का काम करने वाले एक खासी युवक और पंजाबी लड़की के बीच कहासुनी हुई थी.

इस मामूली कहासुनी के दौरान दो पक्षों के लोगों ने एक दूसरे के साथ कथित मारपीट की. हालांकि बाद में स्थानीय पुलिस के समक्ष ये मामला निपटा लिया गया था.

लेकिन इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर किसी ने खासी युवक के मरने की खबर फैला दी.

इसके बाद बस चालक संस्था और कई स्थानीय संगठनों से जुड़े लोग पंजाबी कॉलोनी पहुंच गए और वहीं से दोनों पक्षों के बीच हिंसक झड़प शुरू हुई.

पूरे मामले पर केंद्रीय गृह राज्य मंत्री किरण रिजिजू ने कहा है कि गुरुद्वारे को किसी भी तरह का नुक़सान नहीं हुआ है.

रिजिजू ने कहा कि अफ़वाह फैलाने वालों से सतर्क रहने की ज़रूरत है.

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सात घंटों का कर्फ्यू

इस हिंसक झड़प के दौरान उग्र भीड़ द्वारा की गई पत्थरबाज़ी में पुलिस के कई लोग घायल हुए है.

इलाके में हिंसा, आगजनी और भारी तनाव के बाद शुक्रवार रात को सेना ने फ्लैग मार्च किया था. वहीं, शनिवार रात को प्रशासन ने शहर में सात घंटों का कर्फ्यू लगा दिया.

इससे पहले शहर के 14 इलाकों में अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लगाया गया था. इलाके में जारी हिंसा और तनाव को देखते हुए प्रशासन ने इंटरनेट सेवाओं को बंद कर दिया है.

पुलिस ने अबतक 10 लोगों को गिरफ्तार किया है. शिलौंग शहर के थेम ईयू मावलोंग इलाके के पंजाबी कॉलोनी में तकरीबन पांच सौ पंजाबी दलित परिवार बसे हुए हैं.

इन लोगों का कहना है कि हम दो सौ वर्षों से यहां पर है और इस मामूली विवाद को अब राजनीतिक रूप देकर हमें यहां से हटाने की कोशिश की जा रही है.

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मामला सुलझा लिया गया था...

इस विवाद के बढ़ाने का यही मुख्य कारण बताया जा रहा है.

पंजाबी कॉलोनी में बसे सनी सिंह ने बीबीसी को बताया, "घटना कुछ नहीं थी. सरकारी बस के एक खलासी ने हमारी समुदाय के एक लड़की के साथ छेडखानी की थी."

"और इस बीच थोड़ी मारपीट हो गई. लेकिन बाद में ये मामला पुलिस के सामने सुलझा लिया गया."

"लेकिन शाम को बस ऑपरेटर एसोसिएशन के कुछ लोग स्थानीय संगठनों से जुड़े लोगों के साथ हमारी कॉलोनी घुस आए और शोर-शराबा शुरू कर दिया."

"हमने पुलिस को खबर दी लेकिन इस बीच लोगों ने पत्थरबाजी शुरू कर दी."

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घटना के दिन से...

पंजाबी कॉलोनी में इस समय कैसे हालात हैं, इस सवाल पर सनी ने कहा, "अभी हालात काफी खराब है. हम घटना के दिन से रात को सो नहीं पाए हैं."

"हमने बच्चों और महिलाओं को गुरुद्वारा में रखा है और रात को पहरा देते है."

पंजाबी कॉलोनी को अवैध बताने के सवाल पर सोनू कहते हैं, "हमारे पूर्वजों को यहां बसे सौ साल से अधिक हो गया है."

"ब्रिटिश शासन के समय हमारे दादा-परदादाओं को यहां क्लीनर और सफाई कर्मी के तौर पर लाकर बसाया गया था. उस समय मेघालय राज्य ही नहीं बना था."

"कुछ भी हो जाए हम अपनी जगह नहीं छोडेंगे."

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Image caption भारतीय सेना भी हिंसा प्रभावित लोगों की मदद के लिए आगे आई है

दूसरी जगह बसाने का मुद्दा

इलाके में राज्य सरकार द्वारा मुहैया कराई गई सुरक्षा पर नाराज़गी जताते हुए सनी ने कहा, " हमला करने के लिए सैकड़ों की तादाद में भीड़ जमा होती है..."

"ऐसे में पांच-सात पुलिस वाले उनका सामना कैसे कर सकते हैं."

पंजाबी कॉलोनी की गुरुद्वारा समिति के महासचिव गुरुजीत सिंह कहते है, "पिछले कई वर्षों से हमें यहां से हटाने की साजिश चल रही है."

"यहां स्थानीय लोग हमें अवैध निवासी कहते है लेकिन हमारे पूर्वजों को यहां आकर बसे सैकड़ो साल हो गए."

"पिछले कुछ सालों से कई राजनेता हमें यहां से किसी दूसरी जगह बसाने की बात करते रहें है, लेकिन इसका नतीजा कुछ नहीं निकला."

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Image caption सेना की तरफ़ से हिंसा प्रभावित लोगों की मदद के लिए आश्रय और भोजन का प्रबंध किया जा रहा है

तत्काल गिरफ्तार करने की मांग

हिंसा से नाराज़ राज्य के प्रमुख छात्र संगठन खासी स्टूडेंट्स यूनियन (केएसयू) ने पंजाबी कॉलोनी के लोगों को 'अवैध निवासी' बताते हुए इसे खाली करवाने की मांग उठाई है.

केएसयू के महासचिव डोनाल्ड थबाह ने मीडिया के सामने कहा, "हम मांग करते हैं कि उस क्षेत्र (पंजाबी कॉलोनी) में अवैध बसने वालों को तुरंत बेदखल कर दिया जाए."

"पंजाबी लेन में बसे लोग हमेशा खासी लोगों के लिए परेशानी खड़ी करते रहे हैं."

केएसयू समेत शिलौंग के कई संगठन खासी लड़के पर हमला करने वाले लोगों को तत्काल गिरफ्तार करने की मांग कर रहे हैं.

इसके अलावा हिंसक झड़प में गिरफ्तार खासी प्रदर्शनकारियों को रिहा करने तथा घायलों को मुआवजा दिए जाने की मांग पर अड़े हुए है.

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मौजूदा स्थिति में सुधार

शनिवार को मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा ने अपने मंत्रियों के साथ कानून और व्यवस्था की स्थिति पर बात करने के लिए खासी समुदाय के वरिष्ठ लोगों और पंजाबी कॉलोनी के निवासियों के साथ मुलाकात की.

मुख्यमंत्री ने सभी पक्षों से शांति बनाए रखने और शिलॉन्ग में स्थिति सामान्य बनाने की अपील की है.

पूर्वी खासी हिल्स ज़िले के पुलिस अधीक्षक डेविस मराक के अनुसार मौजूदा स्थिति में सुधार हो रहा है, लेकिन पुलिस हिंसा फैलाने वालों पर कड़ी नजर रखे हुए है.

जिला प्रशासन ने शहर में पहले के मुकाबले तनाव कम होने की बात कही है लेकिन कई इलाकों में पंजाबी कॉलोनी को लेकर विरोध जारी है.

इस बीच रविवार सुबह शिलौंग पहुंचे पंजाब के पूर्व उप मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल ने पंजाबी कॉलोनी के लोगों से मुलाकात कर उन्हें सुरक्षा का भरोसा दिलाया है.

इसके बाद बादल ने मुख्यमंत्री संगमा के साथ भी इन हालात पर बैठक की.

इससे पहले पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने मेघालय में भड़की हिंसा पर चिंता व्यक्त करते हुए संगमा से बात की थी. 

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