प्रेस रिव्यू: तलाक़ के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने वाली महिला इस्लाम से बहिष्कृत

  • 17 जुलाई 2018
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दैनिक जागरण की ख़बर के मुताबिक तीन तलाक़ और हलाला के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने वाली निदा ख़ान को इस्लाम से बहिष्कृत कर दिया गया है.

उनके ख़िलाफ़ बरेली में दरगाह आला हजरत से फ़तवा जारी हुआ है.

उन्हें काफ़िर भी करार दिया गया है और उन्हें एलानिया तौबा करने के लिए कहा गया है.

निदा ने जवाब में कहा है कि 'पहले तो फ़तवा जारी करने वालों को तौबा करनी चाहिए.'

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जम्मू-कश्मीर पुलिस आर्मी अफसरों के ख़िलाफ़ केस करेगी दर्ज?

द हिंदू अख़बार के मुताबिक केंद्र और जम्मू-कश्मीर राज्य के बीच एक क़ानूनी लड़ाई शुरू हो गई है.

मुद्दा है कि क्या राज्य पुलिस सेना के जवानों के ख़िलाफ़ मुकदमा दर्ज कर सकती है या नहीं.

मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की बेंच के सामने राज्य ने अपनी राय रखी कि ये पुलिसकर्मी की ड्यूटी है कि वो गैर-ज़मानती अपराध किए जाने पर केस दर्ज करे, चाहे किसी आर्मी वाले ने किया हो या किसी और ने.

लेकिन केंद्र ने आर्म्ड फ़ोर्सेस स्पेशल पावर एक्ट -1990 के सेक्शन 7 का हवाला देते हुए कहा कि किसी आर्मी अफ़सर के ख़िलाफ़ उसके काम के दायरे में लिए गए एक्शन को लेकर कोई क़ानूनी कार्रवाई नहीं हो सकती.

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'हेट क्राइम' में यूपी सबसे ऊपर

टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने छापा है कि मानवाधिकार संस्था एमनेस्टी इंटरनेशनल के मुताबिक 'हेट क्राइम' के मामलों में उत्तर प्रदेश सबसे ऊपर है.

उसके बाद दूसरे नंबर पर आता है गुजरात.

संस्था ने इस साल के पहले 6 महीने में हुए 'हेट क्राइम' के आधार पर ये रिपोर्ट तैयार की है.

रिपोर्ट के मुताबिक नफ़रत के आधार पर किए गए अपराधों के पीड़ित दलित, आदिवासी, अल्पसंख्यक और ट्रांसजेंडर हैं.

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'लोगों की जान उद्योगों से ज़्यादा अहम'

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने प्रदूषण को लेकर पर्यावरण मंत्रालय को फटकार लगाई है.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, "अख़बारों में रिपोर्ट छपती हैं कि प्रदूषण से 60 हज़ार लोग मरे. साफ़-साफ़ समझ लें कि देश के लोगों की जान उद्योगों से कहीं ज़्यादा अहम है.

दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण के मु़द्दे पर पर्यावरणविद् एमसी मेहता ने 33 साल पहले 1985 में याचिका दायर की थी.

इस पर सुनवाई के दौरान मंत्रालय ने उद्योगों में ईंधन के तौर पर इस्तेमाल होने वाले पेट्रोलियम कोक के आयात पर पाबंदी के प्रभावों को देखने के लिए कोर्ट से मोहलत मांगी.

इसके बाद कोर्ट ने टिप्पणी की कि आप अब तक बिना अध्ययन के ही देश में पेट्रोलियम कोक की इजाज़त दे रहे थे.

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'डेटा पर कंपनी का नहीं, सिर्फ़ उपभोक्ता का हक़'

अमर उजाला की ख़बर के मुताबिक दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने डेटा सुरक्षा पर कहा है कि डेटा पर सिर्फ़ उपभोक्ता का हक़ है.

निजी कंपनियों का लोगों के डेटा इकट्ठा करना अधिकार से परे है.

केंद्र सरकार को भेजी सिफ़ारिशों में मौजूदा क़ानून पर सवाल खड़े करते हुए नियामक ने क़ानून बनाने की सिफ़ारिश की है ताकि निजी कंपनियों द्वारा डेटा इकट्ठा करने पर प्रतिबंध लगे.

ट्राई का कहना है कि मौजूदा क़ानून काफ़ी नहीं है और इससे ग्राहकों के डेटा का ग़लत इस्तेमाल होने का ख़तरा है.

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