एडवेंचर स्पोर्ट्स पर लगी रोक से सांसत में लोग

  • 23 जून 2018
रिवर राफ्टिंग इमेज कॉपीरइट UFO (Uttaranchal Finest Outdoor)

उत्तराखंड उच्च न्यायालय के एक फ़ैसले ने उत्तराखंड में एडवेंचर स्पोर्ट्स के कारोबार से जुड़े उद्यमियों की चिन्ताएँ बढ़ा दी हैं.

उच्च न्यायालय ने अपने एक आदेश में प्रदेश की सभी नदियों पर चलने वाले व्हाइट रिवर राफ्टिंग और अन्य साहसिक खेलों के साथ ही पैराग्लाइडिंग पर भी प्रतिबंध लगा दिया है. ये प्रतिबंध रविवार से लागू हो रहे हैं.

जब तक इन खेलों के नियंत्रण के लिए राज्य सरकार कोई नीति नहीं बना देती तब तक के लिए यह प्रतिबंध लगा रहेगा. कोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया है कि वह दो हफ्तों के भीतर इस संबंध में एक 'पारदर्शी नीति' बनाए.

उत्तराखंड हाईकोर्ट के जस्टिस राजीव शर्मा और जस्टिस लोक पाल सिंह की बैंच ने यह आदेश एक जन हित याचिका की सुनवाई करते हुए दिया जिसमें याचिका कर्ता ने ऋषिकेश में गंगा नदी में राफ्टिंग और कैंपिंग करवाने वाली निजी कंपनियों पर 'सुरक्षा' और 'पर्यावरण' संबं​धी नियमों का उल्लंघन करने के आरोप लगाए थे.

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है, ''पर्यटन को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए लेकिन उसे नियंत्रित किए जाने की भी ज़रूरत है. मौज मस्ती के इन खेलों का एक त्रासदीपूर्ण अंत हो इसकी इजाज़त नहीं दी जा सकती.''

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उधर, हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद, पहले ​वीकेंड पर रिवर राफ्टिंग करने ऋषिकेश पहुंचे कई पर्यटकों को मायूस होना पड़ा. अपने चार दोस्तों के साथ चंडीगढ़ से ऋषिकेश पहुंची ऋतिका पंवार ने राफ्टिंग के लिए प्रीबुकिंग करवाई हुई थी. लेकिन राफ्टिंग पर लगे प्रतिबंध के चलते वे राफ्टिंग नहीं कर पाई. उन्होंने बीबीसी को बताया, ''हम इतनी दूर से रिवर राफ्टिंग करने ऋषिकेश आए थे लेकिन हमें राफ्टिंग नहीं करने दी जा रही, जबकि हमने प्रीबुकिंग करवाई हुई थी.''

हरियाणा के झज्जर से राफ्टिंग करने पहुंचे विकास सोरान अचानक राफ्टिंग में लगी रोक से काफी नाराज़ हैं, ''इस तरह अचानक से राफ्टिंग पर रोक कैसे लगाई जा सकती है. राफ्टिंग के लिए प्लानिंग करके आए सैकड़ों टूरिस्ट इधर परेशान हो गए हैं. कम से कम इस बात के लिए उत्तराखंड सरकार को पहले सूचना देनी चाहिए. यह तो हमारे साथ धोखा है.''

उधर प्रीबुकिंग लेने वाली राफ्टिंग ऐजेंसियां भी बुकिंग कैंसिल कर ग्राहकों का पैसे लौटा रही हैं लेकिन उन्हें ग्राहकों के आक्रोश का सामना करना पड़ रहा है। 'गौतम एंड गौतम ग्रुप' के मैनेजर अजय सिंह बताते हैं, ''हम प्रीबुकिंग का पैसा लौटा तो रहे हैं लेकिन पर्यटक काफी आक्रोश में हैं और हमें उनका गुस्सा झेलना पड़ रहा है.''

गर्मियों की छुट्टियों के इस 'पीक सीजन' में आए कोर्ट के इस आदेश ने राज्य भर में रिवर राफ्टिंग और पैराग्लाइडिंग करवाने वाले उद्यमियों को सकते में डाल दिया है.

ऋषिकेश में रिवर राफ्टिंग करवाने वाली एक ऐजेंसी 'ऋद्धि सिद्धि राफ्टिंग' के मालिक प्रदीप बॉबी कहते हैं, ''अकेले ऋषिकेश में तकरीबन दस हज़ार लोग अपनी आजीविका के लिए किसी न किसी तरह रिवर राफ्टिंग पर निर्भर हैं. यह रो​जगार किसी सरकार ने उन्हें नहीं दिया है बल्कि खुद उन्होंने अपने लिए बनाया है. ऐसे में अगर राफ्टिंग पर बैन लगाया जाता है तो यह इतने सारे लोगों की आजीविका को ख़त्म कर देगा.''

प्रदीप बॉबी आगे कहते हैं, ''साह​सिक खेलों के साथ रिस्क हमेशा जुड़ा होता है. लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि साहसिक खेल ही बंद करा दिए जाएं. दुनिया भर में एडवेंचर स्पोर्ट्स होते हैं, हम नियमों के अनुसार सारे सुरक्षा इंतज़ाम करते हैं.''

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रिवर राफ्टिंग करवाने वाली एजेंसियों के एक संगठन 'उत्तरांचल फाइनेस्ट आउटडोर एसोसिएशन' के अध्यक्ष देवेन्द्र सिंह रावत कहते हैं कि उत्तराखंड में रिवर राफ्टिंग को लेकर पहले से ही एक नीति है और उसके आधार पर ही ऐजेंसियां, प्रशिक्षित और लाइसेंस धारक रिवर राफ्टर्स के निर्देशन में रा​फ्टिंग करवाती हैं.

रावत कहते हैं, ''उत्तराखंड में राफ्टिंग नियमों के अनुसार ही होती है. उत्तराखंड बनने से पहले उत्तर प्रदेश सरकार के 1989 के जीओ के अनुसार राफ्टिंग होती थी और जब अलग राज्य बना तो उत्तराखंड सरकार ने अपनी नीति बनाई और वह 2014 में पास हुई. जिसका 2015 में संशोधन हुआ. इसके अनुसार ही राज्य में रिवर राफ्टिंग कराई जाती है.''

रावत कहते हैं कि सा​हसिक खेलों ने उत्तराखंड में स्थानीय लोगों को रोजगार दिलाया है और पलायन को रोकने का काम किया है.

उनका कहना है, ''ऋषिकेश के आसपास 70 कि​मी के दायरे में पहाड़ के दूसरे इलाकों की तरह पलायन नहीं है क्योंकि लोगों को रिवर राफ्टिंग और दूसरे साहसिक खेलों के ज़रिए रोजगार मिला है. लेकिन अगर यह बंद हो गया तो लोग गांव छोड़ने को मजबूर हो जाएंगे.''

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उधर, कोर्ट के इस आदेश ने राज्य भर में पैराग्लाइडिंग से रोजगार चला रहे लोगों की भी चिंताएं बढ़ा दी हैं.

'भीमताल पैराग्लाइडिंग एसोसिएशन' के उपाध्यक्ष नितेश बिष्ट कोर्ट के आदेश पर आश्चर्य जताते हुए कहते हैं, ''पैराग्लाइडिंग को इस आदेश में क्यों प्रतिबंधित कर दिया गया, हमें समझ नहीं आ रहा. पैराग्लाइडिंग न ही पर्यावरण को नुकसान पहुंचाता है और न ही इसका कोई दूसरा नुकसान है. हम सारे मानकों को पूरा करते हैं. हमारे पास 'ऐरो क्लब' और ज़िला प्रशासन दोनों की ओर से जारी लाइसेंस हैं. लेकिन फिर भी पैराग्लाइडिंग पर बैन लगाया गया है. ये ग़लत है. इससे हम लोगों का रोजगार छिन जाएगा.''

दूसरी ओर कोर्ट के इस आदेश पर उत्तराखंड पर्यटन विभाग के सचिव दिलीप जावलकर कहते हैं, ''राफ्टिंग के संबंध में पहले से ही एक नियमावली है, जिसके तहत लाइसेंस बांटे जाते हैं और उपकरणों का भी सत्यापन किया जाता है. हम इसे माननीय न्यायालय के संज्ञान में लाएंगे. साथ ही इसके अलावा जिन अन्य जल आधारित साहसिक खेलों और पैराग्लाइडिंग के लिए नियमावलियों का प्रश्न है उसके लिए प्रक्रिया अंतिम चरण में हैं और हम उसे जारी करने की स्थिति में हैं.''

कोर्ट ने अपने आदेश में रिवर बैड्स में कैंपिंग की इजाज़त दिए जाने को लेकर भी उत्तराखंड सरकार को लताड़ा है. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है, ''हम यह जानकर शॉक्ड हैं कि राज्य सरकार, रिवर बैड्स में कैंपिंग की इजाज़त दे रही है. इससे नदी और आसपास के पर्यावरण और पारस्थितिकी में प्रदूषण फैल रहा है.''

हालांकि पर्यटन सचिव दिलीप जावलकर करते हैं, ''पर्यटन विभाग ने किसी भी ऐजेंसी को रिवरबैड पर कैंपिंग के लिए लीज़ नहीं दी है. अगर कोई ऐजेंसी इस तरह कैंपिंग करा रही है तो यह गैरक़ानूनी है और इस पर कार्रवाई की जाएगी.''

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