'खेलो इंडिया' के खिलाड़ियों से भाजपा दफ़्तर में 'बंटवाए' चाय-बिस्किट

  • 23 जुलाई 2018
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तारीख़ः 31 जनवरी, 2018. स्थानः इंदिरा गांधी स्टेडियम, नई दिल्ली.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हज़ारों बच्चों के साथ वहां उपस्थित मंत्री और अधिकारियों को शपथ दिलाते हैं...

"खेल-खिलाड़ी का हम हौसला बढ़ाएंगे. हम शपथ लेते हैं कि हार-जीत से आगे बढ़ कर, 'मैं' को 'हम' बनाएंगे."

"खेल से खिलेंगे हम, देश का नाम बढ़ाएंगे. संकल्प सिद्धि लाएंगे, हम न्यू इंडिया बनाएंगे."

उनके साथ स्टेडियम में मौजूद लोग भी ये पंक्तियां दोहराते हैं.

ठीक पांच महीने और 22 दिन बाद, रविवार को उनकी ही पार्टी के एक कार्यालय में तस्वीर ठीक उलट दिखी.

आरोप है कि सरकारी कार्यक्रम 'खेलो इंडिया' के तहत चुने गए खिलाड़ियों से झारखंड के प्रदेश भाजपा कार्यालय में चाय-बिस्किट "बंटवाए" गए.

झारखंड के विभिन्न हिस्सों से चुने गए इन खिलाड़ियों को राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए दिल्ली लाया गया है. दिल्ली रवानगी से पहले उनका एक सम्मान समारोह बुलाया गया था, जिसमें कथित घटना हुई. इसका वीडियो सोशल मीडिया पर भी साझा किया जा रहा है.

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Image caption भाजपा प्रदेश कार्यालय में चाय-बिस्किट बांटते खिलाड़ी

सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल

सोशल मीडिया पर साझा किए जा रहे वीडियो में दिख रहा है कि एक खिलाड़ी हाथों में ट्रे लेकर बिस्किट और दूसरा केतली लेकर चाय बांट रहा है. पीछे हॉल की दीवार पर एक बैनर लगा है, जिस पर लिखा है, 'भारतीय जनता पार्टी, झारखंड प्रदेश.'

ये खिलाड़ी दिल्ली में 24 और 25 जुलाई को होने वाली राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लेंगे.

तालकटोरा स्टेडियम में होने वाली प्रतियोगिताओं से पहले देशभर से आए इन खिलाड़ियों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह मुलाक़ात करेंगे.

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Image caption पीली जर्सी में खिलाड़ी आगे की पंक्ति में बैठे लोगों को बिस्किट बांटता हुआ

'हमने चाय-बिस्किट बांटे, पर साथियों और सीनियरों को'

सभी बच्चे दिल्ली पहुंच चुके हैं. इनमें से कुछ बच्चों से जब बीबीसी ने बात की तो उन्होंने भाजपा प्रदेश कार्यालय में चाय-बिस्किट बांटने की बात को सही बताया.

हालांकि उनकी बातों में एक विरोधाभास देखने को मिला. एक ने जहां अपने शिक्षकों को चाय-बिस्किट बांटने की बात बताई तो दूसरे ने सीनियर खिलाड़ियों को.

महिला कबड्डी टीम की एक खिलाड़ी ने कहा, "वहां चाय-बिस्किट की व्यवस्था थी. सभी को खुद से चाय-बिस्किट लेना था. कुछ बच्चों ने वहां उपस्थित शिक्षकों को चाय पिलाई थी."

वहीं पुरुष कबड्डी टीम के एक सदस्य ने बताया, "दिल्ली आने से पहले हम लोगों के लिए भाजपा कार्यालय में सम्मान समारोह का आयोजन किया गया था. वहां खिलाड़ियों के अलावा मीडिया के लोग थे, हमारे नगर विकास मंत्री सीपी सिंह और भाजपा के कार्यकर्ता मौजूद थे."

"हमलोगों ने चाय-बिस्किट खुद की मर्जी से बांटे थे. हमने हमारी टीम के सीनियर खिलाड़ियों को चाय पिलाई थी."

आपने अपनी ही टीम के समकक्ष खिलाड़ी को चाय क्यों पिलाई, इस सवाल पर उन्होंने कहा, "हमारी टीम में कुछ खिलाड़ी सीनियर हैं, उन्हें चाय पिलाई थी. पर हम लोगों ने किसी और को चाय नहीं पिलाई थी."

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Image caption भाजपा के प्रदेश कार्यालय में सम्मानित किए गए खिलाड़ी

'बच्चों पर कुछ न बोलने का दबाव'

समारोह को कवर करने पहुंचे एक स्थानीय पत्रकार ने नाम न छापने की शर्त पर दावा किया कि ये खिलाड़ी वहां मीडियाकर्मियों और कुछ अधिकारियों को चाय बांट रहे थे. जब सोशल मीडिया पर इसका वीडियो फैलने लगा, तब इस पर विवाद बढ़ गया.

उन्होंने कहा, "बच्चे पहले इस बात को स्वीकार कर रहे थे कि उन्हें चाय-बिस्किट बांटने को कहा गया था. पर जब वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो उन पर कुछ भी न बोलने का दवाब डाला गया. बच्चों को डर है कि अगर उन्होंने कुछ कहा तो उन्हें टीम से निकाल दिया जाएगा."

इस सम्मान समारोह की ख़बर ज़्यादातर अख़बारों के झारखंड संस्करण में है, लेकिन उसमें इस विवाद का ज़िक्र नहीं है.

इसमें ग़लत क्या है: भाजपा

मामले पर सफाई देते हुए झारखंड प्रदेश के महामंत्री दीपक प्रकाश ने बीबीसी से कहा, "हम लोग एक परिवार की तरह हैं. परिवार में अगर छोटे बच्चे बड़े को खाना या चाय पिलाते हैं तो इसमें बुरा क्या है? मामले को बेवजह तूल दिया जा रहा है. परिवार में बड़े भी छोटे को खाना-पीना कराते हैं. हमलोग भी ऐसा ही करते हैं."

वहीं, समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए नगर विकास मंत्री सीपी सिंह ने मामले पर पूछे जाने पर कहा, "मुझे इस बारे में कुछ मालूम नहीं है. जब मैं पहुंचा, न उस समय मुझे चाय दी गई और न पानी. कुछ नहीं दिया गया. बाकी क्या हुआ, क्या नहीं, मुझे नहीं मालूम है."

इन सभी खिलाड़ियों का चयन राज्य स्तर पर किया गया है. रांची स्थित बिरसा मुंडा स्टेडियम में हुई प्रतियोगिताओं के आधार पर इनका चयन हुआ है.

ये खिलाड़ी कबड्डी और खो-खो के हैं. दोनों खेलों की चार टीमें हैं.

इन खिलाड़ियों को भारत सरकार की योजना 'खेलो इंडिया' के तहत अंतरराष्ट्रीय खेलों के लिए तैयार किया जा रहा है.

734 खिलाड़ियों का छात्रवृत्ति

'खेलो इंडिया' के तहत पूरे देश में टैलेंट सर्च अभियान चलाया जा रहा है, जिसमें आठ से बारह साल के बच्चों को चुनकर उन्हें 2024 और 2028 में होने वाले ओलंपिक खेलों के लिए तैयार किया जाएगा.

बीते गुरुवार को खेल मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौर ने संसद में कहा था, "आज ज़रूरत है भारतीय खेलों के अंदर जो राजनीति है, उस राजनीति को ख़त्म किया जाए."

"इस साल देश आठ से बारह साल के जितने बच्चे हैं, उन सभी की हम मैपिंग करेंगे. आठ सालों तक इन पर पांच लाख रुपए खर्च किए जाएंगे ताकि जब वे 16 साल के हो तो उस समय तक वे अपने आप अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर आ जाएं. ये बदलाव हम कर रहे हैं 2024 और 2028 ओलंपिक खेलों के लिए."

जिस दिन रांची में 'खेलो इंडिया' के खिलाड़ियों के साथ ऐसा हुआ, उसी दिन भारतीय खेल प्राधिकरण ने 734 खिलाड़ियों को छात्रवृत्ति देने की घोषणा की.

इन सभी खिलाड़ियों को साल में 1.2 लाख रुपए दिए जाएंगे ताकि ये बेहतर खिलाड़ी बन सकें.

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