राजस्थान: टिटहरी का अंडा फूट गया, तो बच्ची को दी अजीब सज़ा

  • 13 जुलाई 2018
पांच साल की बच्ची इमेज कॉपीरइट NB/BBC

राजस्थान के बूंदी ज़िले में एक ऐसी घटना सामने आई है जिसमें पांच साल की एक बच्ची को पंचायत ने घर से बाहर रहने की सज़ा सुनाई थी.

उस बच्ची की ग़लती केवल इतनी थी कि उससे अनजाने में टिटहरी का अंडा टूट गया था.

हरीपुरा गांव की रहने वाली बच्ची पास के स्कूल में जा रही थी. उस दौरान उसके पांव के नीचे टिटहरी का अंडा आ गया और वह फूट गया.

अनजाने में हुई इस घटना के बाद उस बच्ची पर एक जीव को मारने का आरोप लगा दिया गया, जिसके बाद गांव के पंचों ने उस बच्ची को 11 दिन तक घर से बाहर रहने की अजीबोगरीब सज़ा सुना दी.

घर से बाहर रहने के साथ बच्ची को कोई छू भी नहीं सकता था.

इतना ही नहीं पंचों ने बच्ची के माता-पिता को भी ऐसी सज़ा सुनाई जिसे सुनने के बाद सिर्फ़ हैरानी ही जताई जा सकती है.

मामला दर्ज

यह परिवार रैगर जाति का है. उनके घर के बाहर एक छप्पर डाला हुआ है, जहां बच्ची को रखा गया था. वहीं उसे खाना-पीना पहुंचाया जाता था लेकिन उसे छूना मना था.

हिंडोली थाने के प्रभारी लक्ष्मण सिंह ने बीबीसी को बताया कि बीते गुरुवार 10 लोगों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया गया.

उन्होंने बताया, ''2 जुलाई के दिन स्कूल में एक योजना के तहत बच्चों को दूध पिलाने का आयोजन हो रहा था. तभी पांच साल की बच्ची भी स्कूल गई थी. लेकिन लाइन में धक्का-मुक्की लगने पर उसके पैर से टिटहरी के दो-तीन अंडों में से एक अंडा टूट गया.''

अंडा टूटने की बात गांव में फैलने से बच्ची को उसके माता-पिता के साथ पंचायत के सामने पेश किया गया.

लक्ष्मण बताते हैं, ''पंचों ने कहा कि जब तक बच्ची को देवी-देवताओं के स्थान पर ले जाकर और वहां उसे नहलाकर नहीं लाओगे तब तक बच्ची घर में प्रवेश नहीं करेगी.''

अजीबोगरीब फ़ैसला

अपने फ़ैसले में पंचायत ने परिवार को भी सज़ा सुनाई थी जिसमें अगर बच्ची को किसी ने छुआ या उसके पास गया तो उसे जाति से निकाल दिया जाएगा. चाहे वो उसके माता-पिता ही क्यों न हो.

लक्ष्मण आगे बताते हैं कि परिवार को सज़ा में ये भी कहा गया कि वे पंचों के लिए नमकीन, भुना हुआ चना और शराब का इंतजाम भी करें.

बच्ची के भाई (ताऊ का लड़का) शंकर रैगर बताते हैं कि जैसा पुलिस बता रही है ऐसा कुछ भी नहीं था. बच्ची केवल तीन दिन तक बाहर रही थी क्योंकि उसने टिटहरी का अंडा फोड़ा था, इसलिए हमारे पूर्वजों की पुरानी मान्यता के कारण उसे घर के पास ही रखा गया.

वे ये भी बताते हैं कि बच्ची के पिता ने गांव वालों से पिछले कुछ सालों से लगभग 1500 रुपए का कर्ज लिया हुआ था इसी की एवज़ में उनसे खाने-पीने का इंतजाम करने के लिए कहा गया. ताकि वो किसी तरह गांव वालों के पैसे चुकाएं.

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Image caption बच्ची के साथ मनन चतुर्वेदी

पंचों की फ़रमाइश

बाल आयोग की अध्यक्ष मनन चतुर्वेदी लंबे समय से इस इलाक़े में बच्चों के अधिकारों और उनके लिए काम कर रही हैं. उन्हें गांव की घटना का पता चला तो वो ख़ुद बच्ची को देखने गईं. वहां जाकर पता चला कि गांव के लोग पुलिस को इस मामले पर कोई कार्रवाई नहीं करने दे रहे थे.

मनन चतुर्वेदी बताती हैं, ''टिटहरी का एक अंडा टूटने पर गांव वालों ने बच्ची को 11 दिन के लिए जाति से बाहर कर उसका हुक्का-पानी बंद कर दिया. वो परिवार बहुत ही ग़रीब था बच्ची दूध के लिए स्कूल गई थी.''

बच्ची की मां गर्भवती है और उनका पूरा समय (9वां महीना) चल रहा है, बच्ची के पिता मज़दूर है. गांव वालों ने सज़ा पूरी न करने पर परिवार को ये कह कर भी डराया कि बच्ची की मां की डिलीवरी के समय गांव में उनकी कोई मदद नहीं की जाएगी.

वे आगे बताती हैं कि पंचों की सारी फरमाइश जैसे शराब की बोतल, नमकीन और भुने चने परिवार ने दे भी दिए लेकिन उसी बीच एक व्यक्ति ने बच्ची के पिता से कर्ज के रूप में दिए 1500 रुपए मांगने शुरू कर दिए. बच्ची का परिवार इस मांग को पूरी नहीं कर पाया. इसके बाद पंचायत ने उनकी सज़ा आगे बढ़ा दी.

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क्या है टिटहरी की कहानी?

हालांकि पुलिस की कार्रवाई के बाद बच्ची अपने घर जा चुकी है.

मनन चतुर्वेदी कहती हैं कि बच्ची को सज़ा पूरे गांव के सामने दी गई थी. लेकिन पुलिसे ने केवल उन्ही लोगों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया जिनका नाम बच्ची के पिता हुकुमचंद ने बताया.

पुलिस ने गांव के कुल 10 लोगों के खिलाफ़ किशोर न्याय क़ानून और अस्पृश्यता क़ानून के विभिन्न प्रावधानों के तहत मामला दर्ज कर लिया है.

राजस्थान के बूंदी ज़िले के गांव-देहात में मान्यता है कि टिटहरी बारिश के लिए शुभ होती है. इसे मारना या उसके अंडों को फोड़ना अपशकुन माना जाता है. माना जाता है कि अगर टिटहरी नाराज़ हो गई तो गांव में बारिश नहीं होगी.

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