श्रीलंका में 'जीतकर' भी चीन से क्यों हार रहे हैं पीएम मोदी?

  • 24 जुलाई 2018
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चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने श्रीलंका को 29 करोड़ 50 लाख डॉलर का नया क़र्ज़ दिया है.

भारत के पड़ोसी और सांस्कृतिक रूप से क़रीब रहे श्रीलंका में चीन के इस क़दम को हिन्द महासागर में उसके विस्तार और भारत की लाचारी के तौर पर देखा जा रहा है.

श्रीलंका पहले से ही चीनी क़र्ज़ तले दबा हुआ था और क़र्ज़ नहीं चुका पाने के कारण उसे हन्मबनटोटा पोर्ट चीन के हवाले करना पड़ा था.

चीन के बहुदेशीय वन बेल्ट वन रोड परियोजना में श्रीलंका साझेदार है.

इसी परियोजना से जुड़े एक समारोह में पिछले हफ़्ते शनिवार को श्रीलंका के राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरीसेना ने घोषणा की थी कि कोलंबो से 230 किलोमीटर दूर उनके चुनावी क्षेत्र पोनोनारुवा में चीन एक किडनी हॉस्पिटल बनाएगा.

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सिरिसेना भी गए चीन के पाले में?

सिरीसेना ने इस मौक़े पर पत्रकारों से कहा, ''जब चीन के राजदूत मेरे आवास पर समारोह की तारीख़ तय करने आए तो उन्होंने कहा कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने आपके लिए एक और उपहार भेजा है. उन्होंने दो अरब यूआन मेरे मन मुताबिक़ किसी भी परियोजना के लिए दिया है. मैं चीनी राजदूत को एक प्रस्ताव देने जा रहा हूं कि चीन श्रीलंका के सभी जनप्रतिनिधियों के लिए एक-एक घर बनाए.''

चीन को लेकर मैत्रीपाला की यह सहृदयता भारत को सतर्क करने वाली मानी जा रही है. 2015 में जब श्रीलंका में संसदीय चुनाव हुए तो कहा गया कि भारत ने मैत्रीपाला को सत्ता तक पहुंचाने में मदद की थी.

तब महिंदा राजपक्षे को चीन समर्थक राष्ट्रपति माना जाता था और भारत चाहता था कि श्रीलंका में सत्ता परिवर्तन हो. हालिया घटनाक्रमों से लग रहा है कि मैत्रीपाला को भी भारत की तुलना में चीन की दोस्ती ज़्यादा रास आ रही है.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक़ शी जिनपिंग का यह 'महाउपहार' मैत्रीपाला को तब मिला है जब चीन की आलोचना हो रही है कि श्रीलंका के संसदीय चुनाव में उसने पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे को चुनाव में जीत दिलाने के लिए आर्थिक मदद की थी.

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महिंदा राजपक्षे को चीनी कंपनी से मिले 70.6 डॉलर?

पिछले महीने न्यू यॉर्क टाइम्स में रिपोर्ट छपी थी कि चाइना हार्बर इंजीनियरिंग कंपनी लिमिटेड (सीएचईसी) ने राजपक्षे को चुनाव जिताने के लिए 70.6 लाख डॉलर की रक़म दी थी. हालांकि राजपक्षे को 2015 के चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था. राजपक्षे की हार को भारत की जीत के तौर पर देखा जा रहा था.

राजपक्षे, कोलंबो में चीनी दूतावास और चीन की सरकारी कंपनी सीएचइसी ने न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट को ख़ारिज कर दिया है, लेकिन सिरीसेना की गठबंधन सरकार ने गुरुवार को संसद में इस मुद्दे पर बहस कराई थी और इसकी जांच की घोषणा की है.

जब सिरीसेना सत्ता में आए थे तो उन्होंने राजपक्षे के कार्यकाल में शुरू की गईं चीन समर्थित परियोजनाओं को भ्रष्टाचार, ज़्यादा महंगा और सराकारी प्रक्रियाओं के उल्लंघन का हवाला देकर रद्द कर दिया था. हालांकि एक साल बाद ही सिरीसेना ने मामूली बदलावों के साथ सभी परियोजनाओं को बहाल कर दिया.

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श्रीलंका का तारणहार चीन

2009 में श्रीलंका में एलटीटीई से ख़त्म हुए 26 साल पुराने गृह युद्ध के बाद चीन पहला देश था जो उसके पुनर्निमाण में खुलकर सामने आया था. सोमवार को चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग चुआंग ने दैनिक प्रेस वार्ता में कहा कि श्रीलंका और चीन दोनों पारंपरिक दोस्त हैं, इसलिए चीन श्रीलंका के हिसाब से उसके विकास में मदद करता रहेगा.

गेंग ने इस प्रेस वार्ता में कहा था, ''ज़रूरी मदद किसी ख़ास राजनीतिक माहौल के हिसाब से हम नहीं करते हैं. हमारे लिए यह ज़्यादा ज़रूरी है कि श्रीलंका के लोगों के जीवन स्तर में सुधार आए.

श्रीलंका में चीन की सारी परियोजनाएं श्रीलंका की सरकार पर क़र्ज़ के तौर पर शुरू की गई हैं और ये परियोजनाएं राजपक्षे के काल में शुरू हुई थीं. इन परियोजानओं पर अमरीका, भारत और जापान की तरफ़ से चिंता जताई जा चुकी है कि चीन कहीं श्रीलंका में सैन्य ठिकाना न बना दे. इसे लेकर श्रीलंका के भीतर भी विरोध है.

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चीन का प्रभाव रोकने में नाकाम रहा भारत?

2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद से मोदी दो बार श्रीलंका जा चुके हैं. जब हम्बनटोटा पोर्ट को श्रीलंका ने चीन को सौंपा तो मोदी सरकार की आलोचना हुई थी कि वो श्रीलंका में चीन के प्रभाव को रोकने में नाकाम रही.

तब विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने संसद में कहा था कि हम्बनटोटा को लेकर चीन ने सारा काम मनमोहन सिंह के सरकार में किया था. सुषमा ने कहा था कि मोदी सरकार के दबाव में श्रीलंका ने हम्बनटोटा की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी चीनी सैनिकों से वापस ली.

हाल के सालों में चीन ने श्रीलंका में भारी निवेश किया है. कहा जा रहा है कि चीन ऐसा अपनी नेवी की मौजूदगी बढ़ाने के लिए कर रहा है. चीन ऐसा पाकिस्तान, म्यांमार और बांग्लादेश में भी कर रहा है.

भारत का श्रीलंका में चीनी विस्तार से परेशान होना लाज़िमी है. भारत को लगता है कि चीन श्रीलंका के साथ उसके सांस्कृतिक संबंधों की जड़ों को कमज़ोर कर रहा है. श्रीलंका में तमिल मूल के लोग भी बड़ी संख्या में रहते हैं.

महिंदा राजपक्षे चीन समर्थक राष्ट्रपति माने जाते थे, लेकिन सिरीसेना की छवि भारत समर्थक होने के बावजूद चीन का प्रभाव श्रीलंका में कम नहीं हो रहा है.

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श्रीलंका की अर्थव्यवस्था

श्रीलंका की अर्थव्यवस्था की हालत दिनोंदिन ख़राब होती जा रही है. श्रीलंका की आर्थिक वृद्धि पिछले 16 सालों में सबसे निचले स्तर पर आ गई है. शुक्रवार को श्रीलंका के केंद्रीय बैंक ने डेटा जारी किया था जिसके मुताबिक एक डॉलर में श्रीलंकाई रुपया 157.4628 पर पहुंच गया है.

इस साल श्रीलंकाई रुपए में तीन फ़ीसदी की गिरावट आई है. जनवरी 2015 में मैत्रीपाला सिरीसेना ने श्रीलंका की सत्ता संभाली थी और तब से श्रीलंकाई रुपए में 20 फ़ीसदी की गिरावट आई है.

निक्केई एशियन रिव्यू के अनुसार क़रीब दो करोड़ आबादी वाला देश श्रीलंका एशिया में सबसे ज़्यादा विदेश क़र्ज़ के तले दबा है. इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड के अनुमान के अनुसार श्रीलंका पर 71.9 अरब डॉलर का क़र्ज़ है. यह उसकी जीडीपी का 77 फ़ीसदी है.

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