कर्नाटक लिंचिंगः आख़िर क्या हुआ था, जिसके बाद भीड़ ने एक की जान ले ली

  • 17 जुलाई 2018
कर्नाटक में लींचिंग

"घटना के बाद गांव खाली हो चुका है. सभी भय में है. हिंसा की संभावना को देखते हुए दुकानें बंद हैं. गिरफ़्तारी के डर से आधे लोग गांव छोड़ कर जा चुके हैं."

ये शब्द हैं मुरकी गांव के बुजुर्ग राजेंद्र पाटिल के. कर्नाटक के बिदर ज़िला का मुरकी गांव, जहां बच्चा चोरी के शक में भीड़ ने एक व्यक्ति की पीट-पीट कर हत्या कर दी थी.

ऐसा बताया जा रहा है कि यह सबकुछ व्हाट्सऐप पर वायरल वीडियो की वजह से हुआ था.

एक वीडियो किसी की मौत का कारण कैसे बन जाती है, इसका पता लगाने बीबीसी तेलुगू की टीम कर्नाटक के बिदर ज़िला पहुंची.

आख़िर ऐसा क्या हुआ था कि हैदराबाद के पांच दोस्त एक यात्रा पर निकले थे जो बुरे सपने में तब्दील हो गया.

इस घटना में उन्होंने अपना एक दोस्त खो दिया, जिनके दो बच्चे हैं.

आज़म, सलमान, सलम, नूर और अफ़रोज़, अपनी नई कार से अपने परिवारों से मिलने कर्नाटक निकले थे.

13 जुलाई की शाम को वे हैदराबाद से 190 किलोमीटर दूर हंडीकेरा गांव पहुंचे.

इस गांव में मुसलमानों के 20 और लिंगायतों के करीब 150 परिवार रहते हैं. गांव में चारों तरफ़ हरियाली है.

Image caption अफरोज

वीडियो बनाया और व्हाट्सप ग्रुप में डाल दिया

अफ़रोज़ बताते हैं, "अपने परिवारों के यहां पहुंचने के बाद हमलोगों ने खाना बनाने को कहा. इसके बाद हमलोग खेत जाने की योजना बना रहे थे, जो घर से छह किलोमीटर दूर था. रास्ते में हमलोगों को स्कूल से लौटते हुए कुछ बच्चे मिले. हमारा दोस्त सलमान क़तर का रहने वाला था. वो क़तर से कुछ चॉकलेट लाया था. उसने कुछ चॉकलेट बच्चों में बांट दिया."

"इसके बाद हमलोग झील की तरफ बढ़ने लगे. कुछ दूर चलने के बाद हमलोगों ने अपनी फोल्डेड कुर्सी लगाई और बैठ गए. इससे पहले कि हमलोग कुछ समझ पाते, कुछ गांव वालों ने हमे घेर लिया. हमारी कार के टायर की हवा निकाल दी. वे लोग हमलोगों को बच्चा चोर कह रहे थे. हमलोग उन्हें समझाने की कोशिश कर रहे थे पर वो सुनने को तैयार नहीं थे. हमलोगों ने अपने परिवार वालों को मदद के लिए बुलाया."

वहां अमर पाटिल नाम का एक शख़्स था जो यह सबकुछ अपने कैमरे में रिकॉर्ड कर रहा था. इसके बाद उसने गांव के एक व्हाट्सऐप ग्रुप में यह वीडियो डाल दिया. इस ग्रुप में करीब दो सौ लोग थे.

Image caption अफ़रोज़ के चाचा याकूब

'गांव वाले समझने को तैयार नहीं थे'

इसी बीच अफ़रोज़ के चाचा मोहम्मद याकूब उनकी मदद करने पहुंचे. गांव वाले उनकी भी सुनने को तैयार नहीं थे.

याकूब बताते हैं, "वे लोग हमारे लड़कों पर बच्चा चोरी का आरोप लगा रहे थे. गांव वाले हमारी कार पर पत्थर फेंकने लगे और हमारे लड़कों को पीटने लगे. नूर के सिर पर चोट लगी थी. हमलोगों ने उसे किसी तरह भीड़ से छुड़ाया और उसे एक बाइक से भेज दिया. अफ़रोज़ गांव वालों को समझाने की कोशिश कर रहे थे."

"सलमान और आज़म वहां से कार से निकल गए. हमलोगों ने सोचा कि मामला सुलझ गया है और हमलोग सभी घर पर मिलेंगे. लेकिन पांच मिनट के अंदर मेरे पास किसी लड़के का फ़ोन आया कि कार किसी गड्ढे में गिर गई है."

वो आगे बताते हैं कि यह उनके परिवार वालों के लिए एक बुरे सपने की तरह था. याकूब कहते हैं कि उन्होंने अफ़रोज़ और अपने बच्चे को दूसरे के घर भेज दिया ताकि वे वहां सुरक्षित रह सकें.

Image caption गांव की दुकानें बंद हैं

कुछ ही देर में हज़ार लोग इकट्ठा हो गए

पांच मिनट के अंदर एक के बाद एक योजनाएं बनती चली गईं. शाम के करीब 5.15 बजे वीडियो व्हाट्सऐप ग्रुप में भेजा गया था.

मुरकी गांव के बस पड़ाव पर चाय की दुकान लगाने वाले विजय पाटिल बताते हैं, "हमलोगों को वीडियो ग्रुप में मिला. उनमें से किसी एक ने बताया कि लाल कार में बच्चा चोरी करने वाला समूह हमारे गांव मुरकी की तरफ भाग रहा है. वीडियो के देखने के बाद वे हमारी दुकान से कुर्सी और टेबल निकाल कर रास्ता ब्लॉक कर दिया गया."

"कार तेज़ गति में थी. मेरी आंखों को विश्वास नहीं हो रहा था. तेज़ कार एक पुलिया से टकराई और सड़क के किनारे गड्ढे में जा गिरी. लोग इस बात से गुस्सा थे कि कार कहने पर भी नहीं रोकी जा रही थी. उन्होंने कार पर पत्थर फेंकना शुरू कर दिया. कुछ ही देर में वहां करीब 600 लोग जुट गए. देखते ही देखते करीब हज़ार लोग आसपास के गांवों से वहां इकट्ठा हो गए."

विजय कहते हैं कि उस घटना के बाद वो व्हाट्सऐप ग्रुप से बाहर हो गए थे.

पुलिस की जांच

पुलिस अब वीडियो का विश्लेषण कर रही है. वीडियो में भीड़ कार से एक शख़्स को निकाल कर डंडे से पीट रही है.

वहीं दूसरे लोग कार पर पत्थर फेंकते देखे जा सकते हैं. करीब पांच हज़ार आबादी वाला मुरकी गांव कमल नगर पुलिस थाने के अंतर्गत आता है. थाना क्षेत्र में यह अपनी तरह की पहली घटना है. गांव की सीमा महाराष्ट्र से लगती है.

पिछड़े गांवों में शुमार है मुरकी

पंचायत राज मंत्रालय की 250 पिछड़े गांवों में से यह गांव एक है. 2011 की जनगणना रिपोर्ट के मुताबिक यह की 74 प्रतिशत आबादी साक्षर है.

गांव में दलहन की खेती ज़्यादा होती है और यह यहां के लोगों की कमाई का मुख्य ज़रिया है. गांव में बेरोजगारी ज़्यादा है. रोजगार की चाहत में अधिकतर लोग शहर पलायन कर चुके हैं.

हैदराबाद में एक ऐप कंपनी में डिलिवरी ब्यॉय का काम करने वाला संतोष ख़बर सुनकर गांव आए हैं.

वो कहते हैं, "हममें से अधिकतर लोग हैदाराबाद में काम करते हैं. घटना की जानकारी मिलने के बाद मैं और मेरे कुछ दोस्त गांव आए हैं. यहां खेती बारिश पर निर्भर है. अगर बारिश अच्छी होती है तो घर चलाना आसान होता है. नहीं तो कमाई के दूसरे रास्ते तलाशने होते हैं. तेलंगाना और महाराष्ट्र की सीमा से लगने के कारण हम कमाने शहर चले जाते हैं."

रास्ते में कई एकड़ परती जमीन दिखते हैं, पर बहुत कम पर ही फसल दिखे.

Image caption हादसे में घायल हुए मल्लिकार्जुन

इस तरह की पहली घटना

एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि गांव में इस तरह की घटना नहीं होती है. वहां आम घटनाएं, जैसे मारपीट, नशे में हिंसा, घरेलू हिंसा जैसी घटनाएं दर्ज होती रही हैं. घटना में आठ पुलिसकर्मी घायल हुए थे.

जिनमें से कुछ गंभीर रूप से घायल हुए हैं.

घटना पर सबसे पहले पहुंचने वाले पुलिस कॉन्स्टेबल मल्लिकार्जुन ने कहा, "मैं अभी भी सो नहीं पाता हूं. जैसे ही नींद लगती है, आंखों में वो दृश्य घूमने लगते हैं. कार में बंद वो तीन लोग हाथ जोड़ कर ज़िंदगी की दुहाई दे रहे थे. उनके चेहरे ख़ून से सने थे. हमलोग भीड़ को जाने कह रहे थे, पर वो मान नहीं रहे थे. वे सभी बहस कर रहे थे और हमलोगों पर ही बच्चा चोर का समर्थन करने के आरोप लगा रहे थे."

घटना के वक़्त मल्लिकार्जुन के बाएं पैर की हड्डी टूट गई थी. उनका बिदर के एक अस्पातल में इलाज चल रहा है.

पिछले दो महीनों में गांव में व्हाट्सऐप के ज़रिए फेक़ न्यूज़ फैलाए जाने की कई घटनाएं सामने आई हैं.

लोगों को जागरूक करने के लिए बिदर ज़िला प्रशासन कई कार्यक्रम चला रहा है. मुरकी गांव में एक पुलिस वाला गांव के लोगों को यह समझा रहा है कि फेक़ वीडियो की पहचान कैसे की जाए.

उन्होंने कहा, "काफ़ी कोशिशों के बावजूद इस तरह की घटना दुर्भाग्यपूर्ण है."

जिला के एसपी डी देवराज ने बताया कि घटना के बाद करीब बीस ऐसे व्हाट्सऐप ग्रुप डिलीट करवाए गए हैं.

मामले में दो एफ़आईआर दर्ज की गई है. चार लोगों को गिरफ़्तार किया गया है. वहीं व्हाट्सऐप ग्रुप से जुड़े करीब 22 लोगों को गिरफ़्तार किया गया है.

इनमें से अधिकतर व्हाट्सऐप ग्रुप के एडमिन हैं. गिरफ़्तार किए गए लोगों में दो महिला और दो नाबालिग शामिल हैं.

जांच में शामिल एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, "घटना के बाद करीब 50 लोगों को हिरासत में लिया गया था. वीडियो की जांच की जा रही है. और भी वीडियो की तलाश जारी है."

गांव में जो भी हुआ, उसके बाद गांव वाले खुश नहीं है. गिरफ़्तार किए गए लोगों में से एक के भाई ने कहा कि गांव वाले गुस्से में हैं. जिस तरह से वे लोग कार भगा रहे थे, उससे यह लग रहा था कि वे बच्चों को अपहरण करना चाहते थे.

उन्होंने कहा कि उनका भाई जेल में है. वो वहां सिर्फ़ खड़ा था. उन्हें न्याय का इंतज़ार है.

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