राहुल गांधी ने ये भाषण देकर पीएम नरेंद्र मोदी को दी 'झप्पी'

  • 20 जुलाई 2018
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- प्रधानमंत्री चौकीदार नहीं, भागीदार

- डरते हैं मोदी और अमित शाह

- रफ़ाएल समझौते में व्यापारी को फ़ायदा पहुंचाया

- देश पर जुमलों की स्ट्राइक

- महिलाओं, दलितों, आदिवासियों और अल्पसंख्यकों पर हमले

-मुझसे नज़र नहीं मिला सकते मोदी

-वो मुझे पप्पू कहें, मेरे मन में नफ़रत नहीं

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने अविश्वास प्रस्ताव के दौरान संसद में एक लंबा भाषण दिया और अंत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गले लगा लिया.

राहुल गांधी ने लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर अपना भाषण अंग्रेज़ी में शुरू किया. इस दौरान सदन में हिंदी में बोलने की मांग उठी तो उन्होंने कहा, "हिंदी में भी बोलूंगा, घबराइये मत."

जुमला स्ट्राइक

राहुल गांधी ने अविश्वास प्रस्ताव लाने वाली टीडीपी को संबोधित करते हुए कहा कि आप 21वीं सदी के राजनीतिक हथियार के पीड़ित हैं. और आप अकेले नहीं है. इस देश में आप जैसे बहुत से लोग हैं जो इससे पीड़ित हैं. ये राजनीतिक हथियार है जिसे 'जुमला स्ट्राइक' कहते हैं.

राहुल ने कहा कि जुमला स्ट्राइक के ये लक्षण होते हैं- पहले बहुत उत्साह होता है, ख़ुशी होती है और फिर झटका लगता है और उसके बाद आठ घंटे के लंबे भाषण आते हैं.

जुमला स्ट्राइक से इस देश के किसान भी पीड़ित है. युवा पीड़ित हैं, दलित पीड़ित हैं, आदिवासी और महिलाएं भी इस जुमला स्ट्राइक से पीड़ित हैं.

आपने कहा कि प्रधानमंत्री के शब्दों का मतलब होना चाहिए और यही सवाल आज पूरा हिंदुस्तान पूछ रहा है.

पंद्रह लाख रुपए हर व्यक्ति के बैंक अकाउंट में- ये है जुमला स्ट्राइक नंबर एक.

जुमला स्ट्राइक नंबर दो- हर साल दो करोड़ युवाओं को रोज़गार. आपने दो करोड़ लोगों को रोज़गार देने की बात की थी. 2016-17 में पूरे हिंदुस्तान में सिर्फ़ चार लाख युवाओं को रोज़गार मिला. ये श्रम विभाग के आंकड़े हैं.

हिंदुस्तान के युवाओं ने प्रधानमंत्री पर भरोसा किया था. हर भाषण में प्रधानमंत्री ने कहा था कि दो करोड़ युवाओं को रोज़गार दूंगा और सच्चाई ये है कि सिर्फ़ चार लाख युवाओं को रोज़गार मिला.

दूसरे तरीके से कहता हूं- चीन 50 हज़ार युवाओं को 24 घंटे में रोज़गार देता है उसकी तुलना में आप चार सौ युवाओं को ही रोज़गार देते हैं.

जहां भी जाते हैं रोज़गार की बात करते हैं. कभी कहते हैं पकौड़े बनाओ, दुकान खोले.

नोटबंदी से बेरोज़गारी

रोज़गार कौन लाएगा. रोज़गार छोटे और मध्यम उद्योग लाएंगे. निर्माण उद्योग से आएगा. आपने पता नहीं क्या किया, पता नहीं कहां से आपको संदेश मिला कि आपने रात के आठ बजे आपने कालेधन पर कार्रवाई करते हुए नोटबंदी कर दी.

शायद समझ रही थी कि किसान, ग़रीब, मज़दूर अपना धंधा कैश में चलाते हैं. मैं सूरत गया और सूरत के लोगों ने मुझे बताया कि प्रधानमंत्री ने सबसे बड़ी चोट हमें मारी हैं. और आज बेरोज़गारी हिंदुस्तान में सात साल में सबसे ज़्यादा है. ये है नरेंद्र मोदी के, प्रधानमंत्री जी के, शब्दों का अर्थ.

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कांग्रेस पार्टी लाई थी. आपने विरोध किया था. गुजरात के मुख्यमंत्री ने विरोध किया था. हम चाहते थे कि एक जीएसटी हो. पेट्रोल और डीज़ल उस जीएसटी में हो. पूरे हिंदुस्तान के लिए एक टैक्स लगे और कम से कम विघटन हो. नरेंद्र मोदी जी की पांच अलग-अलग जीएसटी हैं और छोटे-छोटे दुकानदारों के घरों में आयकर विभाग को भेज दिया गया है.

प्रधानमंत्री बाहर जाते हैं, ओबामा के पास, ट्रंप के पास जाते हैं अपना जो सुरक्षा घेरा है उससे बाहर निकलते हैं. प्रधानमंत्री की छोटे लोगों से बात नहीं होती है. प्रधानमंत्री की बात सूट-बूट वाले पंद्रह बीस बड़े व्यापारियों से होती है.

छोटे लोगों की बात, ग़रीबों की बाद प्रधानमंत्री तक नहीं पहुंच पाती है. रोज़गार की पूरी व्यवस्था को सरकार ने ज़बरदस्त ठोकर मारी है. बेरोज़गारी फैलाई है.

जो पहले छोटी दुकानें, छोटे व्यपार चलाकर पैसे कमाते थे उनकी जेब में सरकार ने हाथ डालकर पैसा चुरा लिया है और इस सच्चाई को बदला नहीं जा सकता है.

जियो के इश्तेहार पर प्रधानमंत्री का फोटो आ सकता है और वो जो शक्तियां हैं जो इनकी मदद करती हैं, वो दस बीस बड़े-बड़े व्यापारी हैं जिनकी ये मदद करते हैं, लेकिन बाक़ी हिंदुस्तान के लिए, ग़रीबों के लिए, कमज़ोरों के लिए दिल में थोड़ी सी भी जगह नहीं है.

प्रधानमंत्री ने कहा था कि मैं देश का चौकीदार हूं, मैं चौकीदारी करूंगा. लेकिन जब अमित शाह के बेटे जय शाह (राहुल ने जब जय शाह का नाम लिया तो संसद में हंगामा होने लगा और लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि नाम रिकॉर्ड पर नहीं जाएगा), प्रधानमंत्री के मित्र का पुत्र अपनी आमदनी को सौलह हज़ार गुणा बना लेता है तब प्रधानमंत्री के मुंह से एक शब्द नहीं निकलता है.

रफ़ाएल सौदे पर सवाल

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रफ़ाएल हवाई जहाज़ हमारी यूपीए की डील में 520 करोड़ रुपए प्रति हवाई जहाज़ था लेकिन पता नहीं क्या हुआ, किससे बात हुई, प्रधानमंत्री फ्रांस गए, जिसके साथ गए पूरा देश जानता है और जादू से हवाई जहाज़ का दाम 1600 करोड़ रुपए प्रति हवाई जहाज हो गया.

रक्षामंत्री यहां बैठी हैं, उन्होंने पहले कहा कि मैं देश को हवाई जहाज़ का दाम बताऊंगी. उसके बाद रक्षा मंत्री ने स्पष्ट कह दिया कि मैं ये आंकड़ा नहीं दे सकती हूं क्योंकि फ्रांस की सरकार और हिंदुस्तान की सरकार के बीच में एक गुप्त समझौता है. मैं स्वयं फ्रांस के राष्ट्रपति से मिला और उनसे ये सवाल पूछा कि क्या ऐसा कोई समझौता भारत और फ्रांस की सरकार के बीच है और उन्होंने मुझे बताया कि ऐसा कोई समझौता नहीं है. ये सच्चाई है और उन्होंने मुझे बताया कि हमें इससे कोई ऐतराज नहीं है और आप ये बात पूरे हिंदुस्तान को बताइये.

नरेंद्र मोदी के दबाव में आकर निर्मला सीतारमण जी ने देश को झूठ बोला है, किसकी मदद हो रही है, क्यों हो रही है, निर्मला जी, प्रधानमंत्री जी, आप देश को बताइये. (रफ़ाएल सौदे पर आरोपों के बाद भी लोकसभा में भारी हंगामा हुआ)

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अविश्वास प्रस्ताव पर लंबा और जोशीला भाषण देने के बाद राहुल ने मोदी को गले लगा लिया.

सभी प्रधानमंत्री और कुछ उद्योगपतियों के बीच के रिश्तों को समझते हैं और देखते हैं. और सब ये देखते हैं कि भारत के प्रधानमंत्री की जो मार्केटिंग की जा रही है और उसमें लग रहा है पैसा कहां से आ रहा है. सब ये समझते हैं कि ये पैसा कहां से आर रहा है. उनमें से एक व्यक्ति को रफ़ाएल का सौदा दिया गया और उस व्यक्ति को हज़ारों करोड़ रुपए का फ़ायदा हुआ.

ये कॉन्ट्रैक्ट हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्लस लिमिटेड से लेकर उस व्यक्ति को दिया गया और उसे लगभग चालीस हज़ार करोड़ रुपए का फ़ायदा हुआ. सच ये है. अब प्रधानमंत्री को इस सदन में ये जवाब देना चाहिए कि क्या सुरक्षा पर संसदीय समिति ने ये फ़ैसला लिया या नहीं. प्रधानमंत्री को भी बताना चाहिए कि ये कॉन्ट्रैक्ट एचएएल से लेकर एक व्यापारी को क्यों दिया गया, वो भी उस व्यापारी को जिस पर पैंतीस हज़ार करोड़ का क़र्ज़ा है और जिसने कभी कोई विमान नहीं बताया है. वो बताएं कि एक व्यापारी को फ़ायदा क्यों पहुंचाया गया.

प्रधानमंत्री मोदी की ओर इशारा करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि मैं देख रहा हूं कि वो मुस्कुरा रहे हैं लेकिन भीतर से वो घबराए हुए हैं, वो मुझसे नज़रें चुराने की कोशिश कर रहे हैं, वो मेरी आंखों में नहीं देख पा रहे हैं, मैं इस बात को समझ सकता हूं क्योंकि प्रधानमंत्री देश के लिए वफादार नहीं रहे हैं. ये तथ्य है. अब आगे बढ़ते हैं.

(राहुल गांधी के इन आरोपों के बाद भाजपा की ओर से अनंत कुमार ने संसद के नियमों का हवाला दिया. उन्होंने कहा कि बिना नोटिस दिए किसी पर आरोप नहीं लगा सकते हैं. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी अपने भाषण में संसद के नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं और अनर्गल आरोप लगा रहे हैं.)

पूरे देश ने अभी देखा है, मैंने प्रधानमंत्री के बारे में साफ-साफ बोला है और प्रधानमंत्री अपनी नज़रें मुझसे नहीं मिला सकते हैं, मेरी आंख में आंख डालकर नहीं देख सकते हैं वो कभी इधर देख रहे हैं और कभी उधर देख रहे हैं. ये पल देश ने देख लिया है, देश को समझ में आ गया है कि चौकीदार नहीं है, भागीदार है.

चीन के सामने झुक गए मोदी

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अब चलते हैं विदेश नीति पर. प्रधानमंत्री ने चीन के राष्ट्रपति के साथ गुजरात में नदी के किनारे झूला झूला था. उसके बाद उसी समय चीन के हज़ार सैनिक हिंदुस्तान की ज़मीन के अंदर थे. उसके बाद चीन के राष्ट्रपति वापस गए और अपनी सेना को डोकलाम में डालते हैं. हमारे सैनिकों ने अपनी शक्ति दिखाई और वो चीन के सामने खड़े हुए. मगर उसी के कुछ दिन बाद प्रधानमंत्री चीन जाते हैं और बिना एजेंडा के वुहान में चीन के सामने कहते हैं कि बिना एजेंडा बात होगी, डोकलाम को हम यहां नहीं उठाएंगे. ये बिना एजेंडा नहीं था ये चीन का एजेंडा था और चीन के सामने जो हमारे सैनिक खड़े हुए, वो काम हमारे प्रधानमंत्री नहीं कर पाए. सैनिकों को प्रधानमंत्री ने धोखा दिया. ये सच्चाई है, इसे बदला नहीं जा सकता है.

किसानों का क़र्ज़ा माफ़ नहीं

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किसान कहता है प्रधानमंत्री जी आपने ढाई लाख करोड़ हिंदुस्तान के सबसे अमीर बीस-पच्चीस उद्योगपतियों का क़र्ज़ा माफ़ किया. किसान हाथ जोड़कर कहते हैं कि हमारा भी थोड़ा सा माफ़ कर दीजिए और वित्तमंत्री कहते हैं कि किसानों का क़र्ज़ा माफ़ नहीं होगा, उद्योगपतियों का होगा क्योंकि तुम लोगों में शक्ति नहीं है, दम नहीं है, तुम सूट नहीं पहनते, बूट नहीं पहनते.

किसान का बेटा स्कूटर मोटरसाइकिल चलाता है, पूरी दुनिया में पेट्रोल के दाम गिर रहे हैं और हिंदुस्तान में बढ़ रहे हैं क्योंकि नरेंद्र मोदी अपने मित्रों की जेब में पैसे डालना चाहते हैं.

राहुल गांधी के प्रधानमंत्री पर आरोप लगाने के बाद सदन में जोरदार हंगामा हुआ और कार्रवाई पौने दो बजे तक के लिए रद्द कर दी गई. इस दौरान राहुल गांधी ने बार बार सत्तापक्ष को संबोधित करते हुए- डरो मत.

राहुल ने अपनी बात फिर से शुरू करते हुए कहा- सच्चाई से डरो मत.

किसानों की बात हो रही थी, किसानों ने हाथ जोड़कर प्रधानमंत्री से कहा था कि हमारा भी आप क़र्ज़ा माफ़ कीजिए. ढाई लाख करोड़ रुपए अमीर लोगों के माफ़ किए लेकिन किसानों की बात नहीं सुनी.

कुछ दिन ही पहले एक नई जुमला स्ट्राइक हुई. एमएसपी की जुमला स्ट्राइक. मैं किसानों को बताना चाहता हूं कि एमएसपी में प्रधानमंत्री जी ने पूरे देश में किसानों को दस हज़ार करोड़ रुपए का फ़ायदा दिया है वहीं कर्नाटक की सरकार ने चौंतीस हज़ार करोड़ रुपए का फ़ायदा अपने किसानों को दिया है.

भीड़ की हिंसा का मुद्दा

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अब महिलाओं की बात करते हैं. कुछ ही दिन पहले एकोनॉमिस्ट पत्रिका के कवर पर लिखा था कि हिंदुस्तान अपनी महिलाओं की रक्षा नहीं कर पा रहा है. विदेशों में भारत को लेकर राय है कि हिंदुस्तान पहली बार अपने इतिहास में अपनी महिलाओं की रक्षा नहीं कर पा रहा है. गैंगरेप होता है, महिलाओं पर अत्याचार होता है, जहां भी देखो पूरे देश में महिलाओं, दलितों, आदिवासियों और अल्पसंख्यकों पर अत्याचार बढ़ रहा है. लोग मारे जा रहे हैं, पीटे जा रहे हैं, कुचले जा रहे हैं और प्रधानमंत्री के मुंह से एक शब्द नहीं निकल रहा है. क्या दलित, आदिवासी, अल्पसंख्यक या महिलाएं भारत के नागरिक नहीं है. उलटा उनके मंत्री जाकर उन पर हार डालते हैं.

जहां भी देखों कहीं न कहीं किसी हिंदुस्तानी को मारा जा रहा है, पीटा जा रहा है, दबाया-कुचला जा रहा है लेकिन प्रधानमंत्री एक शब्द नहीं कहते हैं. किसी न किसी हिंदुस्तानी की हत्या हो रही है, पीटा जा रहा है, मारा जा रहा है, दबाया जा रहा है. ये देश को शोभा नहीं देता है. जब ऐसी कोई बात होती है तो प्रधानमंत्री का फ़र्ज़ बनता है कि उनके दिल के जो अंदर है उसे देश को बताएं.

जब भी किसी को मारा जाता है, दबाया जाता है, पीटा जाता है, कुचला जाता है तब वो उस व्यक्ति पर हमला नहीं होता है, बल्कि वो अंबेडकर के संविधान पर और इस सदन पर हमला होता है. जब आपके मंत्री संविधान को बदलने की बाद करते हैं तो वो अंबेडकर पर और पूरे हिंदुस्तान पर हमला करते हैं और हम इस बात को नहीं सहेंगे.

सत्ता खोने से डरते हैं मोदी और शाह

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अब मैं अपने भाषण की एक अहम बात कहूंगा. ये रोचक है, आप इसे पसंद करेंगे. प्रधानमंत्री और अमित शाह दो अलग-अलग तरह के राजनेता हैं. प्रधानमंत्री और बीजेपी के अध्यक्ष दो अलग-अलग तरह के नेता है. वो हम जैसे नेता नहीं है, वो हमसे अलग हैं.

हमारे और प्रधानमंत्री और बीजेपी के अध्यक्ष में फ़र्क ये है कि हम सत्ता को खोने के लिए तैयार हैं, हम सत्ता के भीतर और बाहर रहते हैं, लेकिन प्रधानमंत्री और बीजेपी के अध्यक्ष सत्ता से बाहर होना ही नहीं चाहते हैं क्योंकि जैसे ही वो सत्ता से बाहर होंगे उनके ख़िलाफ़ कई प्रक्रियाएं शुरू हो जाएंगी. इस देश के प्रधानमंत्री और बीजेपी के अध्यक्ष डर में रहते हैं और ये डर भारत पर हावी हो रहा है. ये डर भारत की हर आवाज़ को दबाना चाहता है, ये ही सच्चाई है.

अभी जब मैं अंदर गया विपक्ष के संसद सदस्यों ने मुझे बधाई दी और कहा कि आप बहुत अच्छा बोले. मैं हैरान हुआ कि आपके ही सदस्यों ने मुझे बधाई दी. क्योंकि ये आवाज़ आपके अंदर भी है, ये आवाज़ सिर्फ़ इधर नहीं है, ये बीजेपी में भी है. ये अकाली दल की नेता मुझे मुस्कुरा कर देख रहीं थी क्योंकि मैं जो बोल रहा हूं वो भावना पूरे देश में है और हमारा काम इस भावना को जोड़ने का है. पूरा का पूरा विपक्ष और आपके बहुत सारे लोग मिलकर प्रधानमंत्री को हराने जा रहे हैं.

अंत में मैं एक बात आपको बताना चाहता हूं. आप सोचोगे कि मेरे दिल में प्रधानमंत्री के ख़िलाफ़ ग़ुस्सा है, क्रोध है, नफ़रत है मगर मैं आपको दिल से कहता हूं कि मैं प्रधानमंत्री, बीजेपी और आरएसएस का बहुत आभारी हूं कि इन्होंने मुझे कांग्रेस का मतलब समझाया, हिंदुस्तानी होने का मतलब सिखाया. हिंदुस्तानी का मतलब- चाहे तुम्हें कोई कुछ भी कह दे, गाली दे, लाठी मारे आपके दिल में उसके लिए प्यार होना चाहिए. ये आपने, मोदी जी ने और आरएसएस ने मुझे सिखाया है और इसके लिए मैं आपको दिल से धन्यवाद करना चाहता हूं

...और राहुल ने मोदी को गले लगा लिया

आपने मुझे मेरा धर्म सिखाया, आपने मुझे शिव का मतलब सिखाया, मुझे मेरे हिंदू होने का मतलब समझाया. मैं इसके लिए आपका दिल से आभार करता हूं. ये हमारे देश का इतिहास है. आपके भीतर मेरे लिए नफ़रत है, ग़ुस्सा है, आपके लिए मैं पप्पू हूं. आप मुझे अलग-अलग गाली दे सकते हो. मगर मेरे अंदर आपके प्रति इतना सा भी गुस्सा, इतना सा भी क्रोध, इतनी सी भी नफ़रत नहीं है. मैं कांग्रेस हूं और कांग्रेस ने और इस भावना ने इस देश को बनाया है और इस बात को आप मत भूलिए. ये भावना आपके भीतर भी है और ये भावना मैं आपके भीतर पैदा करूंगा और आपको भी कांग्रेस में बदल दूंगा.

ये कहकर राहुल गांधी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर गए और उन्हें गले लगा लिया. मोदी पहले थोड़ा सकपकाए और फिर राहुल को वापस बुलाकर उनसे हाथ मिलाया.

इसके बाद राहुल गांधी अपनी सीट पर गए और कहा- प्रधानमंत्री जी हिंदू होने का ये मतलब होता है. चाहें आप मेरे ऊपर जो भी फेंकों, जितना भी फेंको, मैं आपको गले लगाउंगा.

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