बड़ी ख़बरेंः व्हाट्सऐप संदेश के आधे घंटे बाद भीड़ का हमला

  • 16 जुलाई 2018
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कर्नाटक में बच्चा चोरी के शक़ में भीड़ के हाथों पीट-पीट कर मारे गए इंजीनियर की मौत की वजह एक व्हाट्सऐप संदेश बना जो हमले से आधे घंटे पहले ही भेजा गया था.

स्थानीय पुलिस ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया है कि ये संदेश मनोज पाटिल नाम के एक स्थानीय व्यक्ति ने भेजा था. इस मामले में अब तक 30 लोगों को गिरफ़्तार किया गया है जिनमें पाटिल भी शामिल हैं.

पाटिल ने व्हाट्सऐप पर संदेश भेजा था, "लाल कार में जा रहे इन लोगों को बचके न जाने दिया जाए, ये बच्चा चोर हैं."

इस संदेश के साथ बच्चों को चॉकलेट बांट रहे चार लोगों का वीडियो भी था. ये संदेश कर्नाटक के बीदर ज़िले के मुरकी और आसपास के गांवों में व्हाट्सऐप समूहों में भेजा गया था.

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Image caption हाल ही में व्हाट्सऐप ने अख़बारों में विज्ञापन देकर लोगों से अफ़वाहें न फैलाने की अपील की थी

पुलिस के मुताबिक संदेश भेजने वाले मनोज पाटिल कई व्हाट्सऐप ग्रुप चलाते हैं. अभी तक की जांच में पुलिस ने पाया है कि कार में जा रहे चार लोगों पर हमले की वजह ये व्हाट्सएप संदेश ही बना.

पुलिस का कहना है कि व्हाट्सऐप पर संदेश वायरल होने के बाद लोगों ने कार का पीछा किया और फिर उसमें सवार चार लोगों पर हमला कर दिया जिनमें से एक की मौत हो गई. मारे गए 32 वर्षीय मोहम्मद आज़म हैदराबाद के मलकपेट के रहने वाले थे और वो गूगल के एक प्रोजेक्ट पर काम कर रहे थे.

न्यूनत समर्थन मूल्य से नाख़ुश किसानों का दिल्ली मार्च

Image caption महाराष्ट्र में हुए किसानों के प्रदर्शन की एक पुरानी तस्वीर

सरकार की ओर से तय ख़रीफ़ फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य से नाराज़ किसानों के समूह ने देशभर में चार सौ बैठकें करने और फिर दिल्ली तक मार्च करने का ऐलान किया है. द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति ने कहा है कि वो देशभर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 40 प्रस्तावित रैलियों के जवाब में चार सौ रैलियां करेगी और न्यूनतम समर्थन मूल्य का मुद्दा उठाएगी.

समिति का कहना है कि सरकार ने जो न्यूनतम समर्थन मूल्य जारी किया है वो स्वामीनाथन आयोग की सिफ़ारिशों से कम है. अपने प्रदर्शनों के तहत संघर्ष समिति 20 जुलाई को दिल्ली के संसद मार्ग पर काले झंडों को साथ प्रदर्शन करेगी.

महंगे हो सकते हैं गरीब रथ के टिकट

रेलवे के वरिष्ठ अधकारियों के मुताबिक गरीब रथ एक्सप्रेस के टिकट के दामों में जल्दी ही यात्रा के दौरान मिलने वाले बिस्तर का किराया भी शामिल हो सकता है. करीब एक दशक पहले रेलवे ने बिस्तर का किराया 25 रुपए तय किया था, लेकिन अब रेलवे इसे बढ़ाने पर विचार पर कर रहा है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक अधिकारियों का कहना है कि इसका असर अन्य ट्रेनों के किराए पर भी हो सकता है. इस समय रेलवे सभी वातानुकूलित कोचों में बिस्तर मुहैया कराता है और इसका किराया पहले से ही टिकट में शामिल होता है. हालांकि गरीब रथ और दुरंतो के टिकट की बुकिंग के दौरान यात्रियों को बिस्तर अलग से बुक करना पड़ता है. अब ये दाम बढ़ सकते हैं.

एनईईटी में ज़ीरो नंबर, फिर भी एमबीबीएस में दाख़िला

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Image caption सांकेतिक तस्वीर

अंग्रेज़ी अख़बार 'द टाइम्स ऑफ़ इंडिया' की एक रिपोर्ट के मुताबिक साल 2017 में राष्ट्रीय योग्यता सह प्रवेश परीक्षा (एनईईटी) में फ़िज़िक्स और कैमिस्ट्री में ज़ीरो या नेगेटिव अंक पाने वाले 110 छात्रों को एमबीबीएस में प्रवेश मिल गया. इनमें से अधिकतर छात्रों को निजी कॉलेजों ने प्रवेश दिया.

रिपोर्ट के मुताबिक कम से कम चार सौ ऐसे छात्रों को भी दाख़िला दिया गया जिनके फ़िज़िक्स और कैमिस्ट्री में दस से कम अंक थे.

दरअसल एनईईटी की परसेंटाइल व्यवस्था के तहत प्रत्येक विषयों में न्यूनतम अंक लाने की बाध्यता समाप्त कर दी गई है. इसकी वजह से व्यक्तिगत विषयों में ख़राब अंक लाने वाले छात्रों को भी निजी कॉलेजों में दाख़िला मिल पा रहा है.

निकारागुआ में प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ सैन्य अभियान

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निकारागुआ के सरकारी सैन्यबलों ने देश के दक्षिण-पूर्वी शहरों में छापेमारी की कार्रवाइयां की हैं जिनमें कम से कम दस लोग मारे गए हैं.

मानवाधिकर समूहों के मुताबिक मारे गए लोगों में कम से कम छह आम नागरिक हैं जिनमें दो बच्चे भी शामिल हैं. चार सैनिक भी मारे गए हैं.

प्रदर्शनकारियों को हटाने का ये अभियान मसाया शहर और आसपास के कई छोटे-छोटे क़स्बों में चलाया गया जहां प्रदर्शनकारियों ने नाकेबंदी कर रखी है.

मानवाधिकार समूहों का ये भी कहना है कि सैन्यबलों ने स्थानीय अस्पताल पर क़ब्ज़ा कर लिया है और घायलों को दाख़िल नहीं होने दिया गया है.

शहर के अलग-अलग हिस्सों में निशानेबाज़ तैनात हैं और आम लोगों को घरों से बाहर न निकलने की चेतावनी दी गई है.

यूरोपीय संघ, कोलंबिया और अर्जेंटीना ने सरकार की इन कार्रवाइयों की आलोचना की है. निकारागुआ में राष्ट्रपति डेनियल ओर्टेगा के ख़िलाफ़ चल रहे प्रदर्शनों में अब तक कम से कम तीन सौ लोग मारे जा चुके हैं.

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