अविश्वास प्रस्ताव पर बहस: आख़िर क्यों बीजेडी ने किया था संसद से वॉक आउट?

  • 21 जुलाई 2018
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लोकसभा में शुक्रवार को अविश्वास प्रस्ताव पर बहस शुरू होने से पहले ही बीजू जनता दल (बीजेडी) के सदस्यों ने 'वॉक आउट' कर सब को अचरज में डाल दिया.

हालांकि गुरुवार को बीजेडी के संसदीय दल की बैठक के बाद आधिकारिक रूप से ये कहा गया था कि विश्वास मत पर पार्टी के रवैये के बारे में अंतिम निर्णय सुप्रीमो नवीन पटनायक लेंगे और उनके निर्देश के अनुसार ही पार्टी के सांसद शुक्रवार को संसद में अपना पक्ष रखेंगे.

लेकिन पार्टी सूत्रों से गुरुवार शाम को ही पता चल गया था कि बीजेडी विश्वास मत पर बहस में हिस्सा लेगी और उसके बाद सदन का बहिष्कार करेगी.

ये भी तय हो गया था कि पार्टी को मिले 15 मिनट के समय में पुरी के सांसद पिनाकी मिश्र पार्टी की ओर से बहस में हिस्सा लेंगे और पार्टी का पक्ष रखेंगे.

इसीलिए शुक्रवार सुबह जब बहस से पहले ही बीजेडी सांसद सदन से उठकर बाहर चले गए तो सभी को आश्चर्य होना स्वाभाविक था.

सदन से वॉक आउट करने से पहले बीजेडी संसदीय दल के नेता भर्तृहरि महताब ने कहा कि यूपीए सरकार की तरह एनडीए सरकार ने भी ओडिशा की अनदेखी की है. राज्य की जायज़ मांगों को भी स्वीकार नहीं किया गया. इसलिए इस बहस में हिस्सा लेने से राज्य को कोई फ़ायदा नहीं होने वाला.

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ये फ़ैसला किसके हित में?

लेकिन इस फ़ैसले के पीछे उन्होंने जो कारण बताया, वो किसी को संतुष्ट नहीं कर पाया.

सब को यही लग रहा है कि 'भाजपा और कांग्रेस, दोनों से सम दूरी' की बीजेडी की नीति की पोल खुल गई है और ये साबित हो गया है कि पार्टी परोक्ष रूप से ही सही भाजपा का समर्थन करती है.

बीजेडी के इस निर्णय के बाद राज्य भाजपा ने अपना मौक़ा ताड़ा और सत्तारूढ़ दल को आड़े हाथों लिया.

भाजपा राज्य इकाई के उपाध्यक्ष समीर महंति ने कहा, "बीजेडी आये दिन केंद्र सरकार की अवहेलना की रट लगाये रहती है. यही आरोप लगाकर मुख्यमंत्री लगातार केंद्र सरकार को चिट्ठी लिखते रहते हैं. लेकिन जब उन्हें मौक़ा मिला देश के सबसे ऊँचे फ़ोरम में ये बात रखने का, तो पार्टी को बहस में हिस्सा लेना भी गंवारा नहीं हुआ. ये दोगलापन नहीं है तो और क्या है?"

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष निरंजन पटनायक ने भी इस मुद्दे पर बीजेडी पर निशाना साधा.

उन्होंने कहा, "सम-दूरी एक जुमले के सिवाय कुछ नहीं है. बहिष्कार के फ़ैसले पर बीजेडी ने ओडिशा के हितों का हवाला दिया है. लेकिन सच्चाई ये है कि ये सब ओडिशा के स्वार्थ के लिए नहीं, बल्कि अपने स्वार्थ के लिए हुआ निर्णय है."

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ये पहला मौक़ा नहीं

  • वैसे यह पहला मौक़ा नहीं है जब बीजेडी, भाजपा और नरेंद्र मोदी के ख़िलाफ़ खड़े होने से कतराई है.
  • पिछले साल मार्च में जब यूपीए अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने विरोधी दलों को डिनर पर बुलाया था तो बीजेडी उसमें शामिल नहीं हुई.
  • मई में कर्नाटक के नए मुख्यमंत्री एच. डी. कुमारस्वामी के शपथग्रहण के अवसर पर बेंगलुरु में हुए विपक्षी नेताओं के जमघट से भी बीजेडी ने अपने आप को दूर रखा.
  • इससे पहले नोटबंदी, सर्जिकल स्ट्राइक, 'एक देश-एक चुनाव' जैसे कई मुद्दों पर बीजेडी ने केंद्र सरकार का समर्थन किया है.
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बीजेडी का भय

सच ये है कि 2019 के चुनाव से पहले बीजेडी ऐसा कुछ नहीं करना चाहती जो मोदी सरकार को नाराज़ कर दे.

और इसका कारण है नवीन पटनायक सरकार और बीजेडी पर मंडरा रहा सीबीआई का ख़तरा. हाल के दिनों में केंद्र सरकार ने स्पष्ट सूचना दी है कि बीजेडी को विपक्षी खेमें में जाने से रोकने के लिए वह सीबीआई का इस्तेमाल करने से नहीं कतराएगी.

इसी क्रम में सबसे पहले चार साल से रुक-रुककर धीमी गति से चल रहे हज़ारों करोड़ के चिट फ़ंड घोटाले की सीबीआई जाँच को तेज किया गया.

सीबीआई ने हाल ही में इस संदर्भ में दो आईपीएस अफ़सरों समेत नवीन सरकार के कुछ आला अधिकारियों और बीजेडी नेताओं को नोटिस ज़ारी किया है.

फिर केंद्रीय शिपिंग मंत्रालय ने 2009 में पारादीप के पास समुंद्र में डूब गई मंगोलियन जहाज़ 'एम.वी. ब्लैक रोज़' की जाँच सीबीआई के सुपुर्द कर दी.

माना जा रहा है कि इस जहाज़ से गैर क़ानूनी ढंग से निकाले गए 23,000 टन आयरन ओर (लोहे के पत्थर) का असली मालिक जाजपुर ज़िले का एक प्रभावशाली बीजेडी नेता और विधायक था.

इसके कुछ ही दिन बाद केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय के निदेशानुसार, इंडियन ऑयल कारपोरेशन ने हाल ही में गिरफ़्तार हुए केंद्रापाड़ा के गैंगस्टर सैयद उस्मान अली उर्फ़ 'टिटो' की पत्नी के नाम केंद्रापाड़ा और पारादीप में दो पेट्रोल पंप कैसे आवंटित हुए, इसकी जाँच के लिए सीबीआई को पत्र लिखा.

ये सभी मामले चुनाव में बीजेडी के लिए समस्या खड़ी कर सकते हैं.

ऐसे में खुलकर मोदी सरकार के ख़िलाफ़ खड़ा होना बीजेडी के लिए महंगा पड़ सकता है. यही कारण है कि 'सम-दूरी' की आड़ में पार्टी परोक्ष रूप से एनडीए गठबंधन के साथ खड़ी रही है.

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