ग्राउंड रिपोर्ट : खूंटी गैंगरेप में अब तक का सच क्या है

  • 24 जून 2018
सांकेतिक तस्वीर

झारखंड में मानव तस्करी के ख़िलाफ़ अभियान चलाने वाली एक ग़ैर सरकारी संस्था से जुड़ी पांच लड़कियों के साथ कथित सामूहिक बलात्कार की वारदात अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में है.

पुलिस के मुताबिक खूंटी ज़िले में पांचों लड़कियों को अगवा कर उनके साथ गैंग रेप किया गया था.

झारखंड के डीजी आरके मलिक ने कहा है कि पीड़िताओं को पेशाब पीने पर मजबूर किया गया था.

क्या थी घटना

मामला झारखंड के खूंटी ज़िले के अड़की प्रखंड के कोचांग गांव का है. तारीख़ 19 जून थी और समय दिन के 12 बजे.

कोचांग चौक से क़रीब 200 मीटर दूर आरसी मिशन स्कूल है, जहां से इन पांचों लड़कियों को कथित तौर पर अगवा किया गया था. स्कूल के प्रिंसिपल फ़ादर अलफ़ांसो आइंद को पुलिस ने घटना की जानकारी न देने के आरोप में गिरफ़्तार कर लिया है.

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Image caption यहीं से पांचों लड़कियों को अगवा किया गया था

इस मिशिनरी स्कूल के कैंपस में मौजूद इमली का एक विशाल पेड़ है. घटना के दिन इसी पेड़ के नीचे ये नाटक मंडली मानव तस्करी के ख़िलाफ़ लोगों को जागरुक करने के लिए नुक्कड़ नाटक कर रही थी.

नाटक देखने के लिए क़रीब 300 बच्चे और कुछ ग्रामीण मौजूद थे. इस नाटक मंडली में पांच लड़कियां और तीन पुरुष थे.

ये कलाकार नुक्कड़ नाटक कर ही रहे थे कि तभी दो मोटरसाइकिलों पर सवार पांच लोग वहां पहुंचे और कुछ सवाल-जवाब के बाद सभी को उनकी ही कार में बैठाकर जबरन जंगल की ओर लेकर चले गए.

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Image caption कोचांग के मार्टिन सोय

तब वहां कोचांग के मार्टिन सोय भी मौजूद थे. उन्होंने बताया, ''नाटक शुरू होने के बाद वे चौक पर आ गए थे. तभी बदमाशों ने लड़कियों को अगवा कर लिया. मैंने बदमाशों को इससे पहले कभी नहीं देखा था. वे कोचांग के नहीं थे. शाम होने पर गांव में यह ख़बर फैली कि बदमाशों ने नाटक टीम के साथ मारपीट की है. तब हम लोगों को बलात्कार की जानकारी नहीं थी. पुलिस के गांव आने पर हमें पता चला कि लड़कियों के साथ रेप हुआ है. स्कूल के प्रिंसिपल फ़ादर अल्फ़ांसो आइंद को गिरफ़्तार करने के लिए क़रीब 300 पुलिस वाले 21 जून को गांव आए. इसमें महिला जवान भी मौजूद थीं. वे लोग फ़ादर अल्फांसो और दो ननों को अपने साथ लेकर चले गए.''

फ़ादर अल्फ़ांसो के बारे में सोय बताते हैं कि वो एक अच्छे आदमी हैं और पूरे गांव के लोग उनकी इज़्ज़त करते हैं.

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Image caption कोचांग गांव में भी पत्थर गाड़ कर भारत के संविधान में आदिवासियों को मिले अधिकारों की घोषणा की गई है

यह गांव झारखंड के खूंटी ज़िले के अड़की प्रखंड का हिस्सा है, लेकिन यहां गाड़ी से पहुंचने के लिए पश्चिमी सिंहभूम ज़िले के बंदगाव जाना पड़ता है.

वहां से घने जंगलों के बीच पहाड़ का सीना चीरती पतली-सी सड़क पर कभी सीधी चढ़ाई है तो कभी वैसी ही ढलान. इस सड़क पर आधा घंटे चलने के बाद कोचांग आता है.

रास्ते में ज़्यादातर लोग पैदल चलते ही दिखाई देते हैं क्योंकि यहां सार्वजनिक यातायात सेवाओं का अभाव है.

प्रिंसिलप की गिरफ़्तारी पर सवाल

खूंटी ज़िले के इस इलाक़े में कई दशक पहले आदिवासियों ने ईसाई धर्म अपनाया था. अब यहां इस धर्म का ख़ासा प्रभाव दिखाई देता है.

इस मामले की जांच के लिए कोचांग पहुंचे झारखंड मुक्ति मोर्चा के विधायक पौलुस सोरेन ने फ़ादर अल्फ़ांसो की गिरफ़्तारी पर सवाल उठाए हैं.

सोरेन कहते हैं, "यह सरकार आरएसएस के इशारे पर काम कर रही है और ईसाई विरोधी है. इसलिए साज़िश के तहद चर्च को बदनाम किया जा रहा है. पूरे झारखंड मे ईसाई प्रचारकों पर धारा 107 के तहत निरोधात्मक कार्रवाई की जा रही है. पुलिस और प्रशासन के लोग इस मामले में झूठी कहानी बनाकर अपने राजनीतिक आकाओं को संतुष्ट करने में लगे हैं."

उन्होंने कहा कि 'अगर पुलिस को सूचना नहीं देना उनका अपराध है, तो मुख्यमंत्री ख़ुद यहां आकर देखें और बताएं कि जिस गांव में नेटवर्क भी नहीं रहता वहां से कोई तत्काल सूचना कैसे दे सकता है?'

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Image caption झारखंड मुक्ति मोर्चा के विधायक पौलुस सोरेन

पीड़ित महिलाओं के आरोप

कथित गैंग रेप की शिकार पांचों महिलाएं आदिवासी हैं और खूंटी ज़िले की ही रहने वाली हैं. इनमें से एक विधवा है और दो अविवाहित हैं. ये सभी खूंटी के एक एनजीओ से जुड़ी हैं जिन्हें नाटकों के ज़रिए सरकारी योजनाओं के प्रचार का काम मिला है. ये अपनी रोज़ी-रोटी के लिए नाटक करती हैं.

पुलिस में दर्ज कराई गई रिपोर्ट में पीड़िताओं ने कहा है, 'वे तीन लोग थे. उन्होंने बंदूक की नोक पर हमारे कपड़े उतरवाए और तस्वीरें खींची. इसके साथ ही वीडियो भी बनाया और गुप्तांगों में लकड़ी डाल दी. कुछ ही घंटों बाद कोचांग के उस मिशन स्कूल में हमें छोड़ दिया.'

रिपोर्ट में आगे ये भी कहा गया, 'हमारे पुरुष साथियों को पेशाब पीने पर मजबूर किया और उनके साथ मारपीट की. धमकी दी कि पत्थलगड़ी के इलाक़े में बिना पूछे नहीं आना. हमें कहा कि तुमलोग पुलिस के एजेंट हो और पत्थलगड़ी वाले इलाक़े में दीकू भाषा में पर्चे बांट रहे हो.''

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Image caption सोशल एक्टिविस्ट लक्ष्मी बाखला

इस घटना के बाद सभी बुरी तरह से डरे हुए थे. खूंटी आते वक़्त जैसे ही पीड़िताओं को नेटवर्क मिला उन्होंने पूरा घटनाक्रम सामाजिक कार्यकर्ता लक्ष्मी बाखला को बताया. बाखला कहती हैं, ''तब तक रात हो चुकी थी और हम बुरी तरह से डरे हुए थे. मैं खूंटी में नहीं थीं इसलिए मैंने उस समय किसी को ये बात नहीं बताई. अगले दिन मैंने अपने एक साथी के माध्यम से रांची में एडीजी अनुराग गुप्ता को यह सूचना भिजवाई.''

एडीजी ने खूंटी के एसपी को घटना की जानकारी दी जिन्होंने पीड़िताओं से रिपोर्ट दर्ज करवाने के लिए कहा. इसके बाद बुधवार रात तक रिपोर्ट दर्ज की जा सकी.

क्या कहती है पुलिस

पुलिस ने इस मामले में अभी तक कुल तीन लोगों को गिरफ़्तार किया है. इनमें स्कूल के प्रिसिंपल फ़ादर अल्फांसो भी शामिल हैं.

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Image caption झारखंड पुलिस के प्रवक्ता और एडीजी आर के मलिक

झारखंड पुलिस के प्रवक्ता और एडीजी आर के मलिक ने कहा, ''गैंग रेप में पत्थलगड़ी समर्थकों और उग्रवादियों का हाथ है. इसके मास्टरमाइंड की पहचान हो चुकी है. अड़की और खूंटी के महिला थाने में दो अलग-अलग रिपोर्ट दर्ज कराई गई है. स्कूल के प्रिंसिपल को दोनों ही मामलो में रिमांड पर लिया गया है. जल्दी ही बाक़ी अभियुक्तों को गिरफ़्तार कर लिया जाएगा.''

आदिवासियों के पत्थलगड़ी अभियान के सक्रिय कार्यकर्ता शंकर महली ने बीबीसी से कहा, ''पुलिस ने सरकार के इशारे पर मनगढ़ंत कहानी बताई है. हम अपना शासन मांग रहे हैं तो सरकार हमें फंसा रही है. कभी हमें नक्सली बताया जाता है, कभी अफ़ीम की खेती करने वाला और अब तो रेपिस्ट भी बना दिया. इसमें कोई सच्चाई नहीं है.''

इसी बीच कोचांग गांव में एक पंचायत भी हुई है जिसमें गैंगरेप में शामिल लोगों को दंडित करने का फ़ैसला लिया गया है.

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