चाचा चौधरी और चंपक से हिंदी सिखाकर लाखों कमाने वाली लड़की

  • 6 जून 2018
हिंदी सिखाने वाली लड़की इमेज कॉपीरइट Madhu Pal/BBC

भारत में जहां हर गली और चौराहे पर अंग्रेज़ी सिखाने के लिए कोचिंग सेंटर खुले हुए हैं, वहीं एक ऐसी लड़‍की भी है जो हिंदी की कोचिंग चलाकर लाखों कमा रही है.

दिल्ली की रहने वाली 26 साल की पल्लवी सिंह न केवल देश में आए विदेशियों को हिंदी सिखाती हैं बल्कि मॉडल, सिंगर, बॉलीवुड स्टार्स को भी हिंदी सीखने में मदद करती है.

उनकी ख़ासियत ये है कि वो चाचा चौधरी, पिंकी, चंपक, नंदन और प्रेमचंद की कहानियां सुनाकर लोगों को हिंदी सिखाती हैं.

यही उनके सफल होने का राज़ है. क़रीब पांच साल पहले उन्होंने हिंदी सिखाने का काम शुरू किया था और आज वो सेलिब्रिटी टीचर बन चुकी हैं.

इमेज कॉपीरइट Madhu Pal/BBC

क्या है पल्लवी का तरीका

पल्लवी का हिंदी सिखाने का स्टाइल बाकियों से थोड़ा हटके है. वो अपने स्टूडेंट के घर जाकर या किसी कैफ़े में कॉफ़ी की चुस्कियां लेते हुए मज़ेदार तरीके से हिंदी सिखाती हैं.

पल्लवी कहती है, "मैं अपनी क्लासेस में हास्य इस्तेमाल करती हूं ताकि मेरे विद्यार्थियों को पढ़ने में मज़ा आए. इसलिए मैं हिंदी कॉमिक चाचा चौधरी, पिंकी और चंपक पढ़ने को देती हूं. इन कहानियों में बहुत सरल शब्दों का इस्तेमाल किया जाता है और उनके साथ बने हुए चित्र क्या कह रहे हैं, इसे समझने में बहुमत मदद करते हैं."

वो आगे कहती हैं, "ये कॉमिक्स हमारी संस्कृति और पहनावे को भी दर्शाती हैं. उदहारण के तौर पर चाचा चौधरी की पगड़ी और उस पगड़ी से जुड़े मान सम्मान की बातें. पिंकी नाम के कॉमिक में पिंकी की माँ साड़ी पहनती हैं और घर की चीज़ों के बारे में बात करती है. ऐसी कई छोटी-छोटी बातें, जो हम अपने रोज़मर्रा की ज़िंदगियों में इस्तेमाल करते हैं, उन्ही बातों का ज़िक्र होता है इन कॉमिक्स में और जिसकी वजह से मेरे स्टूडेंट्स बोलचाल की भाषा सीख जाते हैं."

इमेज कॉपीरइट Madhu Pal/BBC

बॉलीवुड फ़िल्मों का सहारा

पल्लवी हिंदी सिखाने के लिए सिर्फ हिंदी कॉमिक्स ही नहीं बल्कि बॉलीवुड फ़िल्मों का भी सहारा लेती हैं.

वो अपने स्टूडेंट्स को बॉलीवुड फिल्मों की डीवीडी भी देती हैं.

वो कहती हैं, "मैं अपने स्टूडेंट्स को बिमल राय, सत्यजीत रे की फिल्मों की डीवीडी देती हूं. उन फ़िल्मों में हमारे भारत की छवि दिखती है. मैं मानती हूं कि हिंदी सीखने के लिए बॉलीवुड फ़िल्में भी बहुत अच्छा विकल्प है."

जैकलीन और लिसा रे हैं उनकी स्टूडेंट

उनके स्टूडेंट्स में 20 साल के युवा से लेकर 70 साल के बुजुर्ग तक हैं. पल्लवी कहती हैं, "ये लोग कई कारणों से हिंदी सीखना चाहते हैं. कई लोग ऐसे होते हैं जो नौकरी या कारोबार के सिलसिले में भारत आते हैं और उनको अपने रोजमर्रा के कामों के लिए हिंदी सीखनी होती है."

"कुछ विदेशी पर्यटकों को यहां पर खरीदारी करने के लिए हिंदी सीखनी होती है. अब तक मैं अमरीका, कनाडा, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, अफ्रीका समेत दुनिया के कई देशों के लोगों को हिंदी सीखने में मदद कर चुकी हूं. लेकिन मेरे काम को तब सफलता की बुलंदियों को छूने का मौका मिला जब अमेरीकी वाणिज्य दूतावास ने कुछ अप्रवासियों को हिंदी सिखाने का काम मुझे दिया."

अब तक पल्लवी भारत में सैकड़ों विदेशियों को हिंदी सिखा चुकी हैं. उन्हें मल्टीनेशनल कंपनियां अपने स्टाफ और उनके परिवार वालों को हिंदी सिखाने के लिए संपर्क करती हैं.

उनके स्टूडेंट की लिस्ट में जाने-माने लेखक विलियम डेलरिम्पल, बॉलीवुड अभिनेत्री जैकलीन फर्नांडिस, लिसा रे, नटालिया डि लुसिओ और लुसिंडा निकोलस शामिल हैं.

इमेज कॉपीरइट Madhu Pal/BBC

'हिंदी सिखाने में शर्म कैसी?'

इंजीनियरिंग और साइकॉलजी की पढ़ाई के बाद हिंदी ट्यूटर के रूप में करियर बनाने का निर्णय लेने वाली पल्लवी कहती है कि करियर की शुरुआत में उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा.

उनके माता-पिता इसके ख़िलाफ थे. वो कहते थे कि इंजीनियरिंग की पढ़ाई छोड़ कर ये क्या करने का भूत सवार हो गया है.

वो पल्लवी से काफ़ी नाराज़ रहे और दोस्तों ने भी उनके काम को संजीदगी ने नहीं लिया. वो अक्सर इसका मज़ाक उड़ाया करते थे.

पल्लवी कहती हैं, "वो कहते थे कि मैं पागल हो गई हूं. तुम्हें कुछ और करने को नहीं मिल रहा है क्या? इस काम से कितनी कमाई होगी? कौन आएगा हिंदी सीखने? पार्ट टाइम ठीक है लेकिन इसे अपना करियर बनाना बेवकूफी है."

इमेज कॉपीरइट Madhu Pal/BBC

"काम से संतुष्ट हूं"

पल्लवी ने लोगों की बातों को कभी ज्यादा तरजीह नहीं दी. वो अपनी धुन में चलती रहीं और हिंदी सिखाने के काम खूब मेहनत की.

वो कहती हैं, "मुझे अपने काम से संतुष्टि का आभास होता है. मैं उन खुशनसीब लोगों में से हूं, जिन्हें अपने काम में बहुत मज़ा आता है."

"मैं अगर अपने अनुभव की बात करूं तो मेरे भी अच्छे और बुरे क्लाइंट्स होते हैं. देखा जाए तो हमारे समाज में हिंदी टीचर की एक 'स्टीरियोटाइप छवि' है, जिससे मैं अलग हूं. इसलिए जब लोगों को मेरे बारे में पता चलता है तो वो काफी हैरान होते हैं. मेरा पहनावा और अंदाज़ देखकर वो चौंकते हैं."

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए

मिलते-जुलते मुद्दे