क्या है 'नेशनल रजिस्टर ऑफ़ सिटिज़नशिप'?

  • 25 जुलाई 2018
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असम 'नेशनल रजिस्टर ऑफ़ सिटिज़नशिप' के दूसरे भाग के जारी होने के लगभग हफ्ते भर पहले केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि 30 जुलाई को जो लिस्ट जारी होनी है वो महज़ एक मसौदा होगी और फ़ाइनल ड्राफ्ट के प्रकाशन के पहले भारत के सभी शहरियों को अपनी नागरिकता साबित करने का मौक़ा दिया जाएगा.

असम में फ़िलहाल सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में नागरिकों के दस्तावेज़ों का लेखा-जोखा किया जा रहा है. इसे लेकर कुछ हलकों में गहरी चिंता है. ऐसी शिकायतें भी आ रही हैं कि बंगाली भाषी और धर्म विशेष से जुड़े लोगों के मामले में गड़बड़ियां हो रही हैं.

गृह मंत्री ने रविवार को ट्वीट के माध्यम से दिए गए बयान में कहा कि जिसे भी रजिस्टर को लेकर किसी तरह की शिकायत होगी उसकी जांच की जाएगी और इस तरह के सभी मामलों के निपटारे के बाद ही सिटिज़नशिप की फ़ाइनल रजिस्टर का प्रकाशन होगा.

क्या है रजिस्टर ऑफ़ सिटिज़नशिप?

रजिस्टर ऑफ़ सिटिज़नशिन एक ऐसी सूची है जिसमें असम में रहनेवाले उन सभी लोगों के नाम दर्ज होंगे जिनके पास 24 मार्च 1971 तक या उसके पहले अपने परिवार के असम में होने के सबूत मौजूद होंगे.

असम देश का इकलौता राज्य है जहां के लिए इस तरह के सिटिज़नशिप रजिस्टर की व्यवस्था है. इस तरह का पहला रजिस्ट्रेशन साल 1951 में किया गया था.

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1951 का रजिस्टर क्यों?

1947 में बंटवारे के समय कुछ लोग असम से पूर्वी पाकिस्तान चले गए, लेकिन उनकी ज़मीन-जायदाद असम में थी और लोगों का दोनों और से आना-जाना बंटवारे के बाद भी जारी रहा.

इसमें 1950 में हुए नेहरू-लियाक़त पैक्ट की भी भूमिका थी.

इसकी ज़रूरत क्यों पड़ी?

ये 15 अगस्त, 1985 में केंद्र और ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन के बीच हुए समझौते का हिस्सा है.

आसू ने 1979 में असम में अवैध तरीक़े से रह रहे लोगों की पहचान और उन्हें वापस भेजे जाने के लिए एक आंदोलन की शुरुआत की थी.

असम समझौते के बाद आंदोलन से जुड़े नेताओं ने असम गण परिषद नाम के राजनीतिक दल का गठन कर लिया जिसने राज्य में दो बार सरकार बनाई.

क्या हुआ है अबतक

रजिस्ट्रार जनरल ऑफ़ इंडिया ने 1 जनवरी, 2018 को 1.9 करोड़ असमिया लोगों की सूची जारी की. ये असम के कुल 3.29 करोड़ लोगों में से हैं.

समाचार एजेंसी पीटीआई का कहना है कि पहले ड्राफ्ट के रिलीज़ के वक्त भारत के रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया शैलेश ने कहा था, "इस मसौदे में उन 1.9 करोड़ से कुछ अधिक लोगों के नाम हैं जिनके दस्तावेज़ों को सत्यापित किया जा चुका है. दूसरे नाम जांच की विभिन्न चरण में हैं. जैसे ही उनका सत्यापन हो जाएगा हम अगला ड्राफ्ट प्रकाशित करेंगे."

नागिरकों के सत्यापन का काम सुप्रीम कोर्ट के हुक्म पर मई 2015 में शुरू हुआ.

किसे माना जाएगा भारत का नागरिक?

जिनके नाम या जिनके पूर्वजों के नाम 1951 के एनआरसी में या 24 मार्च 1971 तक के किसी वोटर लिस्ट में मौजूद हों.

इसके अलावा 12 दूसरे तरह के सर्टिफ़िकेट या काग़ज़ात जैसे जन्म प्रमाण पत्र, ज़मीन के काग़ज़, पट्टेदारी के दस्तावेज़, शरणार्थी प्रमाण पत्र, स्कूल-कॉलेज के सर्टिफ़िकेट, पासपोर्ट, अदालत के पेपर्स भी अपनी नागरिकता प्रमाणित करने के लिए पेश किए जा सकते हैं.

अगर किसी व्यक्ति का नाम 1971 तक के किसी भी वोटर लिस्ट में न मौजूद हो, लेकिन किसी दस्तावेज़ में उसके किसी पूर्वज का नाम हो तो उसे पूर्वज से रिश्तेदारी साबित करनी होगी.

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Image caption मुस्लिमों के नाम शामिल होने को लेकर कई तरह की शिकायतें आ रही हैं

कैसे हो रहा है एनआरसी का काम?

रजिस्ट्रार जनरल ने जगह-जगह एनआरसी केंद्र खोले हैं जहां से लोग अपनी नागरिकता के बारे में पता कर सकते हैं.

कई मामलों में बार्डर पुलिस लोगों को इस सिलसिले में नोटिस भेजती है जिसके बाद उन्हें फ़ॉरेनर्स ट्राइब्यूनल में अपनी नागरिकता के सबूत देने होते हैं.

इस मामले में अंतिम सुनवाई हाई कोर्ट में हो सकती है.

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