निर्भया रेप केस: मुकेश सिंह, पवन गुप्ता और विनय शर्मा की फांसी बरक़रार

  • 9 जुलाई 2018
निर्भया रेप केस के दोषी इमेज कॉपीरइट DELHI POLICE

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के निर्भया बलात्कार मामले में तीन दोषियों की मौत की सज़ा बरकरार रखी है.

सोमवार को चीफ़ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली बेंच ने दोषी क़रार दिए गए अभियुक्तों मुकेश, पवन गुप्ता और विनय शर्मा की याचिका पर सुनवाई करते हुए मौत की सज़ा को बरक़रार रखा है.

इस मामले के चौथे अभियुक्त अक्षय कुमार सिंह ने पुनर्विचार याचिका दायर नहीं की थी.

हालांकि उनके वकील ने कहा है कि वो याचिका दायर करेंगे.

अपने फ़ैसले में बेंच ने कहा है कि दोषी फ़ैसले में कोई ग़लती बताने में नाकाम रहे हैं.

अदालत ने ये भी कहा कि याचिका पर सुनवाई के दौरान अभियुक्तों को अपनी बात रखने का पूरा मौक़ा दिया गया और अब इस फ़ैसले पर पुनर्विचार की ज़रूरत नहीं है.

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हाईकोर्ट ने सुनाई थी मौत की सज़ा

बीते साल सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में दिल्ली हाई कोर्ट और ट्रायल कोर्ट की ओर से सुनाई गई मौत की सज़ा को बरक़रार रखा था.

सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील एम एल शर्मा और एपी सिंह ने पुलिस के सबूत जुटाने के तरीके पर सवाल उठाए थे जिनको दिल्ली पुलिस ने निराधार बताया था.

सुनवाई के दौरान वकीलों ने ये भी कहा था कि दोषी ग़रीब पृष्ठभूमि से हैं और आदतन अपराधी नहीं हैं, इसलिए उन्हें सुधरने का मौका दिया जाए.

याचिका में फांसी की सज़ा पर फिर से विचार करने की गुहार लगाई थी और फांसी पर अंतरिम रोक की मांग भी की गई थी.

सुप्रीम कोर्ट ने फांसी की सज़ा पर अंतरिम रोक लगा दी थी और साथ ही कोर्ट ने केस में मदद के लिए दो एमिकस क्यूरी (न्याय मित्र) नियुक्त किए थे.

दोनों एमिकस क्यूरी ने मौत की सज़ा पर पुनर्विचार का सुझाव दिया था.

किसी भी केस में एमिकस क्यूरी की नियुक्ति जजों को सुझाव देने तक सीमित होती है और वो उसे मानने के लिए बाध्य नहीं होते.

मामले के एक और अभियुक्त राम सिंह ने तिहाड़ जेल के भीतर आत्महत्या कर ली थी जबकि एक नाबालिग अभियुक्त को जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने तीन साल तक सुधार गृह में रखने के बाद रिहा कर दिया था.

क्या था मामला

साल 2012 में दिल्ली में एक चलती बस में 23 साल की छात्रा के साथ गैंगरेप किया गया था.

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बुरी तरह घायल छात्रा को सड़क किनारे फेंक दिया गया था. कई दिनों तक चले इलाज के बाद छात्रा की मौत हो गई थी.

इस घटना के बाद राजधानी दिल्ली समेत देशभर में व्यापक प्रदर्शन हुए थे.

निर्भया मामले के सामने आने के बाद भारत सरकार ने जस्टिस वर्मा समिति का गठन कर महिलाओं के ख़िलाफ़ हिंसा के क़ानूनों की समीक्षा की थी.

साल 2013 में क़ानूनों में संशोधन कर बलात्कार के जघन्य मामलों में मौत की सज़ा देने का प्रावधान जोड़ा गया था.

हाल में कठुआ में एक नाबालिग के सामूहिक बलात्कार और हत्या के बाद एक अध्यादेश के ज़रिए 12 साल से कम उम्र की लड़कियों से बलात्कार के लिए अधिकतम मौत की सज़ा का प्रावधान जोड़ दिया गया है.

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दुनिया के 115 देशों ने मौत की सज़ा को ख़त्म कर दिया है.

कब क्या हुआ

16 दिसंबर 2012: 23 वर्षीय फ़ीज़ियोथेरेपी छात्रा के साथ चलती बस में छह लोगों ने गैंगरेप किया. छात्रा के पुरुष मित्र को बुरी तरह पीटा गया और दोनों को सड़क किनारे फेंक दिया गया.

17 दिसंबर 2012: मुख्य अभियुक्त और बस ड्राइवर राम सिंह को गिरफ़्तार कर लिया गया. अगले कुछ दिनों में उनके भाई मुकेश सिंह, जिम इंस्ट्रक्टर विनय शर्मा, फल बेचने वाले पवन गुप्ता, बस के हेल्पर अक्षय कुमार सिंह और एक 17 वर्षीय नाबालिग को गिरफ़्तार किया गया.

29 दिसंबर: सिंगापुर के एक अस्पताल में पीड़िता की मौत. शव को वापस दिल्ली लाया गया.

11 मार्च 2013: अभियुक्त राम सिंह की तिहाड़ जेल में संदिग्ध हालत में मौत. पुलिस का कहना है कि उसने आत्महत्या की, लेकिन बचाव पक्ष के वकील और परिजनों ने हत्या के आरोप लगाए.

31 अगस्त 2013: जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने नाबालिग अभियुक्त को दोषी माना और तीन साल के लिए बाल सुधार गृह भेजा.

13 सितंबर 2013: ट्रायल कोर्ट ने चार बालिग अभियुक्तों को दोषी क़रार देते हुए फांसी की सज़ा सुनाई.

13 मार्च 2014: दिल्ली हाई कोर्ट ने फांसी की सज़ा को बरक़रार रखा.

मार्च-जून 2014: अभियुक्तों ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की और सुप्रीम कोर्ट ने फ़ैसला आने तक फांसी पर रोक लगा दी.

मई 2017: सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट और ट्रायल कोर्ट की फांसी की सज़ा को बरक़रार रखा.

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