मुसलमान बीजेपी को वोट नहीं देते: रविशंकर प्रसाद

  • 20 जुलाई 2018
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भारत के पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने हाल ही में देश के मौजूदा हालात पर चिंता जताते हुए कहा था कि नफ़रत और असहिष्णुता से हमारी राष्ट्रीय पहचान ख़तरे में पड़ेगी.

ऐसे में बीबीसी का मशहूर 'हार्डटॉक' कार्यक्रम प्रस्तुत करने वाले स्टीफ़न सकर ने भारत के केंद्रीय कानून और न्यायमंत्री रविशंकर प्रसाद से बात की और पूछा कि क्या आज़ादी मिलने के बाद भारत आज अपने सबसे काले दौरे से गुज़र रहा है?

स्टीफ़न ने पूछा कि हिंदू राष्ट्रवादी पार्टी बीजेपी के नेता नरेंद्र मोदी एक ऐसे देश का नेतृत्व कर रहे हैं जहां 20 करोड़ ग़ैर-हिंदू रहते हैं और भारत जैसे धार्मिक विविधिता वाले देश में बढ़ते सांप्रदायिक तनाव, घृणा और नफ़रत को लेकर कई देशी और विदेशी पर्यवेक्षक चिंता जता चुके हैं.

इन चिंताओं को ख़ारिज करते हुए रविशंकर प्रसाद ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार 'सबका साथ, सबका विकास' के सिद्धांत को दिल में रखकर काम करती है.

तो फिर जनता की चुनी हुई बीजेपी सरकार के 282 लोकसभा सांसदों में से एक भी सांसद मुस्लिम क्यों नहीं है? इस पर रविशंकर प्रसाद ने माना कि बीजेपी को मुसलमानों के ज़्यादा वोट नहीं मिले हैं.

बीजेपी को मुसलमानों के वोट क्यों नहीं मिले? या वह मुसलमानों के वोट चाहती ही नहीं है? क्या हिंदू राष्ट्रवाद पार्टी कही जाने वाली बीजेपी को मुसलमानों के समर्थन के ज़रूरत ही नहीं है?

भारत में मुसलमानों की आबादी अगर तक़रीबन 20 करोड़ है तो फिर उनकी अनदेखी की वजह क्या है?

इस पर रविशंकर प्रसाद ने कहा, "भले ही मुसलमानों ने उन्हें वोट ना किया हो लेकिन उनकी सरकार हमेशा मुसलमानों के विकास के लिए काम करती रही है."

क़ानून मंत्री का दावा है कि उनकी "पार्टी के ख़िलाफ़ चलाए गए तीख़े अभियानों की वजह से ही मुसलमान बीजेपी को वोट नहीं करते."

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'सत्ता दान में नहीं मिली'

रविशंकर प्रसाद ने कहा कि जनता के ज़ोरदार समर्थन से केंद्र की सत्ता में आई बीजेपी ने चार राज्यों को छोड़ अब तक सारे चुनाव जीते हैं.

उन्होंने कहा, "हमें ये सब दान में नहीं मिला, बल्कि हमने जनता के प्यार और साथ से ही सब कुछ हासिल किया है."

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रविशंकर प्रसाद का दावा है कि उनकी सरकार के विकास की वजह से ही जनता ने उन्हें हर बार जिताया है. उन्होंने अपनी सरकार की चलाई कई योजनाएं भी गिनाईं.

लेकिन हाल में हुए कर्नाटक चुनावों में बीजेपी के एक नेता का बयान उनके इन दावों पर सवाल खड़े करता है. एक चुनावी सभा में बीजेपी नेता संजय पाटिल ने कहा था कि इस चुनाव के मुद्दे सड़क, पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं है बल्कि ये चुनाव हिंदू बनाम मुस्लिम है.

इस सवाल पर रविशंकर प्रसाद ने कहा, "पार्टी से जुड़े एक व्यक्ति के बयान को पूरी पार्टी की विचारधारा बताना सही नहीं है."

उन्होंने अपनी बात को दोहराते हुए कहा, "हमारी सरकार विकास करने आई है और लोगों का वोट भी विकास के नाम पर ही मिला है."

लिंचिंग के शिकार मुसलमानों को इंसाफ कब?

मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल की एक ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक़ गौहत्या और बीफ़ रखने के शक़ में अप्रैल 2017 से अब तक कम से कम 10 मुसलमानों को भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला है.

एमनेस्टी इंटरनेशनल के मुताबिक़ इनमें से कई मामलों में बीजेपी के गौरक्षा के अभियान से प्रोत्साहित गौ रक्षकों का हाथ था.

इस पर रविशंकर प्रसाद ने कहा कि एमनेस्टी इंटरनेशनल जैसी संस्था की रिपोर्टों पर भरोसा नहीं किया जाना चाहिए.

उन्होंने आरोप लगाया कि "भारत के मानवाधिकार सम्बन्धी मामलों में एमनेस्टी इंटरनेशनल का रुख हमेशा भेदभाव पूर्ण रहा है."

रविशंकर प्रसाद ने कहा, "कश्मीर की आज़ाद आवाज़ और राइज़िंग कश्मीर अख़बार के संपादक शुजात बुख़ारी की हत्या के मामले में एमनेस्टी इंटरनेशनल चुप रहा. वो इसलिए चुप रहा क्योंकि बुख़ारी की हत्या चरमपंथियों ने की थी."

"भारतीय सेना के एक बहादुर जवान औरंगज़ेब की ईद के ठीक पहले चरमपंथियों ने हत्या कर दी, तब भी एमनेस्टी इंटरनेशनल चुप रहा. एमनेस्टी इंटरनेशनल चरमपंथ से पीड़ित भारतीयों के मानवाधिकारों को लेकर चुप्पी साध लेता है. ये भेदभाव-पूर्ण रवैया जगज़ाहिर है."

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लेकिन प्रधानमंत्री की चुप्पी का क्या?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कथित हिंदू राष्ट्रवादियों द्वारा अंजाम दिए गए सांप्रदायिक हमलों पर बोलने से बचते हैं.

इस संबंध में किए गए स्टीफ़न के सवाल पर रविशंकर प्रसाद ने कहा कि प्रधानमंत्री चुप नहीं है और वह एक जनसभा में ऐसे लोगों को चेतावनी देते हुए बोल चुके हैं कि "उन्हें मत मारो, हिम्मत है तो मुझपर हमला करो."

उन्होंने कहा कि ऐसे कई मामलों में हमलावरों को उम्रक़ैद की सज़ा सुनाई गई है.

लेकिन उम्रक़ैद की सज़ा तो सिर्फ एक मामले में सुनाई गई है, लेकिन ज़्यादातर मामलों में पीड़ितों के परिवार को इंसाफ कब मिलेगा?

इसके जवाब में क़ानून मंत्री ने कहा कि "सारे मामले कोर्ट में हैं और मामले की निष्पक्ष जांच करने के बाद ही फ़ैसला सुनाया जाएगा."

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सुस्त न्याय व्यवस्था

लेकिन भारत की न्याय व्यवस्था इतनी धीमी है कि पीड़ितों को इंसाफ मिलने में ज़माना लग जाता है. सिर्फ़ सुप्रीम कोर्ट में ही 55,000 मामले लंबित है. निचली कोर्टों में तो लंबित मुकदमों की संख्या करोड़ों में है.

लचर न्याय व्यवस्था की वजह ये है कि भारत में 10 लाख लोगों पर सिर्फ एक जज है. देश की तमाम जेलों में बंद करीब दो तिहाई अभियुक्त अपने मुकदमे की बारी का इंतज़ार कर रहे हैं.

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठ जस्टिस ने चीफ जस्टिस पर अविश्वास जताया था और कहा था कि अगर सुप्रीम कोर्ट को बचाया नहीं गया, तो लोकतंत्र खत्म हो जाएगा.

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रविशंकर प्रसाद ने कहा की वो इस बात को मानते हैं कि देश की कानून व्यवस्था की हालत लचर है और वो इसे ठीक करने पर काम कर रहे हैं.

उन्होंने कहा कि वो "डिजिटल तकनीक की मदद से देश की न्याय व्यवस्था को गति देने की कोशिश कर रहे हैं."

क़ानून मंत्री का दावा है कि सुप्रीम कोर्ट, सभी हाईकोर्ट और 16 हज़ार ज़िला अदालतों के कामकाज को डिजिटल कर दिया गया है.

उन्होंने कहा, "हमने जजों की संख्या बढ़ाई है, कोर्ट में बेहतर मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराई हैं, कोर्ट हॉल की संख्या बढ़ाई है."

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भ्रष्टाचार का दीमक

क़ानून मंत्री देश की सुस्त कानून व्यवस्था को ठीक करने की बात तो करते हैं लेकिन इस इंटरव्यू के दौरान वो व्यवस्था में भ्रष्टाचार की ख़बरों को टालते नज़र आते हैं.

एक सर्वे में शामिल भारतीयों में से 42 लोगों ने बताया कि उन्हें कोर्ट में अपना काम करवाने के लिए रिश्वत देनी पड़ी.

इसके अलावा एक और सर्वे में दावा किया गया पुलिस महकमे में एक चौथाई सीटें खाली हैं. जबकि भारत सरकार ने संसद को बताया था कि पुलिस बल में 20 लाख और अफ़सर बढ़ जाएंगे.

इस पर रविशंकर प्रसाद ने कहा, "मैं पूरे देश की क़ानून-व्यवस्था को काबू में नहीं कर सकता. उन्होंने कहा कि भारत एक संघीय राज्य है और क़ानून-व्यवस्था सही रखना राज्य सरकारों का काम है."

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तो क्या क़ानून-व्यवस्था ठीक करने की कोई शक्ति केंद्रीय कानून मंत्री के पास नहीं है?

रविशंकर प्रसाद ने कहा कि वो सिर्फ़ ये कर सकते हैं कि राज्यों को मूलभूत सुविधाएं दे सकते हैं, उन्हें ट्रेनिंग दे सकते हैं.

उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री ने ख़ुद राज्यों की पुलिस को उनके सामने पेश आ रही चुनौतियों निपटने का तरीका बताया है."

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महिलाओं की सुरक्षा में भारत की स्थिति

भारत के सामने पेश आ रही तमाम चुनौतियों में से सबसे बड़ी चुनौती है महिलाओं की सुरक्षा.

हाल ही में 550 विशेषज्ञों के साथ किए गए एक ग्लोबल सर्वे में कहा गया कि भारत महिलाओं के लिए दुनिया का सबसे ख़तरनाक देश है.

रविशंकर प्रसाद ने कहा, "इतनी बड़ी दुनिया में सिर्फ 550 लोगों से बात कर ये बता देना कि कौन-सा देश ख़तरनाक है और कौन-सा नहीं, ऐसा सर्वे कभी भी सटीक नहीं हो सकता."

हाल ही में उत्तर भारत के कश्मीर में आठ साल की एक बच्ची के साथ सामूहिक बलात्कार की ख़बर आई थी. पुलिस के मुताबिक़ बच्ची को नशीली दवाएं देकर बार-बार रेप किया गया. बच्ची को मारने से कुछ वक्त पहले तक एक मंदिर में रखा गया.

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इस मामले में हैरान करने वाली बात ये थी कि कुछ ही दिनों में इस घटना ने सांप्रदायिक तनाव का रंग ले लिया. कुछ स्थानीय बीजेपी नेताओं ने उन हिंदुओं का पक्ष लिया जिनका दावा था कि ये उनके अधिकारों पर हमला है, ना कि पीड़ित बच्ची के अधिकारों पर.

रविशंकर प्रसाद ने कहा कि मामले में तुरंत जांच कर चार्जशीट दाख़िल की गई थी और उन बीजेपी नेताओं को अपने मंत्री पद से इस्तीफ़ा देना पड़ा.

उन्होंने कहा वो इस मामले पर और "कुछ टिप्पणी नहीं कर सकते लेकिन ये ज़रूर कह सकते हैं कि बलात्कार के मामले में उनकी सरकार ने कानूनों को और कड़ा किया है."

उन्होंने बताया कि अब अगर कोई 12 साल के कम उम्र की बच्ची के साथ बलात्कार करता है तो उसे फांसी की सज़ा दी जाएगी और अगर बच्ची की उम्र 12 से 16 साल के बीच है तो 20 साल की सज़ा का प्रावधान किया गया है.

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कश्मीर में मावाधिकारों का उल्लंघन?

हाल ही में कश्मीर में मानवाधिकारों के उल्लंघन को लेकर संयुक्त राष्ट्र ने गंभीर सवाल उठाए थे. यूएन ने एक रिपोर्ट में कहा कि भारतीय सुरक्षाबलों ने जम्मू-कश्मीर के आम नागरिकों पर ज़रूरत से ज़्यादा बल प्रयोग किया, जिसके चलते कई लोगों की मौतें हुई और बहुत से लोग घायल हुए.

संयुक्त राष्ट्र ने इस मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय जांच कराए जाने की भी बात कही.

भारत के कानून मंत्री ने इस रिपोर्ट को ख़ारिज किया और कहा कि ये रिपोर्ट बदनीयती से तैयार की गई थी. उनका आरोप है कि इस रिपोर्ट को तैयार करने वाले शख़्स का भारत के खिलाफ कोई एजेंडा था.

उन्होंने बताया कि भारत संयुक्त राष्ट्र के सामने भी इस रिपोर्ट का विरोध कर चुका है.

रविशंकर प्रसाद ने कहा, "कश्मीर का युवा आज भारतीय सुरक्षाबल में भर्ती हो रहा है और खेल में दिलचस्पी ले रहा है. उनका आरोप है कि पाकिस्तान यहां का माहौल ख़राब करने के लिए एक एजेंडे के तहत काम कर रहा है."

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'आज़ादी के बाद आज सबसे अंधकारमय दौर'

कुछ वक्त पहले 49 सेवानिवृत्त सिविल सेवा अधिकारियों ने प्रधानमंत्री मोदी को खुला पत्र लिखा और उन पर डर और नफ़रत का माहौल पैदा करने का आरोप लगाया.

उन्होंने कहा कि भारत में आज़ादी के बाद, आज सबसे अंधकारमय दौर है.

रविशंकर प्रसाद ने इन सेवानिवृत्त अधिकारियों के आरोपों को ख़ारिज करते हुए कहा कि इनमें से 90 फासदी ने 2014 के आम चुनाव में जनता से नरेंद्र मोदी को वोट ना करने की अपील की थी.

उन्होंने कहा कि देश में 200 से ज़्यादा ऐसे सिविल सेवा अधिकारी मौजूद हैं जो मोदी सरकार की नीतियों में भरोसा करते हैं और उन्हें सराहते हैं.

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तो फिर जनता का भरोसा कैसे कम हु?

कई सर्वे बताते हैं कि देश कि जनता का भरोसा मोदी सरकार में कम हुआ है. किसानों समेत आम जनता का मानना है कि 2014 में किए वादे नरेंद्र मोदी ने पूरे नहीं किए.

सरकार दावा करती है कि बीते सालों में भ्रष्टाचार की कमर टूटी है. लेकिन कई सर्वों में सामने आया है कि अब भी देश में हर स्तर पर भ्रष्टाचार है.

रविशंकर प्रसाद ने इन सब तथ्यों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि "अगर बंगाल की ममता सरकार कुछ करती है तो इसके लिए केंद्र की बीजेपी सरकार पर आरोप नहीं लगाया जा सकता."

उन्होंने दावा किया कि मोदी सरकार ने आने के बाद डिजिटल तकनीक के ज़रिए भ्रष्टाचार खत्म करने की कोशिश की और बहुत हद तक उसमें कामयाब भी रही.

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