प्रेस रिव्यू: जस्टिस गोगोई ने कहा, न्यायपालिका को सुधार नहीं, क्रांति की ज़रूरत

  • 13 जुलाई 2018
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उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजन गोगोई ने गुरुवार को कहा कि न्यायपालिका को आम आदमी की सेवा के योग्य बनाए रखने के लिए 'सुधार नहीं एक क्रांति' की जरूरत है.

न्यायमूर्ति गोगोई ने साथ ही इस बात पर भी ज़ोर दिया कि न्यायपालिका को और अधिक सक्रिय रहना होगा.

जस्टिस गोगोई ने इंडियन एक्सप्रेस के एक कार्यक्रम में कही. इस मौके पर सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के कई जज मौजूद थे.

न्यायाधीश रंजन गोगई ने कहा कि समाज में बदलाव के लिए न्यायपालिका को 'सुधार नहीं, क्रांति की ज़रूरत' है.

जस्टिस गोगोई ने साथ ही इस बात पर भी जोर दिया कि न्यायपालिका को और 'अधिक सक्रिय' रहना होगा.

जस्टिस गोगोई ने दिल्ली के तीन मूर्ति भवन में 'न्याय की दृष्टि' विषय पर व्याख्यान में कहा कि न्यायपालिका 'उम्मीद की आखिरी किरण' है और वह 'महान संवैधानिक दृष्टि का गर्व करने वाला संरक्षक' है. इस पर समाज का काफी विश्वास है.

18 नवंबर, 1954 में पैदा होने वाले जस्टिस रंजन गोगोई 1978 में वकील बने. गुवाहाटी हाईकोर्ट में लंबे समय तक वकालत करने के बाद 28 फरवरी 2001 को वह गुवाहाटी हाईकोर्ट में स्थाई जज के रूप में नियुक्त हुए.

इसके बाद 9 सितंबर 2010 को उनका तबादला पंजाब - हरियाणा हाईकोर्ट में हुआ. और, 23 अप्रैल 2012 को वह सुप्रीम कोर्ट के जज बने.

जस्टिस रंजन गोगोई उस बैंच में शामिल रहे हैं जिन्होंने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश मार्कंडेय काटजू को सौम्या मर्डर केस पर ब्लॉग लिखने के संबंध में निजी तौर पर अदालत में पेश होने के लिए कहा था.

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'ये पाकिस्तान नहीं है, आरक्षण देना ही होगा'

राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से कहेगा कि वो अन्य केंद्रीय विश्वविद्यालयों की तरह ही आरक्षण नीति को लागू करे या फिर दस्तावेज पेश कर अगस्त महीने तक अपना अल्पसंख्यक दर्जा साबित करे.

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक आयोग के चेयरमैन रामशंकर कठेरिया ने कहा, "ये पाकिस्तान नहीं है, विश्विद्यालय को नियमों का पालन करना होगा."

कठेरिया ने कहा कि मानव संसाधन मंत्रालय, यूजीसी और राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग ने इस बात की पुष्टि की है कि एएमयू के पास अल्पसंख्यक दर्जा नहीं है.

2016 में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के सामने कहा था कि एएमयू अल्पसंख्यक संस्थान नहीं है.

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कचरे का पहाड़ हटाएं

हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक दिल्ली में तीन लैंडफिल साइटों पर बन रहे कूड़े के पहाड़ों से निपटने के लिए उचित कदम न उठाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई.

कोर्ट ने मामले में उपराज्यपाल की ओर से उठाए गए कदमों पर असंतोष जाहिर करते हुए कड़ी फटकार लगाई.

दिल्ली सरकार के हलफनामे में कहा गया कि कूड़े के निस्तारण को लेकर हो रही मीटिंग में उपराज्यपाल भाग नहीं लेते हैं.

इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा, "आपके पास जब भी काम आता है तो आप दूसरों पर जिम्मेदारी डाल देते हैं. उपराज्यपाल मानते हैं कि उनके पास पावर है, वह सुपरमैन हैं, सब कुछ वही हैं तो बैठक में क्यों नहीं जाते. कूड़ा निस्तारण की जिम्मेदारी कौन लेगा? सारे अधिकार आपके पास हैं तो जिम्मेदारी भी आपकी है. आपको लगता है कि कोई आप को छू भी नहीं सकता, क्योंकि आप संवैधानिक पद पर हैं."

कोर्ट ने 16 जुलाई तक उपराज्यपाल से हलफनामा दायर कर यह बताने को कहा है कि कूड़ा निस्तारण का कार्य कब तक पूरा होगा? एक्शन प्लान क्या है और अभी तक क्या किया है?

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रेप-छेड़छाड़ का आरोप लगते ही छिनेंगी सुविधाएं

हरियाणा में छोटी बच्चियों से बलात्कार और छेड़छाड़ के आरोपियों की राशन छोड़कर सभी सरकारी सुविधाएं बंद होंगी.

इनमें पेंशन, वजीफा, ड्राइविंग और आर्म लाइसेंस जैसी सुविधाएं शामिल हैं. हालांकि निर्दोष पाए जाने पर सभी सुविधाएं शुरू कर दी जाएंगी.

ये खबर एनबीटी में छपी है. हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने गुरुवार को ये घोषणा की. सीएम ने महिला सुरक्षा को लेकर 10 सख्त फैसलों की घोषणा की.

सीएम ने कहा कि रेप या छेड़छाड़ के मामलों की जांच 15 से एक माह में करनी होगी. जल्द सुनवाई के लिए प्रदेश में 6 फास्ट ट्रैक कोर्ट खुलेंगे.

भारत में बच्चों को रेप के बारे में कैसे बताएं?

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