बिहार: जज ने बेटी को क़ैद किया, अदालत ने आज़ाद

  • सीटू तिवारी
  • पटना से, बीबीसी हिंदी के लिए
प्यार, माता-पिता. परिवार

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एक जज ने अपनी बेटी को घर में बंद कर रखा था. सिर्फ इसलिए क्योंकि वो किसी से प्यार करती थी. अपनी बेटी के प्रेम प्रसंग से नाराज़ इस डिस्ट्रिक्ट जज ने उसे नज़रबंद कर रखा था, लेकिन पटना हाईकोर्ट ने लड़की के पक्ष में फ़ैसला देते हुए उसे आज़ाद कर दिया.

हाईकोर्ट ने इस मामले में फ़ैसला सुनाते हुए पीड़िता को माता-पिता से अलग 15 दिन के लिए और पटना की चाणक्य लॉ यूनिवर्सिटी में रहने के लिए एक कमरे की व्यवस्था करने का इंतज़ाम करने का आदेश दिया है.

इसके साथ ही अदालत ने उसके लिए एक महिला कॉन्सटेबल की 24 घंटे सुरक्षा देने और उसके प्रेमी से मिलने की इजाज़त भी दी है.

डिस्ट्रिक्ट जज के वकील संदीप शाही ने बीबीसी को बताया, "अदालत ने पीड़िता से पूछा कि क्या वो अपने माता-पिता के साथ रहना चाहती है. इसका जवाब उसने ना में दिया और कहा कि वो अपने प्रेमी से शादी करना चाहती है. इसके बाद कोर्ट ने उसके अलग रहने और सुरक्षा की व्यवस्था किए जाने का आदेश दिया."

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लॉ ग्रैजुएट पीड़िता दिल्ली के एक युवक से प्यार करती है. इस बात की जानकारी उसके घरवालों को हुई तो उन्होंने उसे घर में बंद कर दिया. बाद में ये ख़बर एक लीगल पोर्टल में छपी जिस पर पटना हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया.

चीफ़ जस्टिस राजेन्द्र मेनन ने को पीड़िता को 26 जून की दोपहर 2 बजकर 15 मिनट पर जज चेम्बर में पेश करने का आदेश दिया. कोर्ट के आदेश के मुताबिक पटना पुलिस की स्पेशल टीम मंगलवार को पीड़िता को कोर्ट लेकर पहुंची.

लगभग एक घंटे तक सभी पक्षों की दलील सुनने के बाद अदालत ने पीड़िता को परिवार से अलग रहने का फ़ैसला सुनाया.

पीड़िता के प्रेमी अदालत के इस फ़ैसले से काफी ख़ुश हैं. उन्होंने बीबीसी से कहा, "आख़िरकार मैं बहुत ख़ुश हूं और राहत महसूस कर रहा हूं. इस फ़ैसले के लिए मैं अदालत और मीडिया का शुक्रिया अदा करना चाहता हूं."

प्रेमी के वकील राजीव कुमार श्रीवास्तव ने कहा, "पीड़िता और अपने मुवक्किल को राहत दिलवाने के लिए हमने बिहार के पुलिस अधिकारियों का दरवाजा खटखटाया लेकिन हमें हाईकोर्ट से राहत मिली."

इस मामले में कोर्ट ने मीडिया को पीड़िता और उसके घरवालों का नाम न छापने का आदेश दिया है.

हालांकि इस मामले में पहले छपी स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक पीड़िता के साथ घर में मारपीट होती थी, उसे खाना नहीं दिया जाता था और उसका मोबाइल छीन लिया जाता था.

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पीड़िता के प्रेमी ने भी इस बात को माना की पीड़िता के घरवाले उसके साथ ग़लत व्यवहार करते थे लेकिन उन्होंने ये भी कहा कि वो उनके ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं चाहते.

वकील ने कहा, "न्यायिक सेवा से जुड़े लोग बहुत सम्मानित होते हैं. ऐसे में न तो हमारी तरफ से और न पीड़िता की तरफ़ से उनके ख़िलाफ़ किसी कार्रवाई की मांग की गई है."

इस मामले की अगली सुनवाई 12 जुलाई को होगी.

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