जम्मू कश्मीर: पहले बीजेपी-पीडीपी गठजोड़ टूटा, फिर क्या-क्या हुआ

  • 20 जून 2018
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पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की नेता और जम्मू कश्मीर की पहली महिला मुख्यमंत्री रहीं महबूबा मुफ़्ती ने गठबंधन तोड़ने के लिए बीजेपी की ये कहते हुए आलोचना की है कि राज्य में सख़्ती की नीति नहीं चल सकती.

उन्होंने श्रीनगर में संवाददाता सम्मेलन में कहा, ''ये सोचकर बीजेपी के साथ गठबंधन किया था कि बीजेपी एक बड़ी पार्टी है, केंद्र में सरकार है. हम इसके ज़रिए जम्मू कश्मीर के लोगों के साथ संवाद और पाकिस्तान के साथ अच्छे संबंध चाहते थे, उस समय अनुच्छेद 370 को लेकर घाटी के लोगों के मन में संदेह थे लेकिन फिर भी हमने गठबंधन किया था ताकि संवाद और मेलजोल जारी रहे.''

अपने पिता मुफ़्ती मोहम्मद सईद का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, ''मुफ़्ती साहब ने जिस मक़सद के लिए ये गठबंधन किया था, उसके लिए हमने अपनी तरफ़ से पूरी कोशिश की, संवाद और मेलजोल के लिए आगे भी हमारी कोशिश जारी रहेगी.

क्या बीजेपी की ओर से गठबंधन तोड़ने पर आपको झटका लगा, इस सवाल पर महबूबा मुफ़्ती ने कहा, ''शॉक नहीं लगा, गठबंधन सत्ता के लिए नहीं किया था. अब हम कोई और गठबंधन नहीं तलाशना चाहते.''

'अवसरवादी गठबंधन'

जम्मू कश्मीर में पीडीपी के साथ गठबंधन सरकार से बीजेपी के अलग होने के फ़ैसले पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने दोनों पार्टियों को आड़े हाथों लेते हुए उनके गठबंधन को अवसरवादी बताया है.

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कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने अपने एक ट्वीट में लिखा है, ''बीजेपी-पीडीपी के अवसरवादी गठबंधन ने जम्मू कश्मीर को आग में झोंक दिया, कई निर्दोष लोग मारे गए जिनमें हमारे बहादुर सैनिक भी शामिल हैं.''

''भारत को इसकी सामरिक क़ीमत चुकानी पड़ी है और इसकी वजह से यूपीए की कई वर्षों की कड़ी मेहनत बर्बाद हो गई. राष्ट्रपति शासन के दौरान भी क्षति जारी रहेगी. अक्षमता, घमंड और नफ़रत हमेशा विफल होती है.''

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'पीडीपी के साथ गठबंधन नहीं करेगी कांग्रेस'

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के इस ट्वीट से पहले पार्टी नेता ग़ुलाम नबी आज़ाद ने एक सवाल के जबाव में कहा कि जम्मू कश्मीर में सरकार बनाने के लिए कांग्रेस पीडीपी के साथ गठजोड़ नहीं करेगी.

उन्होंने कहा, ''पीडीपी के साथ गठबंधन करके सरकार बनाने का कोई सवाल ही नहीं है. बीजेपी जम्मू कश्मीर में अपनी नाकामी से नहीं भाग सकती है.''

उन्होंने आगे कहा, ''मुझे खुशी है कि केंद्र सरकार ने अपनी ग़लती मान ली है. बीजेपी-पीडीपी तीन साल तक सरकार चलाने में बुरी तरह विफल हुए. तीन सालों में राज्य को तबाह कर दिया.''

ग़ुलाम नबी आज़ाद ने ये भी कहा कि ''जो हुआ ठीक हुआ, जम्मू कश्मीर के लोग आगे तबाही से बच गए.''

उन्होंने इसे भारत सरकार की भी नाकामी बताते हुए कहा कि बीजेपी सारा ठीकरा पीडीपी के सिर नहीं फोड़ सकती.

'राज्यपाल शासन लगाने के सिवा कोई चारा नहीं'

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नेशनल कांफ्रेंस ने जम्मू कश्मीर की सियासी हलचल पर सधी हई प्रतिक्रिया देते हुए राज्यपाल शासन को फ़िलहाल एकमात्र विकल्प बताया है.

पार्टी नेता और पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने श्रीनगर में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ''नेशनल कांफ्रेंस को 2014 में सरकार बनाने का जनादेश नहीं मिला था, आज 2018 में भी सरकार बनाने का जनादेश नहीं है. हम किसी और तंजीम के साथ सरकार बनाने की कोशिश नहीं कर रहे हैं.''

उन्होंने कहा, ''न हमने किसी से संपर्क किया है न किसी ने हमसे संपर्क किया है. राज्यपाल के पास राज्यपाल शासन लगाने के सिवा कोई चारा नहीं है. हालात आहिस्ता आहिस्ता दुरुस्त करना होगा. इसके लिए हम राज्यपाल का पूरा समर्थन करेंगे. लेकिन राज्यपाल शासन ज़्यादा देर नहीं रहना चाहिए. हम चाहेंगे राज्य में नए सिरे से जल्द से जल्द चुनाव हो.

उन्होंने ये कहा कि 'बेहतर होता कि गठबंधन तोड़ने का फ़ैसला महबूबा मुफ़्ती लेतीं.'

'आज का फ़ैसला अप्रत्याशित'

पीडीपी का कहना है कि आपस में कुछ दिक्कतें थीं लेकिन बीजेपी का आज का फ़ैसला अप्रत्याशित है.

पीडीपी प्रवक्ता रफ़ी अहमद मीर ने श्रीनगर में स्थानीय पत्रकार माजिद जहांगीर से कहा, ''घाटी में हिंसा बढ़ना बीजेपी के फ़ैसले की वजह नहीं हो सकती. कुछ राजनीतिक मुद्दे हैं जिनमें बीजेपी का रुख़ अलग है हमारा अलग है जैसे सेना को विशेषाधिकार, अनुच्छेद 370, 35 ए, लेकिन हमने साथ चलने की हमेशा कोशिश की.''

राममाधव ने बताई गठबंधन तोड़ने की वजह

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जम्मू कश्मीर के लिए बीजेपी के प्रभारी राममाधव ने दिल्ली में एक संवाददाता सम्मेलन में गठबंधन से अलग होने की वजह बताते हुए कहा, ''हमने तीन साल पहले जो सरकार बनाई थी, जिन उद्देश्यों को लेकर बनाई थी, उनकी पूर्ति की दिशा में हम कितने सफल हो पा रहे हैं, उस पर विस्तृत चर्चा हुई.''

उन्होंने कहा, ''पिछले दिनों जम्मू कश्मीर में जो घटनाएं हुई हैं, उन पर तमाम इनपुट लेने के बाद प्रधानमंत्री मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह से परामर्श लेने के बाद आज हमने निर्णय लिया है कि गठबंधन सरकार में चलना संभव नहीं होगा.''

राममाधव का कहना था, ''पिछले तीन साल से ज़्यादा समय में बीजेपी अपनी तरफ़ से सरकार अच्छे से चलाने की कोशिश कर रही थी, राज्य के तीनों प्रमुख हिस्सों में विकास को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही थी. आज जो हालात राज्य में बने हैं, जिसमें एक भारी मात्रा में आतंकवाद और हिंसा बढ़ गई. उग्रवाद बढ़ रहा है, नागरिकों के मौलिक अधिकार और बोलने की आज़ादी ख़तरे में पड़ गए हैं.''

शुजात बुखारी की हत्या का हवाला

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राममाधव ने पीडीपी से गठबंधन होने की तमाम वजहें गिनाते हुए वरिष्ठ पत्रकार शुजात बुख़ारी की गोली मारकर हत्या किए जाने का भी जिक्र किया.

आख़िर शुजात बुखारी से किसको दिक़्क़त थी

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केंद्र सरकार ने दो दिन पहले ही जम्मू कश्मीर में घोषित एकतरफा संघर्षविराम को और आगे नहीं बढ़ाने का फ़ैसला किया था.

यह संघर्षविराम रमज़ान के महीने के दौरान राज्य में 16 मई को घोषित किया गया था.

गृह मंत्रालय ने कहा कि चरमपंथियों के ख़िलाफ़ फिर से अभियान शुरू किया जाएगा. यह घोषणा ईद के एक दिन बाद की गई थी.

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क्या पीडीपी गठबंधन से अलग होने की एक वजह संघर्ष विराम को आगे बढ़ाने पर पीडीपी के साथ मतभेदों का होना था, संवाददाताओं के इस सवाल पर राममाधव ने कोई सीधा जबाव नहीं दिया.

जम्मू कश्मीर: किसमें कितना दम

जम्मू कश्मीर विधानसभा में कुल 87 सीटें हैं. मौजूदा विधानसभा में महबूबा मुफ़्ती की पीडीपी के कुल 28 विधायक हैं.

वहीं बीजेपी 25 सीटों के साथ दूसरे पायदान पर है. उमर अब्दुल्लाह की नेशनल कांफ्रेंस 15 सीटों के साथ तीसरे स्थान पर है, जबकि कांग्रेस 12 सीटों के साथ चौथे स्थान पर है.

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