प्रेस रिव्यूः शुजात बुखारी हत्याकांड में सुराग मिलने का दावा

  • 25 जून 2018
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Image caption शुजात बुखारी

द राइजिंग कश्मीर के संपादक शुजात बुखारी की हत्या के मामले में जम्मू-कश्मीर पुलिस विभाग को एक बड़ा सुराग हाथ लगा है.

हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक पुलिस ने उम्मीद जताई है कि वे जून के अंत तक इस मामले की गुत्थी सुलझा लेंगे.

पुलिस के एक अधिकारी जो इस हत्या की जांच में शामिल हैं, उन्होंने बताया है कि सीमा पार से मिले निर्देशों पर चरमपंथियों ने शुजात बुखारी की हत्या की है क्योंकि वे घाटी में शांति स्थापित करने की कोशिश कर रहे थे.

इस पुलिस अधिकारी का कहना है कि शुजात की हत्या में चरमपंथियों के हाथ होने की बात को अलगाववादी नेता नहीं मान रहे हैं, लेकिन पुलिस ने हत्यारों की पहचान कर ली है.

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दिल्ली के कैंट इलाक़े में दिनदहाड़े हुई एक मेजर की पत्नी की हत्या के मामले में एक अन्य मेजर को गिरफ़्तार किया गया है.

टाइम्स ऑफ इंडिया में प्रकाशित समाचार के अनुसार मेजर अमित द्विवेदी की पत्नी शैलजा द्विवेदी की हत्या की जांच में जुटी पुलिस ने 24 घंटे के भीतर मेजर रैंक के ही एक अधिकारी निखिल हांडा को मेरठ कैंट के पास से गिरफ़्तार किया.

पुलिस आरोपी तक दिल्ली कैंट परिसर के अस्पताल में लगे सीसीटीवी फुटेज और शैलजा के फ़ोन कॉल के ब्योरे के आधार पर पहुंची.

आरोपी ने शनिवार को शैलजा की गला रेत कर हत्या कर दी थी और उसके बाद शव पर वाहन भी चढ़ा दिया था.

ख़बर में बताया गया है कि हांडा और शैलजा का पुराना संबंध था और जब शैलजा उनसे दूरी बनानी लगी तो इस बात से परेशान होकर उन्होंने इस वारदात को अंजाम दिया.

लोन वापस लेने में जुटा पीएनबी

पंजाब नेशनल बैंक पहले के जारी किए गए लोन को वापस लेने में जुट गया है. इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित खबर के अनुसार नीरव मोदी के मामले से सबक लेते हुए पीएनबी ने 1 जून को अपनी सभी 6900 शाखाओं में लगभग 25 हज़ार कर्मचारियों को पुराने लोन वापस प्राप्त करने के काम में लगा दिया.

अखबार ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि बैंक ने अपनी सभी शाखाओं में रिकवरी सेल बनाए हैं जिसके ज़रिए वह जून 2018 तक ज़्यादा से ज़्यादा लोन वापस प्राप्त कर सके. बताया गया है कि बैंक ने अलग-अलग कामों लगे बैंक कर्मचारियों को लोन वापस लेने के काम में लगा दिया गया है.

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सुप्रीम कोर्ट में पूर्व जज के बेटे की नियुक्ति की फ़ाइल लौटाई

सुप्रीम कोर्ट के एक पूर्व न्यायाधीश के पुत्र सहित दो वकीलों की इलाहाबाद हाईकोर्ट में न्यायाधीश पद पर नियुक्ति की सिफ़ारिश को केंद्र सरकार ने लौटा दिया.

जनसत्ता में प्रकाशित इस ख़बर के अनुसार कॉलिजियम व्यवस्था के तहत इन नियुक्तियों की फ़ाइल भेजी गई थी. सरकार ने दोनों वकीलों के ख़िलाफ़ शिकायत का हवाला देते हुए उनके नाम लौटाए हैं.

इन दोनों वकीलों के नाम मोहम्मद मंसूर और बशारत अली ख़ान हैं. इनमें से मंसूर सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश दिवंगत सगीर अहमद के बेटे हैं. केंद्र सरकार ने इससे पहले भी एक बार मंसूर और ख़ान के नाम की सिफारिश वाली फ़ाइल लौटा दी थी.

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