वो मॉडल, जिन्हें कभी भैंस कहा गया था

  • सिन्धुवासिनी
  • बीबीसी संवाददाता
कल्पना

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आपने रैंप पर चलती मॉडल्स को तो देखा ही होगा. कैसी होती हैं ये मॉडल्स? लंबी, दुबली, छरहरी, सपाट पेट और सपाट शरीर वाली ना?

जीशा, कीर्ति, अनन्या, आयुषी और कल्पना भी मॉडल्स हैं लेकिन ना तो ये दुबली हैं और न इनका शरीर सपाट है. ये प्लस साइज़ मॉडल्स हैं. या यूं समझिए कि ये मोटी हैं.

इन पांचों ने हाल ही में एक प्लस साइज़ ब्यूटी कॉन्टेस्ट में हिस्सा भी लिया. सवाल है कि समाज में जिन मोटी लड़कियों का हंसी-ख़ुशी से जीना दूभर होता है, वो दुनिया के सामने रैंप पर कैसे चली होंगी?

ऐसा नहीं है कि इन्हें वो सब कुछ नहीं सुनना और झेलना पड़ा जो एक आम मोटी लड़की को सुनना और झेलना और पड़ता है.

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जीशा, मिस प्लस साइज़

ब्यूटी कॉन्टेस्ट की विजेती रहीं जीशा को उनके शरीर के बारे में ऐसी भद्दी बातें सुनने को मिली हैं जिन्हें यहां लिखा भी नहीं जा सकता.

उन्होंने बताया, "लोग हर तरह के चीप कमेंट करते हैं. जैसे- तुम भैंस हो...और उन्हें लगता है कि ऐसा कहना बहुत सामान्य है. वो एक बार भी ये सोचने की ज़हमत नहीं उठाते कि सामने वाला किस मानसिक स्थिति से गुज़र रहा है."

उत्तर पूर्वी राज्य असम की रहने वाली आयुषी जब अपने एक दोस्त की बात याद करती हैं तो उनका गला रुंध जाता है.

वो याद करती हैं, "किसी ने मुझसे कहा था कि तुम दुनिया की सबसे भद्दी और बदसूरत लड़की हो. तुम्हारे जैसी लड़की को तो मैं कभी अपना दोस्त नहीं बना सकता."

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आयुषी

मोटे लोगों का मज़ाक उड़ाना कितना आम है, इसका एक उदाहरण आयुषी देती हैं.

उन्होंने कहा, "कोई फ़ोन भी करता है तो यही बोलता है, हेलो मोटी! कैसी है. हम दर्ज़ी के पास कपड़े सिलाने जाते हैं तो लोग हंसते हुए पूछते हैं, फ़िटिंग फिर टाइट हो गई क्या?''

मुंबई में रहने वाली कल्पना के पास भी सुनाने के लिए ऐसे हज़ारों किस्से हैं.

वो बताती हैं, "अगर लोग मेरे प्लेट में थोड़ी सी भी मिठाई देख लेते हैं तो तुरंत टोकने लगते हैं. अरे! इतनी मिठाई खाएगी? इतनी तो मोटी है, और कितना होना चाहती है?''

आज तक कही गई बातों में सबसे ज़्यादा दुख किस बात ने पहुंचाया?

इसके जवाब में अनन्या कहती हैं, "चाहे आप ज़ोर से मारो या हल्का मारो, एक ही बात है. बातें सभी बुरी लगती हैं."

अनन्या ने अपने स्कूल की एक घटना का ज़िक्र किया.

वो याद करती हैं, "मैं उस स्कूल में नई थी. एक लड़का मेरे पास आया और उसने सीधे पूछा कि क्या मैं उसके साथ रात बिताने के लिए तैयार हूं. मुझे अचानक समझ ही नहीं आया कि मैं क्या जवाब दूं. शाम तक जब मैंने उसे कोई जवाब नहीं दिया तो उसने मुझे फ़ोन करके कहा कि तुम जैसी लड़कियां सिर्फ़ बिस्तर में अच्छी लगती हैं."

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वो मोटी लड़कियां जिन्होंने अपने शरीर को अपनी पहचान नहीं बनने दिया.

अनन्या को ये सब सुनकर बहुत बुरा लगा. उन्होंने कहा, "मेरा मोटा शरीर देखकर उसने ये अंदाज़ा लगा लिया कि मेरे पास उसके साथ सोने के अलावा और कोई विकल्प नहीं है."

एक ख़ास तरह के शारीरिक ढांचे में फ़िट ना होने वाली लड़कियों को ना सिर्फ़ ताने और कमेंट्स सुनने पड़ते हैं बल्कि इसका असर उनकी नौकरी, करियर और ज़िंदगी पर भी पड़ता है.

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कीर्ति

कीर्ति ने अपने साथ हुए एक वाकया बताया कि उन्हें एक नौकरी के लिए सिर्फ़ इसलिए नहीं चुना गया क्योंकि वो मोटी थीं.

उन्होंने बताया, "मैं एक जगह बैकस्टेज़िंग के इंटरव्यू के लिए गई. वहां एक कोऑर्डिनेटर था. उसने मेरा इंटरव्यू लिया और मुझे सिर्फ़ इसलिए रिजेक्ट कर दिया क्योंकि मैं मोटी थी. बैकस्टेजर को पर्दे के पीछे रहकर काम करना होता है, फिर भी मुझे वो नौकरी नहीं मिली क्योंकि इंटरव्यू लेने वाले को मेरा शरीर पसंद नहीं आया."

इतना सब कुछ होने और सुनने के बाद ये पांचों लड़कियां रैंप तक कैसे पहुंचीं? इनमें इतना आत्मविश्वास कहां से आया कि ये मॉडल बनने का सपना देखने लगीं?

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सबके जवाब लगभग एक से हैं. जीशा कहती हैं, "मैं एक फ़ैशन डिज़ाइनर हूं. एक दिन मेरे मन में यूं ही ख़याल आया कि क्यों न मैं अपने लिए वही कपड़े डिज़ाइन करूं जो मैं मॉडल्स के लिए करती हूं.

इस तरह जीशा ने ना सिर्फ़ अपने लिए कपड़े डिज़ाइन करने किए बल्कि पहनने भी लगीं और धीरे-धीरे उनका ख़ुद के लिए प्यार लौट आया . फिर उन्होंने सोचा कि मैं अगर मॉडल्स के कपड़े बना सकती हूं तो उनकी तरह मॉडलिंग क्यों नहीं कर सकती?"

आयुषी की एक दोस्त ने जब उन्हें प्लस साइज़ ब्यूटी कॉन्टेस्ट के फ़ॉर्म का लिंक भेजा तब उन्होंने उस लिंक को खोला तक नहीं.

उन्होंने बताया, "दोस्त ने मुझे फ़ॉर्म भरने की आख़िरी तारीख़ बता दी थी. आख़िरी दिन ना जाने मुझे क्या हुआ कि मैंने फ़ॉर्म खोला और अप्लाई कर दिया. शॉर्टलिस्ट भी हो गई और फिर वो दिन भी आया जब मैं रैंप पर चली."

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वैसे पांच लड़कियों की कहानी दो और नामों का ज़िक्र किए बिना पूरी नहीं होगी. वो दो नाम हैं सचिन पुरी और सना मुराब.

सचिन और सना वो शख़्स हैं जिन्होंने प्लस साइज़ ब्यूटी कॉन्टेस्ट का आयोजन किया और प्लस साइज़ मॉडल्स को मंच दिया.

सचिन के मन में प्लस साइज़ मॉडल्स का आइडिया उस वक़्त आया जब वो अमरीका में थे.

उन्होंने बीबीसी से बताया, "अमरीका में प्लस साइज़ मॉडल्स का खूब चलन है. मैं उन्हें देखकर काफी प्रभावित हुआ और भारत में भी ऐसा कुछ करने की सोची. जब मैंने कम्युनिटी शुरू की तब मेरे पास एक भी मॉडल नहीं थी. शुरू के दिनों में मुझे मॉडल ढूंढने में बहुत दिक्कत हुई लेकिन धीरे-धीरे लोग जुड़ते गए. इसी बीच मेरी मुलाकात सना से हुई और फिर कारवां बढ़ता ही चला गया."

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सचिन पुरी

सना की बात करें तो उन्हें देखकर किसी का भी पहला सवाल यही होगा कि वो प्लस साइज़ मॉडल्स को लेकर इतनी संजीदा क्यों हैं.

ऐसा इसलिए क्योंकि सना काफी दुबली-पतली हैं. दिलचस्प ये है कि इतनी दुबली होने के बावजूद सना को अपने शरीर के बारे में काफी कुछ सुनना पड़ता था.

उन्होंने बताया, "मैं पतली हूं लेकिन मेरा पेट सपाट नहीं है और इसलिए लोग मुझे टोकते रहते थे. मुझे बहुत गुस्सा आता था. मैं अक्सर सोचती थी कि अगर मुझ जैसी महिला को इतना सुन पड़ रहा है तो जो लड़कियां वाक़ई मोटी हैं उन्हें क्या-क्या झेलना पड़ता होगा. यही वजह है कि मैं जब सचिन ने मुझसे प्लस साइज़ मॉडल्स के बारे में बताया तो मैं तुरंत इससे जुड़ गई."

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सना मुराब

सना कहती हैं, "हमारे लिए ये सब करना आसान नहीं है क्योंकि प्लस साइज़ वाली लड़कियों को मॉडलिंग के लिए मनाना बहुत मुश्किल होता है. समाज ने उनका आत्मविश्वास इतना गिरा दिया है कि वो ख़ुद पर भरोसा ही नहीं कर पाती हैं. उन्हें लगता है कि लोग उन्हें रैंप पर चलता देखकर उन पर हंसेंगे. लेकिन हमारी कोशिश जारी है और इन कोशिशों का असर भी दिख रहा है."

तो अब मॉडल बन चुकी वो लड़कियां उन लोगों को क्या कहना चाहेंगी जिन्होंने कभी उनका मज़ाक बनाया था?

इसके जवाब में आयुषी हंसकर कहती हैं, "आज वो लोग मेरी बातें सुन रहे हैं, मैं उनकी नहीं."

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